नगर निगम और जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण उपेक्षा का दंश झेल रहे तालाब के आसपास गंदगी का अंबार
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Shahi Talab Jabalpur: गोंडवाना काल का शाही तालाब मध्य प्रदेश नगर एवं ग्राम निवेश विभाग द्वारा ताल का 1.55 हेक्टेयर क्षेत्रफल है. यह तालाब अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है. जबलपुर गढ़ा संजीवनी नगर के बीचों-बीच स्थित इस तालाब के पानी का रंग बदल चुका है. आसपास की रेलिंग टूटने लगी है. देख-रेख के अभाव में रहवासी किनारों को कचराघर बनाने पर तुले हैं, हालांकि स्वास्थ्य को लेकर चिंतित लोग अभी भी तालाब के किनारे सुबह-शाम टहल रहे हैं, लेकिन उन्हें जो शुद्ध हवा मिलनी चाहिए, वह तालाब के भीतर और बाहर की गंदगी के कारण नसीब नहीं हो रही है. नगर निगम ने इस तालाब की ओर सालों से झांककर नहीं देखा, इसी वजह से दुर्गति का शिकार होता जा रहा है. लोगों का कहना है कि नगर निगम अगर इस तालाब की साफ-सफाई कर सौंदर्यीकरण कर दे तो शहर के दूसरे तालाबों की तरह इसका भी रूप निखर आएगा.
कचरा घर बने किनारे
शाही तालाब के किनारों को लोगों ने कचराघर बना दिया है. जगह-जगह लगे कचरे के ढेर के कारण तालाब की खूबसूरती पर ग्रहण लग रहा है, हालांकि नगर निगम प्रशासन ने कचरा फेंकने के लिए यहां भी हरे और नीले रंग के डस्टबिन लगाकर रखे हैं, लेकिन लोग डस्टबिन में कम और बाहर ज्यादा कचरा फेंकते हैं.
टूट गई पिचिंग
तालाब के चारों तरफ ग्रिल और पाथ-वे बनाने का काम सालों पहले हुआ था, उसके बाद से निगम की टीम कभी तालाब की तरफ झांकने भी नहीं गई. यही वजह है कि किनारे की पिचिंग टूटने लगी है. किनारे पर लगे पत्थर निकलकर पानी में समा गए हैं, इससे किनारों के धंसकने का खतरा पैदा हो गया है. लोग यहां मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक के लिए आते हैं, इसलिए किनारे के साथ पाथ-वे में लगे पेवर ब्लॉक की मरम्मत भी होनी चाहिए.
सालों से नहीं हुई सफाई
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यह तालाब संजीवनी नगर के लोगों के लिए ऑक्सीजन का काम करता है, लेकिन नगर निगम द्वारा इसकी सफाई नहीं कराई जा रही है. नतीजा तालाब के पानी का रंग हरा होता जा रहा है. एक बार चोई निकालकर तालाब को साफ कर दिया जाए तो इसे इसे नवजीवन मिल सकता है. तालाब का पानी गंदा होने से कई दफा बदबू भी उठती है, जिसके कारण आसपास के रहवासियों को परेशानी होती है.
नवरात्र में पूजन करने आती थीं रानी दुर्गावती
शाही तालाब से लगा आदिशक्ति का मंदिर भी है. इस मंदिर को रानी दुर्गावती ने बनवाया था. किंवदंती है कि रानी दुर्गावती, विशेष रूप से नवरात्र के दौरान, शाही तालाब और आदिशक्ति मंदिर में नियमित रूप से प्रार्थना करने जाती थीं. यह भी कहा जाता है कि मुगलों के खिलाफ अपनी आखिरी लड़ाई से पहले, यही वह आखिरी जगह थी, जहां वे प्रार्थना करने आई थीं.
Source : DB News Update

