चैत्र नवरात्रि में 9 दिन माता को उनके प्रिय भोग लगाएं और मातारानी के प्रमुख रंगों का परिधान पहनें. मान्यता है इससे मुरादें जल्द पूरी होती है.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Chaitra Navratri Bhog: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि को शक्ति उपासना का प्रमुख पर्व माना जाता है. इन दिनों माता के दिव्य स्वरूप की पूजा होती है. नवरात्रि के इन 9 दिनों में मातारानी को सच्चे मन से जो भी भोग लगाते हैं, उसे वह ग्रहण कर लेती हैं. लेकिन मातारानी की 9 शक्तियों को वे कौन से 9 भोग पसंद हैं. जिससे जगत जननी को भोग लगाने से प्रसन्न होती हैं और जल्द मनोकामना की पूर्ति होती है.जानें..
चैत्र नवरात्रि 9 दिन के 9 भोग
पहला दिन (30 मार्च 2025)-
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा में गाय के घी भोग लगाने चाहिए. इससे रोगों से मुक्ति मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
दूसरा दिन –
चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी. इस दिन माता को भोग में शक्कर अर्पित करें. मान्यता है इससे लंबी आयु का वरदान मिलता है. इस साल तिथियों का क्षय होने के कारण द्वितीया या तृतीया तिथि एक ही दिन है.
तीसरा दिन
चैत्र नवरात्र का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है. इस दिन दूध या दूध से बनी मिठाई से भोग लगाएं. कहते हैं इससे कीर्ति, सम्मान मिलता है. धन प्राप्ति के योग बनते हैं.
चौथा दिन –
नवरात्रि की चतुर्थी पर मां कूष्मांडा की पूजा में मालपुए का भोग लगाएं. फिर इसे ब्राह्मण को दान दें. मान्यता है इससे बौद्धिक विकास होता है. निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है.
पांचवा दिन –
नवरात्रि की पंचमी मां स्कंदमाता को समर्पित है. अच्छे स्वास्थ की कामना के साथ इस दिन माता को केले का भोग लगाना चाहिए. मुरादें जल्द पूरी होने की मान्यता है.
छठा दिन –
नवरात्रि का षष्ठी तिथि पर मां दुर्गा की 6वीं शक्ति मां कात्यायनी की पूजा होती है, इस दिन मां को शहद का भोग लगाया जाता है. कहते हैं सुख के साथ सौंदर्य प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है.
सातवां दिन –
नवरात्र के महासप्तमी के दिन मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा होती है. इस दिन मां कालरात्रि को गुड़ से निर्मित भोग अर्पित करना चाहिए. ऐसा करने से रोग-शोक से मुक्ति मिलती है और परिवार भी स्वस्थ्य रहता है.
आठवां दिन –
नवरात्र की महाष्टमी पर मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है. इस दिन खास तौर पर नारियल का भोग लगता है. मान्यता है इससे सांसारिक सुख मिलता है.
नवमी –
नवरात्र के आखिरी दिन महानवमी पर मां सिद्धिदात्री को पूजा में हलवा, पूड़ी, चना के सब्जी का भोग लगता है. सुख-समृद्धि और सिद्धियां प्राप्ति के लिए इस दिन हवन, कन्या पूजन भी करना चाहिए.
कौन से रंग का कपड़ा पहनकर मातारानी का पूजन करें
- प्रतिपदा के दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है और इस दिन पीला रंग पहनना शुभ माना जाता है, जो खुशी और नई शुरुआत का संकेत देता है.
- द्वितीया पर मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है, इस दिन हरा रंग शांति, संतुलन और विकास का प्रतीक माना जाता है.
- तृतीया के दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है और ग्रे रंग पहनना धैर्य और संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है.
- चतुर्थी पर मां कूष्मांडा की आराधना होती है, इस दिन ओरेंज रंग ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता को दर्शाता है.
- पंचमी के दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है और सफेद रंग पवित्रता, शांति और सादगी का प्रतीक माना जाता है.
- षष्ठी पर मां कात्यायनी की आराधना की जाती है, इस दिन लाल रंग शक्ति, प्रेम और साहस को दर्शाता है.
- सप्तमी के दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है और रॉयल ब्लू रंग नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा और आत्मबल का प्रतीक है.
- अष्टमी, जिसे दुर्गा अष्टमी भी कहा जाता है, मां महागौरी को समर्पित होती है और इस दिन गुलाबी रंग प्रेम, करुणा और सौम्यता को दर्शाता है.
- नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है और बैंगनी रंग आध्यात्मिकता, सफलता और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है.
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