एमपी के जबलपुर में वर्षों पर्यटकों को अचंभित कर रहा विशालकाय पत्थर, 1997 में 6.2 की तीव्रता का आया था भूकंप फथ्र भी नहीं हिला
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Balancing Rock Jabalpur : मध्य प्रदेश जबलपुर का बैलेंससिंग रॉक दुनिया भर में चर्चित है. इस विशालकाय पत्थर के रहस्य को जानने के लिए देश-विदेश से हजारों की संख्या में पर्यटक हर वर्ष आते हैं. अचंभित करने वाले पत्थर का रहस्य इतना गूढ़ है कि इसकी हकीकत जानने में वैज्ञानिक भी असफल साबित हो रहे हैं. क्योंकि एक पत्थर के ऊपर दूसरा पत्थर महज साढ़े 6 वर्ग इंच पर टिका हुआ है, जो पर्यटकों के कौतूहल का कारण बन रहा है. पर्यटकों के लिए आकर्षण और अचंभित करने वाला यह पत्थर बैलेंस रॉक के नाम से अपनी पहचान बना चुका है. क्योंकि इसे 1997 वर्ष में आए भूकंप के झटके से भी कोई फर्क नहीं पड़ा. जहां के तहां टिका हुआ है.
रानी दुर्गावती किला के नजदीक है बैलेंस रॉक
जबलपुर मदन महल पहाड़ी पर स्थित रानी दुर्गावती का किला भी पर्यटकों को आश्चर्यचकित कर रहा है. क्योंकि किले का आधा हिस्सा एक पत्थर के ऊपर ही बना दिखाई पड़ रहा है. इसी किले के नजदीक बैलेंसिंग रॉक है, जिसकी खासियत जानने के लिए पर्यटक मदन महल पहाड़ी पहुंच रहे हैं.
बैलेंस रॉक के रोचक तथ्य
भूकंप का झटका सहने की क्षमता:
जबलपुर में 6.5 रिक्टर तीव्रता का भूकंप आया था, जिसे बैलेंसिंग रॉक 1997 में अपने स्थान से हिलने से बचा रहा.
सबसे कम जगह पर स्थापित:
बैलेंस रॉक जिस चट्टार पर टिका है. उन दोनों चट्टानों के बीच का संपर्क बिंदु महज साढ़े 6 वर्ग इंच का होगा, जो अविश्वसनीय है.
पर्यटक हो रहे आकर्षित:
मदन महल पहाड़ी का बैलेंसिंग रॉक जबलपुर में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, जो दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है.
पर्यटक स्थल के रूप विकास :
बैलेंसिंग रॉक और मदन महल का रानी दुर्गावती का किला लोकल पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहा है. यह स्थान सबसे ज्यादा लोकप्रिय पर्यटन के रूप में जाना जाने लगा है.
पौराणिक मान्यताएं:
स्थानीय किंवदंतियों की मानें तो बैलेंसिंग रॉक को पौराणिक कथा-कहानियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसे एक धार्मिक और पवित्र स्थान के रूप में पहचान मिली है.
पर्यटकों के लिए आवश्यक जानकारी
रहस्य जानने के लिए समय:
बैलेंसिंग रॉक पूरे वर्षभर आगंतुक पर्यटकों के लिए खुला रहता है और आमतौर पर इसे देखने में केवल 10 से 20 मिनट लगते हैं.
प्रवेश शुल्क: बैलेंसिंग रॉक पर जाने के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है.
देखने का सही समय: पर्यटन स्थल घूमन-फिरने का अच्छा समय सर्दियों का होता है. नवंबर से फरवरी तक यहां का मौसम बहुत ही सुहाना होता है.
पहुंच मार्ग: रेलवे स्टेशन से महज 3 किमी और दीन दयाल बस स्टैण्ड दमोहनाका से 5 किमी की दूरी पर बैलेंसिंग रॉक मदन महल किला है. यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है.
प्राकृतिक अजूबों में रुचि रखने वालों के लिए बैलेंसिंग रॉक जबलपुर एक दर्शनीय स्थल है. इसकी अनूठी संरचना और इतिहास इसे एक अविस्मरणीय अनुभव बनाते हैं.
सालों से टिका है ये पत्थर
जबलपुर में ये पत्थर हजारों साल से ऐसे ही टिका हुआ है. इस पत्थर के बारे में पुरातत्वविद भी बताते हैं कि ये चट्टानें मैग्मा के जमने से निर्मित हुई होंगी. जबलपुर के आसपास के इलाकों में कई बैलेंसिंग रॉक हैं. पुरातत्वविद ये भी मानते हैं कि भूकंप के लिहाज से जबलपुर काफी संवेदनशील क्षेत्र है. ऐसे में कुछ लोग ये भी मानते हैं कि ये चट्टान गुरुत्वाकर्षण बल के कारण यहां टिका हुआ है.

