विदेश से मंगाई गई सिंथेटिक ट्रैक, आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल करके बनाया गया है प्रोजेक्ट, पहले फेज पर 44.76 करोड़ रुपये की लागत और दूसरे फेज का टेंडर 31.33 करोड़ का दूसरा टेंडर निकाला गया.
Source : DB News Update
Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Smart City. पंडित रविशंकर शुक्ल राइट टाउन स्टेडियम का जीर्णोद्धार स्मार्ट सिटी जबलपुर के द्वारा कराया गया. शहरवासियों और प्रतिभावान खिलाड़ियों को निखारने के लिए आरक्षित शासकीय जमीन पर खेल मैदान बनाया गया था. इस सरकारी जमीन काे एक निजी प्रोजेक्ट एजेंसी स्मार्ट सिटी को सौंपकर जनता की गाढ़ी कमाई से स्टेडियम के अंदर खेल की अन्य गतिविधियों को आधुनिक स्वरूप प्रदान किया गया और अब उन्हीं प्रतिभावान खिलाड़ियों और शहरवासियों से फीस के रूप में वसूली शुरू हो गई है, जिसका विरोध भी किया गया. लेकिन किसी जनप्रतिनिधि या जागरूक नागरिक ने इसका खुलकर विरोध नहीं किया. स्मार्ट सिटी जबलपुर द्वारा राइट टाउन स्टेडियम का विकास पहले फेज पर 44.76 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया और दूसरे फेज का टेंडर 31.33 करोड़ का निकाला गया. इसके अलावा सिंथेटिक ट्रैक भी विदेश से मंगाने पर स्मार्ट सिटी ने करोड़ों रुपये खर्च किए. अब जब स्टेडियम बनकर पूरी तरह से तैयार हो गया तो इसे निजी एजेंसी को अजीवन गिरवी रख दिया गया. शहर के खिलाड़ियों और क्षेत्रीय लोगों की सेहत का ध्यान रखकर निर्णय नहीं लिया गया. जिसके कारण आम आदमी से वसूली की जा रही है.
प्रोजेक्ट का क्या नाम है? – राइट टाउन स्टेडियम का उन्नयन.
जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड एजेंसी के माध्यम से करीब 80 करोड़ रुपये की लागत से स्टेडियम का निर्माण कराया और अभी तक यह प्रोजेक्ट कम्प्लीट नहीं हुआ. जिसके कारण नगर निगम को सुपुर्द भी नहीं हो पा रहा है. क्योंकि अभी भी मल्टीलेवल पार्किंग और शॉप की फिनिशिंग का काम बकाया है. स्मार्ट सिटी के अधिकारी इसे कम्प्लीट नहीं करा पा रहे हैं.
कब प्रोजेक्ट शुरू हुआ
सन्-2017 में पहले फेज का काम प्रारंभ हुआ, उसके बाद फेज-2 में मल्टीलेवल पार्किंग और खिलाड़ियों को ठहरने के लिए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होटल-रेस्टॉरेंट का निर्माण करने के लिए दूसरा टेंडर निकाला गया. ये दोनों टेंडर का काम 2022 में खत्म हो जाना था. लेकिन स्टेडियम के कई काम आज भी अधूरे हैं.
क्यों निर्माण कराने की जरूरत पड़ी
स्मार्टनेस- अत्याधुनिक तकनीक से स्टेडियम को सुसज्जित करके खिलाड़ियों में स्मार्टनेस का आभास कराने के लिए प्रोजेक्ट को लांच किया गया. जिसमें इनडोर बैडमिंटन टेबल टेनिस जिम जैसी सुविधाएं विकसित की गई. वहीं मैदान पर ट्रैक बिछाया गया है. मैदान की हाईट ऊंची की गई है.
कहां होना था निर्माण
एडीबी (एरिया बेस्ड डेवलपमेंट) क्षेत्र राइट टाउन में खेल प्रतिभा निखारने के उद्देश्य से पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम का निर्माण कराया गया, जिससे जबलपुर की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर हो सके. इसे नये अत्याधुनिक तरीके से डेवलपमेंट किया गया.
कैसे मिला फंड
केन्द्र सरकार द्वारा 100 स्मार्ट सिटीज का चयन किया. जिससे उन्हें आधुनिक तरीके से डेवलप किया जा सके. इसके लिए प्रत्येक स्मार्टसिटी को 1000 करोड़ रुपये फंड अलॉट किया गया. लेकिन कागजों में जो प्रोजेक्ट दिखाए गए, उनमें से कोई भी प्रोजेक्ट जमीनी स्तर पर देखने को नहीं मिल रहे हैं. लिहाजा स्मार्ट सिटीज कान्सेप्ट को आगे बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार से दोबारा फंडिंग नहीं हुई.
आम आदमी के टैक्स से बना स्टेडियम और उन्हीं से फीस वसूली
राइट टाउन स्टेडियम निर्माण में आम आदमी के टैक्स के पैसों से निर्माण कराया गया है और उन्हीं से स्टेडियम की गतिविधियों में शामिल होने के लिए फीस देनी पड़ रही है. इससे पहले यहां सामान्य तौर पर ऐसे खिलाड़ी आते थे, जो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं थे. वे यहां पर गोला फेक, दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद जैसे एथलेटिक्स खेलों की तैयारी करते थे. इसके अलावा जूडो कराटे के कई क्लब यहां चलते थे. इन सब से भी बढ़कर जबलपुर का यह स्टेडियम आम लोगों के लिए वॉकिंग के इस्तेमाल में आता था, लेकिन इसके उन्नयन के बाद अब इसमें बिना एंट्री फीस के कोई भी खिलाड़ी अंदर नहीं जा सकता. जाहिर सी बात है कि सब खिलाड़ियों के पास खासतौर पर जबलपुर में इतना पैसा नहीं होता कि वे महंगे संसाधनों का उपयोग कर सकें. स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जो निर्माण किए गए हैं. उनका पैसा उनके इस्तेमाल करने वालों से फीस के रूप में वसूला जाएगा. जबलपुर में ऐसे लगभग एक हजार करोड़ के प्रोजेक्ट लांच किए गए और उनका निर्माण किया गया है. अब इनको कोई किराए से लेने को तैयार नहीं है, क्योंकि इनकी निर्माण लागत और इनका मेंटेनेंस कॉस्ट इतना अधिक है कि लोग इतनी अधिक फीस नहीं दे सकते.
