गर्मियों में आप भी ढूंढ रहे हैं घूमने के लिए बेहतरीन जगह, तो आइए बताते हैं कुछ बेहतरीन और गर्मी से राहत पाने वाली जगह.
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Summer Vacation Travel Guide: गर्मी की छुट्टियों में अधिकांश लोग एकांत और प्रकृति के बीच रहने की इच्छा रखते हैं. ऐसे लोगों के लिए मध्य प्रदेश में कई ऐसे पहाड़, वन क्षेत्र और नेशनल पार्क हैं, जहां जाने के बाद आनंद का अनुभव होता है. आप भी यदि अपने परिवार के साथ वन्य जीव और जंगल की सैर करने की इच्छा रखते हैं तो एमपी का व्हाइट टाइगर सफारी, पेंच नेशनल पार्क, बांधवगढ़ रिजर्व पार्क, कांन्हा रिजर्व पार्क जाना चाहिए और आनंद का अनुभव करना चाहिए. आइए जानते हैं टाइगर सफारी के प्रमुख स्थान और वहां की खूबसूरती के संबंध में…
व्हाइट टाइगर सफारी
महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव व्हाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर, जिला मैहर के खुलने और बंद होने के समय में परिवर्तन किया गया है. व्हाइट टाइगर सफारी के संचालक की अवधि पर्यटकों के लिए सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक है. प्रत्येक बुधवार को टाइगर सफारी बंद रखा गया है. व्हाइट टाइगर सफारी में सफेद बाघ, बंगाल टाइगर सहित विभिन्न वन्य जीव उपलब्ध हैं. पर्यटक वर्ड एवियरी में दुनिया के कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी देख सकते हैं. टाइगर सफारी में सुंदर तितलियों का संसार और रैप्टाइल पार्क में कई सांपों को भी देखने से मन प्रफुल्लित हो जाता है. परिवार के हर सदस्य को यहां के रहस्य को जानने की उत्सुकता जाग्रत होती है. यहां जाने के लिए हवाई मार्ग रीवा और सतना एयरपोर्ट बनकर तैयार हो चुके हैं. सड़क मार्ग जबलपुर से रीवा नेशनल हाइवे-30 से मैहर मुकुंदपुर पार्क तक पहुंचा जा सकता है. यहां ठहरने के लिए होटल, लॉज आदि की सुविधा भी है.
पेंच टाइगर रिजर्व (Pench Tiger Reserve)
एमपी के सिवनी जिले में स्थित यह पार्क महाराष्ट्र की सीमा से लगा हुआ है. यह बाघ अभयारण्य के रूप में जाना जाता है. पेंच नदी के नाम पर रखे गए इस रिजर्व को रुडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध रचना ‘द जंगल बुक’ का वास्तविक कथा स्थल माना जाता है. यहां रॉयल बंगाल टाइगर, तेंदुए, जंगली कुत्ते, चीतल, सांभर जैसे 200 से अधिक पशु-पक्षियों की अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं. यहां पहुंचने के लिए जबलपुर से नागपुर नेशनल हाइवे के अलावा छिंदवाड़ा और नागपुर हवाई अड्डे से आसानी से पहुंचा जा सकता है. पर्यटकों के लिए यहां ठहरने के लिए होटल, लॉज आदि का सुविधा है.
कान्हा राष्ट्रीय वन उद्यान (Kanha Tiger Reserve)
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्थित एक प्रसिद्ध बाघ अभयारण्य है. सतपुड़ा की मैकल पर्वतमाला में फैला यह उद्यान अपने घने साल और बांस के जंगलों, घास के मैदानों और दुर्लभ ‘बारहसिंगा’ के लिए प्रसिद्ध है. यहां बंगाल टाइगर, तेंदुए, जंगली भालू और देश में सबसे अधिक शाकाहारी जानवर जैसे चीतल और सांभर पाए जाते हैं. बंजर और हेलोन नदियां इस उद्यान के प्रमुख जलस्रोत हैं. यहां पहुंचने के लिए जबलपुर से मंडला के लिए सड़क मार्ग से जाना होगा और हवाई अड्डा जबलपुर डुमना का इस्तेमाल करना होगा. हलांकि टाइगर कॉरिडोर बनने के बाद यहां पहुंचना और भी आसान हो जाएगा.
बांधवगढ़ नेशनल पार्क
मध्य प्रदेश के उमरिया और कटनी जिले में प्रसिद्ध बाघ अभयारण्य है. यहां बाघों को देखने की संभावना बहुत अधिक होती है. इसे तीन प्रमुख कोर जोन-ताला, मगदी और खितौली में विभाजित किया गया है. पार्क के अंदर कई प्रजाति के चीतल, सांभर, भौंकने वाले हिरण, नीलगाय, चिंकारा, जंगली सुअर, चौसिंगा, लंगूर और रीसस मकाक के अलावा बाघ, तेंदुआ, जंगली कुत्ता, भेड़िया और सियार जैसे प्रमुख शिकारी जानवर पाए जाते हैं. भालू, साही, भारतीय पैंगोलिन, चमगादड़ के विभिन्न प्रकार यहां देखने को मिल जाएंगे. इतना ही नहीं यहां सबसे ऊंची पहाड़ी पर प्राचीन किला भी देखने को मिल जाएगा. जहां शेषाशय मंदिर भी है, जो किले के रास्ते में पड़ता है. भगवान विष्णु की एक विशालकाय लेटी हुई मूर्ति है. यहां पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन उमरिया और कटनी हैं और हवाई अड्डा जबलपुर का डुमना एयरपोर्ट है. यहां पर्यटकों को रुकने के लिए बांधवगढ़ में होटल और रिसॉर्ट भी उपलब्ध हैं.
वन्यजीवों के प्रजनन के समय बंद रहते हैं पार्क
इन पार्कों में वन्यजीव बड़ी संख्या हैं. बारिश के दिनों में इन वन्यजीवों का प्रजननकाल के लिए समय होता है. ऐसी स्थिति में उन वन्यजीवों की गतिविधियों में किसी प्रकार का व्यवधान न हो, इसलिए टाइगर सफारी बंद रखा जाता है. बारिश में जंगल के कच्चे मार्ग और भी अधिक कठिन हो जाते हैं, कई रास्ते बंद हो जाते हैं, नालों में पानी भर जाता है और दृश्यता कम हो जाती है, जिससे वाहन चलाना खतरनाक हो जाता है.

