माता पार्वती के स्वरूप देवी अन्नपूर्णा के दिन गेहूं, चावल, उदड़, राई जैसे कुछ चीजों का दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Annapurna Jayanti 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा को देवी मां अन्नपूर्णा की जन्मोत्सव मनाने का विधान है. ऐसी मान्यता है कि इसी तिथि पर मां अन्नपूर्णा का अवतरण हुआ था. वर्ष 2025 में अन्नपूर्णा जयंती गुरुवार 4 दिसंबर 2025 को पड़ रही है. इस दिन अन्नपूर्णा स्वरूप के अवतरण दिवस का पावन पर्व माना गया है, जो भोजन, समृद्धि और जीवन निर्वाह की अधिष्ठात्री देवी हैं. यह त्योहार घर में सुख-समृद्धि, अन्न-धन की कभी कमी न होने और रसोईघर को पवित्र रखने के लिए मनाया जाता है.
कैसे करें मां अन्नपूर्णा की पूजा?
- अन्नपूर्णा जयंती पर पूजा करने के लिए सबसे पहले तन और मन से पवित्र हो जाएं.
- पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें.
- किचन को साफ करके वहां पर सबस पहले गंगा जल का छिड़काव करें.
- किचन पर एक चौकी में लाल रंग का आसन बिछाएं.
- उस स्थान पर सप्तधान की ढेरी बनाएं.
- किचन में ही मां अन्नपूर्णा की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें.
- मां अन्नपूर्णा के चित्र के पास एक सिक्का और हल्दी की गांठ रखें.
- देवी के पास एक कलश में आम या अशोक के पत्ते के साथ श्रीफल रखें.
- माता अन्नपूर्णा को रोली-चंदन आदि का तिलक लगाकर.
- अन्नपूर्णा मां को पुष्प आदि अर्पित करें.
- पूजन स्थल पर दीप जलाकर.
- अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करें.
- मां अन्नपूर्णा के मंत्र ॐ ह्रीं माहेश्वरी अन्नपूर्णे नमः” का कम से कम 11 माला जप करें.
- मां से कामना करें कि पूरे साल उनका वास आपके घर पर बना रहे और आपको कभी भी धन और अन्न की कमी न हो.
मां अन्नपूर्णा की पूजा का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार अन्नपूर्णा जयंती पर विधि-विधान से पूजा और व्रत रखने पर साधक को पूरे साल अन्न की कमी नहीं होती है. मां अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से उसके घर में धन और अन्न दोनों का भंडार भरा रहता है. मां अन्नपूर्णा की पूजा करने वाले साधक के यहां कभी भी पैसों और अन्न का अकाल नहीं पड़ता है. मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा की पूजा करने वाले भक्त के घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है और उसके यहां आने वाले वाले मेहमान और कोर्ठ भी व्यक्ति कभी खाली पेट नहीं जाता है.
अन्न भण्डार भरे रहने का मिलता है आशीष
अन्नपूर्णा जयंती के दिन देवी अन्नपूर्णा की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है मातारानी की पूजा करने से घर पर अन्न-भंडार हमेशा भरा रहता है. साथ ही इस दिन कुछ उपाय भी किए जाते हैं, जिससे मनोवांच्छित फलो की प्राप्ति होती है. साथ ही कुंडली के दोष भी दूर होते हैं. इसलिए इस दिन कुछ चीजों का दान करना शुभ माना गया है.
इनका करें दान
जौ का दान-
अन्नपूर्णा जयंती पर जौ का दान करने से गुरु ग्रह की शुभता बढ़ती है. साथ करियर संबंधी बाधाएं भी दूर होती हैं. अन्नपूर्णा जयंती पर जौ दान करने से घर का अन्न और धन का भंडार भरा रहता है.
राई का दान-
अन्नपूर्णा जयती पर राई का दान करना भी शुभ होता है. राई का दान कुंडली में कमजोर राहु को मजबूत करता है.
गेहूं का दान-
गेहूं का दान करना सुख-सौभाग्य को बढ़ाता है और कुंडली में सूर्य ग्रह को मजबूत करता है. इस दिन गेहूं का दान करने से आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा, सरकारी काम और पिता से संबंधित मामलों में सुधार आता है. जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.
उड़द का दान-
उड़द शनि ग्रह से संबंधित माना जाता है. अन्नपूर्णा जयंती पर उड़द का दान करने से शनि की पीड़ा कम होती है, बाधाएं दूर होती हैं और कामकाज में स्थिरता आती है. जीवन में अनुशासन और धैर्य बढ़ता है.
चावल का दान-
चावल को धन-धान्य का प्रतीक माना जाता है. अन्नपूर्णा जयंती पर विशेषरूप से चावल का दान जरूर करें. इससे घर की रसोई कभी खाली नहीं रहेगी और धन-संपदा में भी वृद्धि होगी.
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