हिंदू धर्म में ध्वजा लगाने के अनेक फायदे बताए गए हैं, इसके लाभ, दिशा, रंग सबकुछ जानना जरूरी.
By : पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Vastu Tips For Dharm Dhwaja: किसी भी मंदिर के शिखर पर लगी ध्वजा सकारात्मक और दिव्य दैवीय शक्ति का प्रतीक मानी जाती है. हिंदू धर्म में मान्यता है कि यदि आप किसी कारणवश किसी देव स्थान के भीतर जाकर उसमें प्रतिष्ठित देवी या देवता के दर्शन न कर पाएं तो उस स्थान के धर्म ध्वज और शिखर का यदि दर्शन कर लेते हैं तो उस दिव्य स्थान के जाने का पुण्यफल प्राप्त हो जाता है.
अयोध्या में भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराए जाने के बाद धर्म ध्वज की चर्चा में आ गया है. इस कारण हम मंदिर के शिखर पर लगने वाले ध्वज का महत्व बताने जा रहे हैं. मंदिर में लगा ध्वज केवल मंदिर की पूर्णता को नहीं दर्शाता है बल्कि उस ध्वज में गहरी आध्यात्मिकता, संस्कृति और पारंपरिक चेतना का केन्द्र भी बन जाता है. मंदिर के शिखर पर लगा झंडा उस मंदिर की पवित्रता की उद्घोषणा करता है.
धर्म ध्वज लगाने का विशेष महत्व
सनातन धर्म में मान्यता है कि किसी भी धार्मिक स्थल या फिर मंदिर में नारंगी झंडा लगाते हैं. कई लोग अपने घर के सामने भी ध्वज लगाने लगे हैं. लेकिन घर पर लगने वाले ध्वज की दिशा का ज्ञान होना बहुत जरूरी है. इतना ही नहीं किस रंग के ध्वज में कौन सी आकृति (चिन्ह) होना चाहिए? इसकी भी जानकारी होना चाहिए.
कौन से ध्वज किसके प्रतीक?
गणेश जी – प्रथम पूजनीय माने जाने वाले गणपति की ध्वजा का रंग सफेद होता है और उसमें उनकी सवारी मूषक का चिन्ह बना हुआ होता है.
शिव जी – भगवान शिव के लिए भी सफेद रंग की ध्वजा लगाई जाती है और इसे वृषभ ध्वजा कहते हैं. इसमें उनकी सवारी बैल अंकित होता है.
हनुमान जी – हनुमान जी के लिए केसरिया ध्वजा लगाने का विधान है. जिसमें अक्सर उनकी तस्वीर के साथ गदा अंकित होता है.
भगवान जगन्नाथ – भगवान जगन्नाथ जी के मंदिर में अर्ध चंद्र ध्वजा फहराई जाती है.
भगवान श्रीराम – भगवान श्रीराम के मंदिर फहराई जाने वाली ध्वजा में कोविदार वृक्ष और ॐ के साथ सूर्य बना होता है, क्योंकि भगवान राम सूर्यवंशी थे.
देवी दुर्गा – हिंदू मान्यता के अनुसार देवी दुर्गा के मंदिरों में सिंह ध्वजा लगाई जाती है. यह लाल रंग की होती है.
भगवान विष्णु – जगत के पालनहार कहलाने वाले भगवान विष्णु की ध्वजा पीले रंग की होती है, जिसमें उनकी सवारी गरुण का चिन्ह बना रहता है.
ब्रह्मा जी – परमपिता ब्रह्मा जी की ध्वजा को हंस ध्वजा कहते हैं.
भगवान कार्तिकेय – भगवान कार्तिकेय जी की ध्वजा को मयूर ध्वजा कहते हैं.
घर में ध्वजा लगाने से फल की प्राप्ति
- ध्वजा विजय का प्रतीक होता है, ऐसे में शास्त्रों के अनुसार जिस घर की छत पर धार्मिक ध्वजा फहराई जाती है वहां परिवार के सदस्य तरक्की करते हैं.
- ध्वजा लगाने से यश, कीर्ति और विजय प्राप्त होती है. राहु-केतु की अशुभता दूर होती है.
- ध्वज लगाने से घर के लोग रोग-दोष दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
घर में कैसा ध्वज लगाएं ?
- रंग – घर की छत पर केसरिया, पीला या लाल रंग की त्रिकोणीय ध्वज लगाना चाहिए. चिन्ह् – इस पर ‘ॐ’ या ‘स्वस्तिक’ का चिन्ह बना होना चाहिए. कुछ लोग घर में हनुमान जी के चिन्ह् वाली पताका भी फहराते हैं, इसे भी शुभ माना जाता है.
- दिशा – वास्तु के अनुसार झंडे को दक्षिण-पश्चिम में लगाना चाहिए. यह दिशा वास्तु में स्थिरता और सुरक्षा से जुड़ी मानी जाती है. झंडा हमेशा ऊंचा और साफ होना चाहिए, फटा हुआ या पुराना नहीं होना चाहिए.
किस दिन लगाएं झंडा ?
- मंगलवार को हनुमान जी का ध्वज लगाना शुभ माना जाता है.
- नवरात्रि, हिंदू नववर्ष, हनुमान जयंती आदि शुभ दिन पर घर की छत पर ध्वज लगाना शुभ माना जाता है.
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