डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के कॉलेज प्रदर्शनकारियों के नाम और राष्ट्रीयता की जानकारी मांगने से भारतीय छात्रों के लिए चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि यह कदम उन्हें भविष्य में डिपोर्टेशन का शिकार बना सकता है.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
USA News : अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम से भारतीय छात्रों को नई चिंता का कारण बन सकता है. ट्रंप सरकार ने उन छात्रों के नाम और राष्ट्रीयता की जानकारी मांगी है, जो विश्वविद्यालयों में एंटी-सेमिटिक (यहूदी विरोधी) उत्पीड़न और बड़े पैमाने पर कैंपस प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं. इस कदम से यह आशंका जताई जा रही है कि विदेशी छात्रों के लिए डिपोर्ट (निकालने) करने का जोखिम बढ़ सकता है.
क्या है मामला?
जिन विश्वविद्यालयों पर यह आरोप लगे हैं कि उन्होंने यहूदी छात्रों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी, उन पर ट्रंप प्रशासन ने सख्ती बरतने की धमकी दी है. प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि जिन छात्रों पर उत्पीड़न का आरोप है, उनके नाम, जातीयता और राष्ट्रीयता की जानकारी ली जा रही है. यह जानकारी उन छात्रों के खिलाफ एक ‘सूचना लिस्ट’ तैयार करने के लिए ली जा रही है, जिससे भविष्य में उन्हें देश से बाहर निकाला जा सके.
क्या होगा अगर यह नीति लागू होती है?
अगर ट्रंप प्रशासन की यह नीति पूरी तरह से लागू होती है, तो अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों को एक नया संकट सामना करना पड़ सकता है. ऐसे छात्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है जो किसी राजनीतिक आंदोलन में शामिल होते हैं, और उन्हें बिना अपराध साबित होने के भी निशाना बनाया जा सकता है.
छात्रों की मदद ACLU नाम की संस्था कर रही है. ACLU (अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन) की ओर से न्यू हैम्पशायर के यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दायर मुकदमे में कहा गया है याचिकाकर्ताओं के F-1 स्टेटस को एकतरफा और गैरकानूनी तरीके से खत्म करने से उनकी वैध छात्र स्थिति खत्म हो गई है. छात्र इससे वह ना केवल इमिग्रेशन हिरासत और निर्वासन के खतरे का सामना कर रहे हैं बल्कि गंभीर वित्तीय और शैक्षणिक कठिनाइयों से भी जूझ रहे हैं. छात्रों का यह भी आरोप है कि वे अपनी डिग्री के बावजूद OPT (ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) प्रोग्राम में काम नहीं कर पा रहे हैं.
छात्रों ने क्या कहा है
भारतीय छात्र लिंकिथ बाबू गोरेला ने याचिका में दावा किया है कि उनके मास्टर प्रोग्राम की ग्रेजुएशन की तारीख 20 मई है. वैध F-1 स्टूडेंट स्टेटस के बिना वह ना तो अपनी डिग्री प्राप्त कर सकते हैं और ना ही OPT कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं. भारतीय छात्र थानुज कुमार गुम्मावल्ली और मणिकंता पसुला को मास्टर डिग्री पूरी करने और OPT कार्यक्रम में भाग लेने से पहले केवल एक सेमेस्टर बचा है लेकिन उनकी ग्रेजुएशन अनिश्चित है. अगर कोर्ट उनकी मदद नहीं करता तो उनकी डिग्री अधूरी रह जाएगी.
चीनी छात्र हांगरुई झांग का कहना है कि उनकी आय का एकमात्र स्रोत रिसर्च असिस्टेंटशिप है, जो उनके F-1 स्टूडेंट स्टेटस के खत्म होने के बाद बंद हो गई है. वकीलों ने कहा कि सरकार ने विदेशी छात्र की कानूनी स्थिति को समाप्त करने से पहले आवश्यक नोटिस नहीं दिया. छात्रों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के वीजा रद्द कर दिया गया। सरकार का यह फैसला गलत है.
भारत ने क्या कहा है?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जयसवाल ने शुक्रवार, 21 मार्च को कहा कि वीजा और आव्रजन मामले उस देश के संप्रभू अधिकार में आते हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को ऐसे आंतरिक मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार है.
उन्होंने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि जब विदेशी नागरिक भारत आते हैं, तो वे हमारे कानूनों और नियमों का पालन करेंगे. इसी तरह, हम उम्मीद करते हैं कि जब भारतीय नागरिक विदेश में होते हैं, तो उन्हें स्थानीय कानूनों और नियमों का भी पालन करना चाहिए.”
साप्ताहिक ब्रीफिंग में बोलते हुए, उन्होंने छात्रों को यह भी आश्वासन दिया कि अगर उन्हें किसी भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है तो अमेरिका में मौजूद भारतीय दूतावास उनकी मदद करेंगे. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे हैं और सरकार अमेरिका के साथ शैक्षणिक संबंधों को मजबूत करना चाहती है.
उन्होंने कहा, “अगर कोई भारतीय स्टूडेंट किसी समस्या का सामना कर रहा है, तो दूतावास उनकी भलाई (और) सुरक्षा में मदद करने के लिए मौजूद है. अगर कोई भारतीय स्टूडेंट मदद चाहता है तो हम इसे जारी रखेंगे.”

