नवरात्रि के दिनों में कन्या पूजन करने का तो विधान है, लेकिन आपको पता है कि यज्ञ, सत्यनारायण कथा के अलावा भी कन्या पूजन का महत्व है? यदि आप नहीं जानते हैं तो आए जानतें हैं इस धार्मिक अनुष्ठान के बारे में..
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By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Kanya Pujan: हिंदू धर्म को मानने वाले लोग नवरात्रि में अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन जरूर करते हैं. लेकिन नवरात्रि के अलावा कन्या पूजन कब-कब किया जा सकता है? इसकी शायद जानकारी नहीं होगी. क्योंकि कन्या पूजा का शास्त्र-पुराणों में विशेष महत्व बताया गया है. पुराणों के अनुसार कन्या को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है, कन्या की पूजा करने वालों पर न सिर्फ मां लक्ष्मी मेहरबान होती हैं बल्कि उनके समस्त दुख, रोग, शोक दूर होते हैं. साथ ही विशेष मनोकामना की पूर्ति होती है. आइए जानते हैं इसका महत्व क्या है?
नवरात्रि के अलावा कब करें कन्या पूजन
विशेष मांगलिक कार्य
घर में जब कोई मांगलिक कार्य किया जा रहा हो, जैसे- विवाह, गृह प्रवेश या फिर संतान के जन्म के बाद भी कन्या पूजन का विधान है. कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप माना गया है, जो घर में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं.
तीर्थ यात्रा के बाद
तीर्थ यात्रा के बाद जब व्यक्ति सकुशल अपने घर लौटकर आता है तब भी देवी-देवता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए घर में कन्या पूजन किए जाने का विधान है. खासकर वैष्णो देवी, नैना देवी या ज्वाला देवी जैसे सिद्ध शक्तिपीठों के दर्शन से लौटने के बाद ये परंपरा निभाई जाती है.
मासिक दुर्गा अष्टमी
देवी दुर्गा के कई भक्त ऐसे हैं जो हर महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी और नवमी को कन्या का पूजन करते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं. अगर किसी कारणवश घर न बुला सके तो उन्हें प्रसाद रूप में खीर बांटते हैं.
खास मनोकामना पूर्ति पर
जब किसी भक्त की कोई विशेष मनोकामना पूरी होती है, तो वे आभार स्वरूप कन्याओं को भोजन कराते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं.
कन्या पूजन क्यों किया जाता है
कन्या पूजन से अहंकार का दमन होता है. सेवा, करुणा और विनम्रता का भाव आता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. देवी पुराण के अनुसार जिस घर में कन्या पूजन होता है वहां मां लक्ष्मी वास करती हैं और परिवार में खुशहाली आती है.
कैसे करें कन्या पूजन
- कन्या की उम्र 2-10 साल तक होनी चाहिए, उन्हें घर पर भोजन का निमंत्रण दें.
- कन्याओं को स्वच्छ जगह बिठाकर सभी के पैरों को दूध से भरे थाल या थाली में रखकर अपने हाथों से उनके पैर धोना चाहिए और पैर छूकर आशीष लेना चाहिए.
- माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम लगाना चाहिए.
- कन्याओं को प्रेम भाव से भोजन कराएं.
- भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, उपहार देना चाहिए.
- कन्या को घर से विदा करते समय उनके पुनः पैर छूकर आशीष लेना चाहिए.
छोटे लड़के सेवक हनुमाान स्वरूप
नौ कुमारी कन्याओं एवं एक छोटे लड़के को आदर सहित अपने घर बुला कर, उनके चरणों को धो कर उचित आसान देकर विधि-विधान से पूरी भावना के साथ उनका पूजन करना चाहिए. क्योकि कन्या माँ का प्रत्यक्ष स्वरूप है और छोटा लड़का माता का प्यारा सेवक हनुमान स्वरूपा है. पूजन के बाद प्रेम के साथ इनको भोजन करा कर, माता से अपनी भूल-चूक के लिए प्रार्थना करनी चाहिए और पाँव छूकर आर्शीवाद लेना चाहिए. इसके बाद दान-दक्षिणा के साथ इनको विदा करना चाहिए. व्रत रखने वाले भक्त जन माता के पूजन के बाद भोजन करें और अपने सामान्य जीवनकार्य करें. आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी.
कन्या पूजन के बाद भुलकर भी ना करे ये 3 काम?
- कन्याओं के घर से चले जाने के बाद घर मे सफाई ना करे..यहां तक की झाड़ू भी ना लगाये ये कार्य़ कन्या पूजन से पहले करे.
- कन्या पूजन के बाद गन्दे कपड़े ना धोये.. ये काम भी एक दिन पहले कर ले.
- कन्या पूजन के बाद नहाना , सर धोना, नाखुन काटना आदि नही करने चाहिये.
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