होलाष्टक का समय शुभ नहीं माना गया है. होलाष्टक में कई कामों पर रोक लग जाती है. इस दौरान किए गए काम शुभ फलदायी नहीं होते. जानें होलाष्टक में क्या-क्या नहीं करें.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Holashtak 2025: सनातन धर्म कि तो होलाष्टक को बिलकुल भी शुभ नहीं माना गया है. वहीं, इस दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्यों को करने कि भी पूर्ण रूप से मनाही होती है. होलाष्टक होली से आठ दिन पहले लगते हैं और फाल्गुन पूर्णिमा यानी होलिका दहन पर इसका समापन होता है. होलाष्टक में कौन-कौन से कार्य वर्जित हैं. होलाष्टक कब से शुरू हो रहे हैं
क्यों डरावना काल है होलाष्टक ?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलाष्टक के 8 दिन बहुत डराने वाले माने जाते हैं, क्योंकि इस दौरान ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है, ऐसे में जीवन में कई तरह के बदलाव आते हैं. यही वजह है कि होलाष्टक में शुभ कार्य करने की मनाही होती है. क्योंकि इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. संघर्ष बढ़ जाता है, असफलता का सामना करना पड़ता है.
होलाष्टक में 9 ग्रह उग्र रहते हैं
होलाष्टक में अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र रहते हैं और नकारात्मकता की अधिकता रहती है. इसलिए व्यक्ति को इस दौरान फूंक-फूंककर किसी कार्य को करना चाहिए.
होलाष्टक में कौन-कौन से कार्य वर्जित ?
- विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन, नामकरण और उपनयन संस्कार इत्याधि जैसे 16 अनुष्ठानों पर रोक लग जाती है. पारिवारिक कलह, धन हानी और बीमारी इत्यादि का भय बढ़ जाता है.
- होलाष्टक की अवधि में नया मकान, चल-अचल सम्पत्ति जैसे गहने और गाड़ी की खरीदारी नहीं करनी चाहिए साथ ही इस दौरान मकान का निर्माण भी नहीं शुरू करना चाहिए.
- होलाष्टक के आठ दिन की अवधि में हवन और यज्ञ पर भी रोक लग जाती है.
- इस दौरान नौकरी बदलना भी सही नहीं माना गया है. न ही कोई नई नौकरी ज्वाइन करना चाहिए.
होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए ?
मान्यता है की होलाष्टक के दौरान भूलकर भी सगाई, नामकरण, विवाह, मुंडन आदि 16 संस्कार नहीं करने चाहिए क्योंकि इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कार्यों की मनाही होती है।
इन 8 दिनों की अवधि में नया वाहन, प्रॉपर्टी, मकान आदि खरीदने से भी बचना चाहिए। होलाष्टक के दौरान इस कार्यों को करना शुभ नहीं माना जाता है।
होलाष्टक के दौरान ग्रह उग्र रहते हैं। ऐसे में इस दौरान नया बिजनेस भी शुरू नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से ग्रहों की उग्रता का प्रभाव आपके काम पर पड़ सकता है।
अगर गृह निर्माण करवाने का विचार बना रहे हैं। तो होलिका दहन तक ऐसा बिल्कुल न करें। मान्यता है की होलाष्टक के दौरान नए मकान का निर्माण और गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए।
ज्योतिष मान्यता है की होलाष्टक के दौरान नौकरी बदलने से भी बचना चाहिए। कहीं नई जगह होलाष्टक से पहले या बाद में जाना चाहिए। लेकिन अगर नौकरी बदलना आवश्यक हो तो अपनी कुंडली किसी कुशल ज्योतिषी को दिखाकर सलाह लेनी चाहिए।
होलाष्टक के दौरान हवन और यज्ञ जैसे कार्य करना या करवाना भी वर्जित माना गया है। ऐसा करने से प्रतिकूल प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है।
होलाष्टक में क्या करना चाहिए?
इन 8 दिनों के दौरान जप, तप और ध्यान करना बेहद अच्छा माना जाता है। इससे जातक के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। ऐसे में होलाष्टक में भगवान की विधिपूर्वक पूजा और ध्यान करना चाहिए।
मान्यता है की इन दिनों भक्त प्रहलाद में विष्णुजी के लिए अटूट भक्ति थी। ऐसे में आप होलाष्टक के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ-साथ उनके मंत्र ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप कर सकते हैं।
होलाष्टक के दौरान शिवजी की आराधना करने का भी खास महत्व है। इससे भक्तों पर भोलेनाथ की कृपा बनी रह सकती है। आप ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप कर सकते हैं।
इन 8 दिनों में उग्र ग्रहों की शांति के लिए ज्योतिषी की सलाह लेकर उपाय कर सकते हैं। इससे जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मकता बढ़ने लगती है।
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