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Uttarakhand

केदारनाथ की दूरी कम करने खोदी जाएगी 7 किमी सुरंग

DB News
Last updated: 10/04/2026 11:33 PM
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11 किमी रास्ता घटेगा, अभी गौरीकुंड से 16 किमी पैदल मार्ग, मंदिर तक जाने के 2 रास्ते होंगे. यह टनल कालीमठ घाटी के आखिरी गांव चौमासी से लिंचोली तक होगी.

Source : DB News Update

Contents
11 किमी रास्ता घटेगा, अभी गौरीकुंड से 16 किमी पैदल मार्ग, मंदिर तक जाने के 2 रास्ते होंगे. यह टनल कालीमठ घाटी के आखिरी गांव चौमासी से लिंचोली तक होगी.सर्वेक्षण शुरू करा दिया गया हैऐसा प्लान तैयार किया जा रहाअभी ऐसा है रास्ताभविष्य का रूटकेंद्र ने केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोप-वे को मंजूरी दीलैंडस्लाइड और ट्रैफिक से बचाएंगी यह सुरंगकाली मठ से सोनप्रयाग तक सुरंगमंदिर पहुंचने के लिए अब 21 किमी का रूटनए रास्ते पर लैंडस्लाइड जोन नहीं

By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Kedarnath tunnel project: लाखों श्रद्धालुओं का आस्था का केन्द्र उत्तराखण्ड जाने वाले यात्रियों के लिए नया रास्ता बनाने का प्लान तैयार किया गया है. इसके लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय केदारनाथ तक 7 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की तैयारी कर रहा है. ऐसा हुआ तो आने वाले 4-5 साल में केदारनाथ मंदिर तक पहुंचने के दो रास्ते हो जाएंगे.

इनमें से एक रास्ता हर मौसम में मंदिर तक सीधी पहुंच देगा. अभी गौरीकुंड से रामबाड़ा-लिंचोली होते हुए केदार धाम तक का पैदल मार्ग 16 किलोमीटर लंबा है. टनल बनने के बाद यह 5 किमी ही बचेगा.

सर्वेक्षण शुरू करा दिया गया है

दरअसल, 2013 और जुलाई 2024 की त्रासदी से सबक लेते हुए केंद्र ने केदारनाथ मंदिर तक के नए सुरक्षित रास्ते को बनाने की योजना पर काम शुरू किया है. इसके लिए मंत्रालय ने कंसल्टेंट के जरिए पहाड़ का प्रारंभिक सर्वेक्षण करा लिया है.

ऐसा प्लान तैयार किया जा रहा

टनल उत्तराखंड में 6562 फीट ऊपर बनेगी. यह कालीमठ घाटी के आखिरी गांव चौमासी से लिंचोली तक होगी. लिंचोली केदारनाथ मंदिर से पांच किलोमीटर पहले है. चौमासी तक पक्की रोड है. यहां कार से जा सकते हैं. फिर टनल होगी और लिंचोली से मंदिर तक 5 किलोमीटर का पैदल सफर करना होगा.

अभी ऐसा है रास्ता

अभी ट्रैक 16 किलोमीटर का है. गौरीकुंड से रामबाड़ा 9 किलोमीटर, रामबाड़ा से लिंचोली 2 किलोमीटर और लिंचोली से केदार मंदिर 5 किलोमीटर दूर है.

भविष्य का रूट

रुद्रप्रयाग गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुंड से चुन्नी बैंड होते हुए कालीमठ, कोटमा और फिर चौमासी पहुंचते हैं. कुंड से चौमासी 41 किलोमीटर दूर है.
चौमासी से 7 किलोमीटर लंबी टनल लिंचोली पहुंचाएगी. फिर लिंचोली से 5 किलोमीटर दूर मंदिर.

केंद्र ने केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोप-वे को मंजूरी दी

वहीं दूसरी खबर आ रही है कि केंद्र सरकार ने केदारनाथ धाम और हेमकुंड साहिब के लिए रोप-वे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि अभी जो यात्रा 8-9 घंटे में पूरी होती है, वह घटकर 36 मिनट की हो जाएगी. इसमें 36 लोगों के बैठने की क्षमता होगी. राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड में सोनप्रयाग से केदारनाथ तक (12.9 किमी) और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जी तक (12.4 किमी) का रोपवे बनेगा. नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट इसे बनाएगा.

लैंडस्लाइड और ट्रैफिक से बचाएंगी यह सुरंग

जैसा कि सभी को पता है कि केदारनाथ धाम में यात्रियों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है. ऐसे में ट्रैफिक जाम की समस्या भी गंभीर हो गई है. इसके अलावा मानसून सीजन में केदारनाथ के पैदल रूट और सड़क मार्ग पर अक्सर भूस्खलन होता है. पत्थर-मलबा गिरने से रास्ते अवरुद्ध हो जाता है. यात्रियों को परेशानी के अलावा कई बार बड़ी दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए अब सुरंग बनाने का विचार किया जा रहा है.

काली मठ से सोनप्रयाग तक सुरंग

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, काली मठ से सीधे सोनप्रयाग तक 7 किलोमीटर लंबी टनल बनाने का विचार किया जा रहा है. इसके लिए एलाइनमेंट भी तैयार कर लिया गया है. वहीं, सीतापुर से गौरीकुंड तक सुरंग, सड़क और पुल बनाने के लिए तीन से चार एलाइनमेंट हो चुके हैं. जानकारी के मुताबिक, इन कार्यों के लिए प्री-फिजिबिलिटी सर्वे हो चुका है. पूरा डाटा भी तैयार कर लिया गया है. एक-डेढ़ हफ्ते में प्रस्ताव तैयार करके भारत सरकार को देना है. हरी झंडी मिलने के बाद इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम शुरू किया जा सकेगा.

मंदिर पहुंचने के लिए अब 21 किमी का रूट

अब केदारनाथ तक पहुंचने का नया रास्ता 21 किलोमीटर लंबा है, जो गौरीकुंड, जंगल चट्टी, भीम बाली, रामबाड़ा, छोटी लिनचोली, बड़ी लिनचोली, रुद्रा पॉइंट होकर केदारनाथ मंदिर तक जाता है. इस पैदल रूट पर कई जगहें ऐसी हैं, जहां अक्सर लैंडस्लाइड होता रहता है. इनमें गौरीकुंड से भीम बाली तक का रास्ता ज्यादा खराब है. दूसरी तरफ सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच में भी लैंडस्लाइड ज़ोन है

2013 की आपदा से पहले गौरीकुंड से केदारनाथ का पैदल मार्ग 14 किलोमीटर का हुआ करता था. इसमें गौरीकुंड से जंगल चट्टी, जंगल चट्टी से भीम बाली, भीम बाली से रामबाड़ा, रामबाड़ा से गरुड़ चट्टी होते हुए केदारनाथ तक पैदल चढ़ाई करनी होती थी. लेकिन 2013 की आपदा के बाद रामबाड़ा और गरुड़ चट्टी का रास्ता आपदा की भेंट चढ़ गया.

कालीमठ से सोनप्रयाग तक सुरंग बनने के बाद अन्य रास्तों के लिए भी इसी तरह की परियोजनाएं बनाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं. इन सुरंगों और रास्तों को बनाने का मकसद लैंडस्लाइड जोन में जान-माल की हिफाजत करना और ट्रैफिक जाम से बचाना है.

दरअसल, 2013 और जुलाई 2024 की त्रासदी से सबक लेते हुए केंद्र ने केदारनाथ मंदिर तक के नए सुरक्षित रास्ते को बनाने की योजना पर काम शुरू किया है. इसके लिए मंत्रालय ने कंसल्टेंट के जरिए पहाड़ का प्रारंभिक सर्वेक्षण करा लिया है.

नए रास्ते पर लैंडस्लाइड जोन नहीं

पिछले साल सितंबर में पांच सदस्यीय टीम ने चौमासी-खाम बुग्याल-केदारनाथ रूट का जमीनी सर्वेक्षण किया था. तब टीम ने कहा था कि इस पूरे मार्ग पर कहीं भी भूस्खलन जोन नहीं हैं. कठोर चट्टानें हैं और बुग्यालों के ऊपर व नीचे से रास्ता बनाया जा सकता है. कई जगहों पर भूमिगत पानी रिस रहा है, जिसके उपाय कर सकते हैं.

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