नर्मदा के उत्तरतट जाबालिपुरम् में गीताधाम के नाम से प्रसिद्ध है आश्रम, गरीब, असहाय पीड़ित-दरिद्रनारायण की सेवा के साथ साधु-संतों का नि:शुल्क भोजन एवं आवास की होती है व्यवस्था
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
MP Jabalpur Geetadham News : एमपी के जबलपुर में नर्मदा तट ग्वारीघाट के निकट भगवान योगेश्वर जी के मंदिर की स्थापना की गई है. जहां भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण श्रीमद् भगवत गीता का उपदेश देते हुए दिखाई पड़ रहे हैं. इस मंदिर के चारो ओर संगमरमर पत्थरों पर श्रीमद् भगवत गीता के पूरे 18 अध्याय उत्कीर्ण हैं, जो श्रद्धालुओं को गीता के उन श्लोकों को पढ़ने के लिए विवश कर देते हैं. इस मंदिर की स्थापना का सन् 1990 में किए जाने का उल्लेख मिलता है. जिसकी स्थापना साकेतवासी जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज हैं. वर्तमान में इस मंदिर का संचालन जगद्गुरु डॉ. स्वामी नरसिंहदेवाचार्य जी महाराज कर रहे हैं.
स्थापना काल से ही नर्मदा कुंभ की हो गई थी शुरुआत
गीताधाम मंदिर के उद्घाटन में देश भर के साधु-संतों और श्रद्धालुओं का आगमन बड़ी संख्या में हुआ. उन्हीं श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए उद्घाटन कार्यक्रम में आए जगद्गुरु, महामण्डलेश्वर, श्रीमहंत और अनेक साधु-संतों ने इसी उद्घाटन कार्यक्रम को नर्मदा कुंभ का नाम दे दिया. जिसके बाद से हर 6वें वर्ष नर्मदा कुंभ-अर्धकुंभ का आयोजन होने लगा. इस प्रकार का आयोजन प्रत्येक 5 वर्ष बाद 6वें वर्ष नर्मदा कुंभ के नाम से भव्य आयोजन हो रहे हैं. विगत 2020 में आयोजित हुआ नर्मदा कुंभ का आयोजन देश भर में चर्चित हो गया. शहर का यह आयोजन प्रदेश का सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में अपनी पहचान बनाई.

मंदिर में विराजमान हैं भव्य श्रीकृष्ण की मूर्ति
गीताधाम मंदिर में विराजमान भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण की श्रीमद् भगवत गीता का उपदेश देते हुए मूर्ति आकर्षण का केन्द्र हैं. मंदिर में इसके अलावा मां दुर्गा, हनुमान जी और भगवान पारदेश्वर महादेव की भव्य प्रतिमाएं आकर्षण का केन्द्र हैं. जिनका पूजन-अर्चन प्रतिदिन किया जा रहा है. मंदिर के संस्थापक-संचालक साकेतवासी जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज थे. उनके बाद अब इस मंदिर का संचालन व संवर्धन श्रीरामरंगी द्वाराचार्य जगद्गुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज के द्वारा किया जा रहा है.

गीताधाम की गतिविधियां
- -मंदिर में विराजमान भगवान योगेश्वर, पारदेश्वर, मां दुर्गा, हनुमान जी महाराज, मां नर्मदा, सिद्धबाबा जी और अन्य विराजमान देवी-देवताओं का सुबह-शाम 7 बजे आरती, पूजा-पाठ और दोपहर भोग प्रसाद।
- -पर्व और विशेष दिनों में सुबह 9 बजे से भगवान पारदेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक.
- -प्रतिदिन 12 बजे दोपहर दरिद्र नारायण सेवा.
- -परिक्रमावासियों के लिए आवास-भोजन की व्यवस्था.
- -गरीब-निराश्रित बच्चों के लिए आवास, भोजन और शिक्षा-दीक्षा की नि:शुल्क व्यवस्था.
- -असहाय-गरीबों के लिए गुरुनानक देव चेरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से नि:शुल्क दवाई का वितरण.
- -मूक-निरीह पशुओं के लिए गौशाला का संचालन.
- -श्री रामनवमी- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गुरुपूर्णिमा जैसे पर्वों में बड़े धूम-धाम से उत्सव मनाया जाता है.
- -देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर जगद्गुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी के सानिध्य में भ्रमण और धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन.
- -गुरुपूर्णिमा के पावन पर्व पर वृहद श्रीमद्भागवत कथा और भण्डारे का आयोजन.

गरीबों के लिए समर्पित है गुरुनानक अस्पताल
नर्मदा तट गीताधाम ग्वारीघाट में श्री गुरुनानक देव चेरिटेबल ट्रस्ट के नाम से अस्पताल का संचालन किया जा रहा है. जिसके माध्यम से गरीब-असहाय, निराश्रित वृद्धों की नि:शुल्क जांच व दवाई दी जा रही है. इय अस्पताल में प्रतिदिन 200 से 300 मरीजों का पंजीयन और उपचार हो रहा है. अस्पताल में 4 डॉक्टरों की टीम है और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, जिनके द्वारा नासूर बन रहे घाव और अनेक प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जा रहा है. प्राथमिक उपचार करने के बाद गंभीर रूप से पीडि़त गरीब मरीज को उचित सलाह भी दी जा रही है. यथा संभव नि:शुल्क दवाई का वितरण किया जा रहा है. मरीजों को वितरित की जा रही दवाई और डॉक्टरों के मानदेय का खर्च श्रीगुरुनानक देव चेरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टियों के सहयोग से किया जा रहा है. इस ट्रस्ट का संचालन महामण्डलेश्वर श्रीनृसिंह पीठाधीश्वर जगद्गुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज के संरक्षण और सानिध्य में संचालित है. अस्पताल को संचालित करने के पीछे गरीबों के प्रति आदर-सम्मान और सेवा का भाव रखने वाले एनआरआई ठाकुर हरकेश सिंह ठाकुर का विशेष योगदान है. उनके सहयोग से ही इस अस्पताल का संचालन संभव हो पा रहा है.इसके अलावा उन्हीं के परिवारिक सदस्यों और रिश्तेदारों का इस अस्पताल के संचालन में समर्पण का भाव है. विशेष रूप से कमलजीत परमार, हैप्पी परमार सहित अन्य दानदाताओं का, जिनके माध्यम से अस्पताल के संचालन की निरंतरता बनी हुई है.

मरीजों की पीड़ा के आगे समय कम
अस्पताल में मरीजों की संख्या जिस प्रकार से देखी जा रही है. उसके हिसाब से समय कम पडऩे लगता है. डॉक्टरों को जांच के लिए निर्धारित समय 3 से 6 बजे तक है. लेकिन इस दौरान मरीजों की संख्या सैकड़े को पार कर जाती है. इसके बीच में दवाई का वितरण भी होता है. इस कारण जांच के बाद दवाई वितरण में समय ज्यादा लग जाता है. इस कारण समय कम पड़ता दिखाई देता है. लेकिन मरीजों की पीड़ा का विशेष ध्यान रखा जाता है. उन्हें राहत देने की पूरी कोशिश की जाती है और उन्हें दवाई से वंचित नहीं रखा जाता है. इस प्रकार का प्रयास सदा बना रहे इसके लिए सभी का सहयोग आपेक्षित है.
मंदिर के संस्थापक जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य का संक्षिप्त जीवन परिचय

नाम- श्याम सुंदर चतुर्वेदी
जन्म तिथि- 8 फरवरी 1953
गुरु-साकेतवासी स्वामी रामचन्द्रदास शास्त्री जी महाराज
विरक्त दीक्षा के बाद नाम- श्यामदास जी महाराज
श्री नृसिंह मंदिर की महंताई-18 जून 2004 ई. को शुभ मुहूर्त में श्री नृसिंह मन्दिर के चतुर्थ महन्त के रूप में जबलपुर जिला साधु मण्डल के तत्वाधान में डॉ. स्वामी श्यामदास जी महाराज का कष्ठो-तिलक और चादर विधि-विधान पूर्वक महन्ताई करके गुरूगादी सौंपी गई.
शिक्षा- पीएचडी, रानी दुर्गावती विश्व विद्यालय, जबलपुर
महामण्डलेश्वर के पद पर पट्टाभिषेक- इलाहाबाद कुंभ मेला के अवसर पर वैष्णव साधु मंडल और अखाड़ा परिषद द्वारा महामण्डलेश्वर के पद पर पट्टाभिषेक किया गया।
जगद्गुरु के पद पर पट्टाभिषेक- 17 जून 2016 को उज्जैन सिंहस्थ कुंभ मेला के अवसर श्रीदिगंबर अनी अखाड़े द्वारा श्रीराम रंगी द्वाराचार्य जगद्गुरु के पद पर पट्टाभिषेक किया गया.
विदेशी यात्राएं- अमेरिका, न्यूयार्क, इग्लैण्ड, नेपाल सहित देश के सभी प्रांतों में धर्म का प्रचार-प्रसार.
तपोनिष्ठ साकेतवासी स्वामी रामचन्द्रदास शास्त्री जी की पुण्य तिथि
संत अपनी साधना-तपस्या से प्राप्त ज्ञान को समाज के हित में उपयोग करता है. साकेतवासी स्वामी रामचन्द्रदास शास्त्री जी महाराज ने संस्कारधानी को धर्मधानी बनाने के लिए जीवन पर्यन्त प्रयत्नशील रहे. उनके सानिध्य में जिन मंदिरो व संस्थाओं का भूमिपूजन होता था, उनका दिनों-दिन विकास होता चला गया और समाज के हर वर्ग को अपने उदात्त सहयोग एवं आशिर्वाद प्रदान किया. उक्त आशय के उद्गार महामण्डलेश्वर श्रीनृसिंहपीठाधीश्वर डॉ. स्वामी श्यामदास जी महाराज नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में स्वामी रामचन्द्रदास जी के पुण्य तिथि के अवसर पर व्यक्त किए. साकेतवासी स्वामी जी की पुण्यतिथि के साथ 22 फरवरी को जन्मोत्सव भी मनाया जाता है. जिसमें गरीब असहाय नेत्र रोगियों का नि:शुल्क मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाता है.

