सिंहस्थ: 2028 को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि साधु संतों, किसानो के हितों का विशेष रूप से ध्यान रखा जाएगा.
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Simhastha Ujjain MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने सिंहस्थ लैंड पूलिंग को निरस्त करने का निर्णय लिया है. इसके लिए नगरीय प्रशासन विकास विभाग और जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री द्वारा आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं. मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने सोमवार (17 नवंबर) को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर किसान संघ, भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी, उज्जैन के जनप्रतिनिधिगण और जिला प्रशासन उज्जैन के साथ बैठक आयोजित हुई, जिसमें सिंहस्थ 2028 के आयोजन को लेकर विस्तृत रूप से चर्चा की गई.
बैठक में सिंहस्थ के आयोजन को भव्य व दिव्य और विश्वस्तरीय बनाने पर आम सहमति बनी, जिसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा हर संभव प्रयास करने का आश्वासन दिया गया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि साधु संतों, किसानो के हितों का व्यापक रूप से ध्यान रखा जायेगा. चर्चा के बाद सिंहस्थ लैंड पूलिंग को निरस्त करने का निर्णय लिया गया.
बैठक में इनकी रही उपस्थिति
इस बैठक में बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, किसान संघ की और से महेश चौधरी, कमल सिंह आंजना, अतुल माहेश्वरी, लक्ष्मी नारायण पटेल, भरत बैस, रमेश दाँगी बीजेपी संगठन की और से बीजेपी नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, जिला महामंत्री कमलेश बैरवा, महामन्त्री जगदीश पांचाल और आनंद खींची उपस्थित रहे. किसान संघ द्वारा मुख्यमंत्री के निर्णय का स्वागत करते हुये आभार व्यक्त किया गया.
2000 करोड़ की योजना का पूरा खाका
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 के लिए मेला क्षेत्र के विकास की बड़ी योजना बनाई थी. उद्देश्य था कि हर 12 साल में करोड़ों रुपये अस्थायी निर्माण पर खर्च न हों. इसके बजाय स्थायी सड़कें, बिजली ढांचा और अन्य निर्माण किए जाएं. उज्जैन विकास प्राधिकरण ने इसके लिए 1806 किसानों की लगभग 5000 सर्वे वाली जमीन को लैंड पुलिंग के जरिए विकसित करने की योजना बनाई थी. पहली बार सिंहस्थ क्षेत्र में 60 से 200 फीट तक की इंटर-कनेक्टेड सड़कें बननी थीं, जिससे भीड़ बढ़ने पर उसे आसानी से शिफ्ट किया जा सके. इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 2000 करोड़ रुपये थी.
2028 के सिंहस्थ को लेकर सरकार ने लिया था निर्णय
2028 में होने वाले सिंहस्थ में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए सरकार ने सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी अधोसंरचना निर्माण के लिए सिंहस्थ क्षेत्र के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से चार नगर विकास योजना आठ, नौ, दस और 11 तैयार की थी.
इसमें किसानों की भूमि लैंड पूलिंग के प्रविधान के अनुसार ली जाती. एक हिस्सा विकसित कर किसान को दिया जाता और शेष का मुआवजा मिलता. इसके बाद भूमि पर उसका कोई अधिकार नहीं रह जाता. किसान इसके विरोध में थे. भारतीय किसान संघ मध्य प्रदेश ने इसे लेकर आंदोलन किया।
कांग्रेस ने भी सुर में सुर मिलाए। सरकार ने योजना में संशोधन करके केवल अधोसंरचना विकास के कामों के लिए भूमि लेने का प्रविधान 19 दिसंबर 2025 को संशोधित आदेश के माध्यम से कर दिया लेकिन इस पर भी बात नहीं बनी तो सरकार ने योजना को पूरी तरह से निरस्त करने का निर्णय ले लिया.
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा था मामला
किसान संघ और स्थानीय संगठन सिंहस्थ के नाम पर लैंड पूलिंग के माध्यम से किसानों की जमीन लेने का विरोध कर रहे थे. बात भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची.
मुख्यमंत्री मोहन यादव अधिकारियों के साथ पहुंचे और बैठकों के कई दौर चला. सरकार की ओर से सिहंस्थ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का हवाला देकर व्यवस्था बनाने की बात रखी गई तो अन्य कुंभ का उदाहरण देकर लैंड पूलिंग के बिना व्यवस्था बनाए जाने की बात उठी.
उधर, किसान पूरी तरह से लैंड पूलिंग एक्ट को निरस्त करने पर अड़े थे. सरकार ने पहले प्रयास किया था कि किसानों की सहमति से लैंड पूलिंग की जाए, लेकिन भारतीय किसान संघ का कहना था कि किसानों की भूमि स्थायी निर्माण के लिए लेने से उनकी आजीविका का साधन समाप्त हो जाएगा.
उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में 2,800 हेक्टेयर भूमि है
उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में लगभग 2,800 हेक्टेयर भूमि है. इसमें साढ़े आठ सौ हेक्टेयर शासकीय और शेष निजी भूमि है.
सरकार बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए यहां जन सुविधा की दृष्टि से स्थायी निर्माण करना चाहती थी. जिसके तहत किसानों की भूमि लैंड पूलिंग के तहत लेना प्रस्तावित था.
इसमें जिसकी भूमि ली जाती, उसे एक निश्चित क्षेत्र में स्थायी निर्माण करके सरकार देती और बाजार मूल्य से शेष भूमि का भुगतान भी किया जाता.

