मासूमों की जान से हो रहा खिलवाड़, प्रशासन की अनदेखी से खतरे में स्कूली बच्चों की सुरक्षा
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
School Vehicle In Jabalpur: एमपी के जबलपुर शहर में प्रतिदिन 2000 से ज्यादा ओवरलोड स्कूल वैन व ऑटो दौड़ रहे हैं. नियमानुसार ऑटो में 5 और वैन में अधिकतम 9 बच्चे ही बैठा सकते हैं, लेकिन ऑटो में 8 से 10 तो वैन में 10-15 बच्चों को बैठाया जा रहा है. ऑटो व वैन चालकों द्वारा बच्चों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है, लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है. हद तो यह है कि इन ऑटो व वैन की जानकारी न स्कूलों के पास है और न ही आरटीओ, जिला प्रशासन और यातायात पुलिस के पास है. ऑटो और वैन चालकों के लिए सरकार ने भी कोई गाइडलाइन नहीं बनाई है इसलिए वे भी जमकर मनमर्जी कर रहे हैं, उन्हें बच्चों की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं है, बस अपनी कमाई से मतलब है.
स्कूली बसों के लिए गाइडलाइन, ऑटो, वैन के लिए नहीं
केंद्र सरकार ने स्कूली बसों के लिए तो गाइडलाइन बना दी है, लेकिन ऑटो और वैन के लिए कोई नियम नहीं बनाए हैं. यही वजह है कि प्रशासनिक अधिकारी इनकी जांच करने से बचते हैं. जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार ने स्कूली बसों के लिए जो गाइडलाइन बनाई है, उसी के अनुसार ऑटो और वैन की जांच भी होना चाहिए. उनसे भी उन सभी नियमों का पालन कराना चाहिए, जो बसों के लिए बने हैं.
वाहनों की नहीं होती जांच
स्कूली बच्चों को लेकर दौड़ रहीं स्कूल वैन और ऑटो की जांच का जिम्मा जिला प्रशासन, आरटीओ और यातायात पुलिस का है, लेकिन तीनों ही विभाग इनकी जांच नहीं कर रहे हैं. यही वजह है कि स्कूली बच्चों को ढोने वाली स्कूल वैन और ऑटो ने सारे नियमों को ताक पर रख दिया है. वे लगेज की तरह बच्चों को भी ठूंस-ठूंसकर भरते हैं और शहर की सड़कों पर फर्राटा मार रहे हैं.
सीएनजी किट के ऊपर भी बैठ रहे बच्चे
स्कूली बच्चों को बैठाकर दौड़ने वाले ऑटो की स्थिति यह है कि उनमें ड्राइवर सीट के बाजू से गेट के पास तक बच्चे बैठे रहते हैं. ऑटो में पटिया लगाकर बच्चों को बैठाने के अलावा पीछे भी सीट लगाकर बैठाया जाता है. वहीं वैन में सीएनजी किट के ऊपर बच्चों को बैठाया जा रहा है. इससे किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है.
50 फीसदी बच्चे ऑटो और वैन पर निर्भर
शहर में 50 फीसदी निजी स्कूलों के पास ही बसों की सुविधा है, लेकिन उनके रूट तय हैं. वे उन्हीं रूटों पर चलती हैं. सरकारी स्कूलों में यह सुविधा ही नहीं है, इसलिए 50 फीसदी स्कूलों के बच्चे ऑटो व वैन पर निर्भर हैं. स्कूल से ये वाहन मौखिक आधार पर ही अनुबंधित होते हैं, बावजूद इसके स्कूल प्रबंधन इनके दस्तावेजों से लेकर अन्य जांच नहीं कर रहे हैं.
यह होना चाहिए
- स्कूल वैन और ऑटो के लिए भी गाइडलाइन होनी चाहिए.
- स्कूल बस की तरह इनका भी रंग पीला हो.
- आगे-पीछे स्कूल वाहन लिखा हो.
- आग बुझाने के लिए यंत्र लगे हों.
- ऑनलाइन शिकायत पोर्टल हो, जिस पर अिभभावक बिना नाम बताए ओवरलोडिंग की रिपोर्ट कर सकें.
- स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा हो.
- ऑटो में अधिकतम 5, वैन में अधिकतम 9 बच्चों को ही बैठाया जा सकता है.
- स्कूल बसों में सीटों की संख्या के अनुसार ही बच्चों को बैठना अनिवार्य है.

