मध्य प्रदेश जबलपुर में अमृत योजना 2.0 के तहत कराया जा रहा काम, 312 करोड़ की योजना ले रही मूर्तरूप, मेन राइजिंग लाइन डाली जा रही है.
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Amrut-2.0 Drinking Water Project News: मध्य प्रदेश जबलपुर रांझी-भोंगाद्वार और कैंट क्षेत्र की प्यास बुझाने के लिए जितनी फुर्ती के साथ पानी की पाइप लाइन डाली जा रही है, उस तेज गति से नर्मदा तट ललपुर में बन रहे इंटकवेल और जल शोधन संयंत्र का काम नहीं हो रहा है. ये दोनों कार्य इतनी मंथरगति से कराए जा रहे हैं कि बारिश शुरू होते ही अधूरा इंटकवेल डूब जाएगा और बारिश के बाद नर्मदा का जल स्तर नीचे जाने के बाद ही दोबारा काम शुरू हो पाएगा. यहां बता दें कि अमृत योजना-2.0 के अंतर्गत पानी की राइजिंग मेन पाइप लाइन, जल शोधन संयंत्र और इंटकवेल का निर्माण किया जा रहा है. ललपुर से रांझी तक 475 किलोमीटर राइजिंग मेन पानी की पाइप लाइन डालने का काम चल रहा है, लेकिन जलशोधन और इंटकवेल के निर्माण में तेजी देखने को नहीं मिल रही है. करीब 150 फीट गहराई पर बन रहे इंटकवेल का निर्माण गर्मियों के बचे तीन माह में तो कतई नहीं हो सकता है. लिहाजा ललपुर में निर्माणाधीन इंटकवेल नर्मदा नदी का जल स्तर बढ़ते ही बरिश के दिनों में डूब जाएगा. इतना ही नहीं बारिश के चार महीने इंटकवेल का काम भी बंद रहने के संकेत मिल रहे हैं. हालांकि इस योजना के अंतर्गत डाली जा रही पानी की राइजिंग मेन लाइन के काम में तेजी जरूर देखने को मिल रही है. लेकिन डिस्ट्रिब्यूशन लाइन, जल शोधन संयंत्र और इंटकवेल का निर्माण मंथरगति से कराया जा रहा है.
उपनगरीय क्षेत्र में पानी की समस्या से निजात दिलाने की मंशा
नगर निगम के अिधकारी अमृत योजना के अंतर्गत उपनगरीय क्षेत्र रांझी की प्यास बुझाने के उद्देश्य से काम करा रहे हैं. यहां के रहवासियों को जल्द से जल्द पानी मिल सके, इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन नर्मदा के किनारे बन रहे इंटकवेल का जब तक निर्माण नहीं हो जाता है, तब तक रांझी और कैंटोनमेंट बोर्ड के रहवासियों को समय रहते पानी मिल पाएगा, यह कह पाना मुश्किल है.
54 एमएलडी का बन रहा इंटकवेल
ललपुर पंप हाउस के करीब नर्मदा तट पर निर्माणाधीन इंटकवेल 54 एमएलडी क्षमता का बनाया जा रहा है. इस इंटकवेल से इसी क्षमता के साथ नर्मदा जल को भोंगाद्वार और रांझी जल शोधन संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा. नवनिर्मित इंटकवेल के करीब पहले से एक इंटकवेल बना है। जिससे 97 एमएलडी पानी लिया जा रहा है. इन दोनों इंटकवेल से 151 एमएलडी पानी लिया जाएगा, जिससे शहर का पुराना हिस्सा, रांझी, कैंट बोर्ड क्षेत्र की प्यास बुझाई जाएगी.
475 किमी राइजिंग मेन लाइन बिछाने का काम जारी
रांझी में 54 एमएलडी क्षमता के जल शोधन संयंत्र का निर्माण होना है। इसके लिए ललपुर से रांझी तक 475 किलोमीटर राइजिंग मेन लाइन बिछाई जानी है. ललपुर की ओर से आ रही राइजिंग मेन लाइन का काम कटंगा तक लगभग पूरा हो गया है. इसके अलावा घमापुर से रांझी क्षेत्र में राइजिंग मेन लाइन का काम कराया जा रहा है.
पानी की 18 टंकियों का होगा निर्माण
अमृत-2.0 के अंतर्गत पानी की 18 टंकियों का निर्माण होना है. ये पानी की टंकियां रांझी, मानेगांव, मोहनिया, खमरिया, जीसीएफ, कांचघर, सिद्धबाबा क्षेत्र में बनाई जाएंगी, जिससे इन क्षेत्रों की जनता को नर्मदा जल मिलेगा. अभी इस क्षेत्र की जनता को परियट जलाशय से जलापूर्ति की जा रही है.
इंटकवेल में समाहित हो रहा नर्मदा जल
ललपुर में बन रहे इंटकवेल को गति देने के लिए ठेका कंपनी के द्वारा बोरी में रेत-मिट्टी भरकर चारों तरफ बांध बनाकर नर्मदा जल को रोकने का प्रयास किया जा रहा है. लेकिन नर्मदा जल लगातार इंटकवेल की ओर जगह बनाकर बह रहा है, जिसे निकालने के लिए कई मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन इंटकवेल की ओर आ रहे पानी की रफ्तार में कोई कमी देखने को नहीं मिल रही है, जिसके कारण इंटकवेल का काम प्रभावित हो रहा है. यदि इसी गति से इंटकवेल का काम जारी रहा तो अगली बारिश से पहले भी इंटकवेल का काम पूरा नहीं हो पाएगा.
फैक्ट फाइल
- > प्रोजेक्ट-अमृत – 2.0 योजना
- > लागत- 312 करोड़ रुपए
- > जलापूर्ति क्षमता- ललपुर से 151 एमएलडी पानी की आपूर्ति
- > टंकियां- 18 उच्चस्तरीय टंकियों का निर्माण
- > राइजिंग मेन – 475 किलोमीटर पानी पाइप लाइन बिछाई जाएगी

