वन विहार नेशनल पार्क में 28 दिसंबर 2013 को रिद्धी को 4 वर्ष की उम्र में इंदौर के चिड़िया घर से लाया गया था. वन विहार के अधिकारियों ने बताया मौत का कारण वृद्धा अवस्था है.
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By : DB News Update | Edited by : Prince Awasthi
White Tigres: मध्य प्रदेश भोपाल से एक बुरी खबर आई है. दरअसल वन विहार के डिस्प्ले वार्ड में रहने वाली सफेद बाघिन रिद्धी का अब दीदार नहीं हो पाएंगे. क्योंकि रिद्धी की 15 साल के उम्र में निधन हो गया है. दो दिनों से उसने खाना-पीना छोड़ दिया था. वन विहार के अधिकारियों ने बताया मौत का कारण वृद्धा अवस्था है. उसके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था. डॉक्टर्स उसका इलाज कर रहे थे, लेकिन उसे नहीं बचाया जा सका. वन विहार नेशनल पार्क में 28 दिसंबर 2013 को रिद्धी को 4 वर्ष की उम्र में इंदौर के चिड़िया घर से लाया गया था. वह इंदौर जू से आदान-प्रदान योजना के तहत वन विहार में लाई गई थी. उसके बाद से रिद्धी का पर्यटकों से विशेष लगाव हो गया था. यहां आने वाले टूरिस्ट बिना रिद्धी का दीदार किये वन विहार से नहीं लौटते थे.
डेस्प्ले वार्ड में रहती थी बाघिन
सफेद बाघिन को वन विहार के डिस्प्ले वार्ड में रखा गया था। वह पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती थी. वन विहार नेशनल पार्क के अधिकारियों के अनुसार बाघिन की गुरुवार सुबह अपने हाउस में पड़ी मिली. उसकी मौत 18-19 सितंबर की रात में मौत हुई. वन विहार प्रबंधन के अनुसार, पिछले 2 दिन से रिद्धी ने अपना नियमित भोजन नहीं लिया था.
अब जू में बचे हैं 15 बाघ
एसके सिन्हा के अनुसार जू में रहने वाले बाघों की उम्र 15-16 साल तक होती है। हालांकि, सफेद बाघ ज्यादा स्वस्थ्य नहीं होते हैं. जीन में परिवर्तन की वजह से यह सफेद होते हैं. उनके अनुसार अब वन विहार में 15 बाघ बचे हैं.
डेस्प्ले वार्ड में रहती थी बाघिन
सफेद बाघिन को वन विहार के डिस्प्ले वार्ड में रखा गया था. वह पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती थी. वन विहार नेशनल पार्क के अधिकारियों के अनुसार बाघिन की गुरुवार सुबह अपने हाउस में पड़ी मिली. वन्यप्राणी चिकित्सक ने जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया गया. उनके अनुसार इससे पहले बुधवार को वह अपने हाउसिंग में सामान्य हालत में ही थी. उसकी मौत 18-19 सितंबर की रात में मौत हुई. वन विहार प्रबंधन के अनुसार, पिछले 2 दिन से रिद्धी ने अपना नियमित भोजन नहीं लिया था.
अब जू में बचे हैं 15 बाघ
बताया जा रहा है कि जू में रहने वाले बाघों की उम्र 15-16 साल तक होती है. हालांकि, सफेद बाघ ज्यादा स्वस्थ्य नहीं होते हैं. जीन में परिवर्तन की वजह से यह सफेद होते हैं. उनके अनुसार अब वन विहार में 15 बाघ बचे हैं.
अंतिम संस्कार किया गया
मृत वृद्ध सफेद बाघिन का पोस्टमार्टम करने बाद बताया गया कि प्राथमिक तौर पर मौत का कारण वृद्धावस्था की वजह से आंतरिक अंग काम नहीं कर रहे थे. मृत सफेद बाघिन का सैंपल एकत्रित कर जांच के लिये स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक हेल्थ जबलपुर भेजे गये हैं. पोस्टमार्टम के बाद मृत बाघिन का नियमानुसार वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में वन संरक्षक भोपाल वृत्त भोपाल, संचालक वन विहार एवं अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में अंतिम संस्कार किया गया.
इंसानों को देखकर बाड़े के पास आ जाती थी बाघिन
सफेद बाघिन रिद्धि पिछले करीबन 11 सालों से वन विहार में थी. उसे पर्यटकों के लिए डिस्प्ले बाड़े में रखा गया था. वन विहार आने वाले पर्यटकों को रिद्धि के दीदार के मामले में कभी निराशा नहीं होती थी. बाघिन इंसानों को देखकर कई बार बाड़े के पास आ जाती थी. रिद्धि को दिसंबर 2013 में इंदौर जू से वन विहार लाया गया था. उस वक्त उसकी उम्र साढ़े 4 साल थी.
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