एकनाथ शिंदे संग अमित शाह और जेपी नड्डा की मीटिंग जारी, कुछ देर में पहुंचेंगे देवेंद्र फडणवीस-अजित पवार
BY : DB News Update
Edited By : प्रिंस अवस्थी
Who Will Maharashtra CM: महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री के बारे में आम सहमति नहीं बन पाने के कारण, महायुति गठबंधन के सहयोगी आज गुरुवार (28 नवंबर) को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ होने वाली बैठक से पहले नए मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण विभागों के लिए कोशिश कर रहे हैं.
महाराष्ट्र सीएम को लेकर दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर बड़ी बैठक चल रही है. इसमें महायुति के तीनों नेता- देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार शामिल हैं. इनके अलावा मीटिंग में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा में मौजूद हैं, बताया जा रहा है कि अब से कुछ देर बाद अमित शाह के घर महायुति नेताओं की बैठक के बाद सीएम का नाम तय हो जाएगा और इसकी घोषणा भी जल्द कर दी जाएगी.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को लेकर अब भी सस्पेंस बरकरार है. हालांकि मुख्यमंत्री पद किसे मिलेगा, इसकी तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ होती दिख रही है. एकनाथ शिंदे के बुधवार के बयान से ये लगभग तय है कि सीएम बीजेपी का ही होगा. अब बस नाम पर मुहर लगनी बाकी है. इसको लेकर आज रात दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर बड़ी बैठक होनी है.
शिंदे की “महत्वाकांक्षा” को राजनीतिक संदर्भ में
सबसे पहले, शिंदे का लक्ष्य अपने गुट और खुद की सरकार में मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाए रखना है. इसका मतलब है कि वे ऐसे मंत्रालय और विभाग चाहते हैं जो प्रशासनिक रूप से प्रभावशाली हों—जैसे शहरी विकास, लोक निर्माण, गृह या अन्य बड़े बजट वाले विभाग.
दूसरा, उनकी कोशिश यह भी रहती है कि महायुति (या गठबंधन) सरकार में उनका गुट कमज़ोर न पड़े और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका बनी रहे. इसलिए मंत्रिमंडल में “अहम विभाग” पाने की कोशिश को सत्ता-संतुलन से जोड़कर देखा जाता है.
तीसरा, व्यापक राजनीतिक दृष्टि से यह भी माना जाता है कि शिंदे अपनी स्थिति को महाराष्ट्र की राजनीति में दीर्घकालिक नेतृत्व और प्रभाव के रूप में स्थापित करना चाहते हैं. यानी सिर्फ उपमुख्यमंत्री की भूमिका तक सीमित न रहकर अपने राजनीतिक वजन को बढ़ाना.
शिंदे के गुट में बढ़ सकती है नाराजगी
अगर शिंदे गुट को अपेक्षित महत्वपूर्ण मंत्रालय या प्रभावशाली विभाग नहीं मिलते, तो कुछ संभावित कारणों से असंतोष बढ़ सकता है. विधायकों की अपेक्षाएँ पूरी न होना: गुट के विधायक चाहते हैं कि उन्हें सरकार में बेहतर पद और विभाग मिलें. सत्ता-साझेदारी में असंतुलन: अगर सहयोगी दलों को ज्यादा अहम विभाग मिलते हैं तो असंतोष बढ़ सकता है. राजनीतिक पहचान का मुद्दा: शिंदे गुट खुद को मजबूत और निर्णायक खिलाड़ी के रूप में दिखाना चाहता है, इसलिए कम हिस्सेदारी को कमजोरी के रूप में देखा जा सकता है.
हालांकि, दूसरी तरफ यह भी देखा गया है कि गठबंधन राजनीति में अक्सर समझौते और अंतिम समय की बातचीत से ऐसे मतभेद सुलझा लिए जाते हैं, इसलिए यह कहना अभी निश्चित नहीं है कि नाराजगी वास्तव में बढ़ेगी ही.
शिंदे को सीएम क्यों नहीं बनाया गया?
सबसे पहले, 2024 के बाद बनी सरकार में सत्ता का आधार गठबंधन (महायुति) था, जिसमें प्रमुख रूप से भाजपा का विधायकों के मामले में सबसे बड़ा समर्थन था। ऐसे में परंपरागत रूप से मुख्यमंत्री पद उसी दल को जाता है जिसके पास सबसे अधिक सीटें हों या सबसे मजबूत राजनीतिक स्थिति हो.
दूसरा, 2022 में शिंदे खुद मुख्यमंत्री बने थे, जब उन्होंने शिवसेना में बड़ा राजनीतिक विभाजन करके सरकार बनाई थी. लेकिन बाद के चुनावी समीकरणों में स्थिति बदल गई और सत्ता-संतुलन फिर नए ढांचे में चला गया.
तीसरा, गठबंधन राजनीति में यह भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर होता है कि केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर संतुलन बनाए रखा जाए. इसलिए मुख्यमंत्री पद अक्सर सबसे बड़े सहयोगी दल को देकर बाकी दलों को उपमुख्यमंत्री और मंत्रालयों के जरिए संतुलित किया जाता है.
शिंदे को मुख्यमंत्री न मिलना किसी एक कारण से नहीं, बल्कि सीटों का गणित, गठबंधन का संतुलन और राजनीतिक समझौते का परिणाम माना जाता है.
शिंदे की भूमिका को ऐसे समझ सकते हैं
उपमुख्यमंत्री (Deputy CM)
शिंदे सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं और वे राज्य प्रशासन में मुख्यमंत्री के साथ मिलकर निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं.
शिवसेना (शिंदे गुट) का नेतृत्व
वे अपनी पार्टी के गुट—जिसे आम तौर पर शिवसेना (शिंदे गुट) कहा जाता है—के प्रमुख नेता हैं और उनके विधायकों का प्रतिनिधित्व करते हैं.
कैबिनेट में हिस्सेदारी
उनकी पार्टी के मंत्री राज्य मंत्रिमंडल में अलग-अलग विभाग संभालते हैं, जिससे शिंदे गुट सरकार के प्रशासन में सीधे तौर पर शामिल रहता है.
सत्ता-संतुलन में भूमिका
महायुति गठबंधन में शिंदे गुट एक महत्वपूर्ण साझेदार है, इसलिए उनकी भागीदारी सिर्फ पद तक सीमित नहीं, बल्कि नीतिगत फैसलों और राजनीतिक संतुलन तक फैली होती है.

