नए साल की अच्छी शुरुआत की कामना करते हुए लाखों भक्तों ने महाकाल के सामने शीश नवाया. साढ़े 6 लाख उज्जैन तो ढाई लाख मैहर पहुंचे श्रद्धालु
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By :प्रिंस अवस्थी
Mahakal- Maihar Mandir in New Year 2025: ‘नया साल मंगलमय हो’, इसी कामना के साथ 6 लाख 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के आशीर्वाद लिए. सुबह भस्म आरती से लेकर रात शयन आरती तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार मंदिर में पहुंचती रही. वहीं मैहर जिला स्थित शारदा माता मंदिर में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और यहां ढाई लाख से ज्यादा श्रद्धालु अंग्रेजी नव वर्ष सुखमय व्यतीत हो, इस हेतु आशिर्वाद प्राप्त किया.

नए साल पर दर्शन करने आए श्रद्धालुओं से महाकाल मंदिर को करीब 5 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी होने की चर्चा है. महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष और उज्जैन कलेक्टर ने बताया कि नए साल पर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे. उन्होंने बताया कि नए वर्ष के पहले दिन मंदिर के पट खुलने से बंद होने तक 6 लाख 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया.

धार्मिक स्थलों पर देखी गई सबसे ज्यादा भीड़
उज्जैन महाकाल मंदिर की चलित भस्मआरती में एक साथ करीब 18 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. सुबह 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक यह सिलसिला चलता रहा. वहीं मैहर में सुबह आरती के बाद मातारानी के पट आमजन के लिए खोल दिए गए, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और शारदा मां के दर्शन किए. यहां भी रात्रि 10 बजे तक श्रद्धालु डटे रहे. इसी तरह ओंकारेश्वर और महेश्वर में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इसके अलावा जबलपुर स्थित भेड़ाघाट, गौरीघाट, चौसठ योगिनी मंदिर, त्रिपुर सुंदरी माता के दर्शन हेतु श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई.
क्यों टूट रहा है रिकॉर्ड?
- नए साल की शुरुआत भगवान के दर्शन से करने की परंपरा
- सोशल मीडिया और धार्मिक पर्यटन का बढ़ता ट्रेंड
- बेहतर सड़क, रोपवे और सुविधाएं
- प्रशासन द्वारा बेहतर व्यवस्थाएं
धार्मिक स्थलों का चयन क्यों करते हैं युवा
नए साल की शुरुआत अगर किसी धार्मिक पर्यटन स्थल से की जाए, तो इसका प्रभाव सिर्फ यात्रा तक सीमित नहीं रहता है. बल्कि इन ऐसे स्थानों पर जाने से मानसिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव ला सकता है. युवाओं में अध्यात्म के प्रति झुकाव होगा और गलत कामों से बचने की प्रेरणा मिलेगी. इसी उद्देश्य से परिवार के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु और युवा अपने परिवार के साथ धार्मिक स्थलों पर जाते हैं.
मानसिक शांति और नई शुरुआत
धार्मिक स्थानों का वातावरण शांत और पवित्र होता है. जैसे मैहर, उज्जैन महाकाल सहित वाराणसी या तिरुपति बालाजी मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों पर जाने से मन शांत होता है और नए साल की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है. इसी कारण सबसे ज्यादा यहां भीड़ देखने को मिलती है.
आध्यात्मिक जुड़ाव
नए साल पर लोग अक्सर आत्मचिंतन और लक्ष्य तय करते हैं. धार्मिक स्थलों पर जाने से व्यक्ति अपने भीतर झांकने और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनने का अवसर पाता है. इसी कारण परिवार के साथ लोग धार्मिक स्थल जाने का मन करते हैं. इससे नए वर्ष में सकारात्मक ऊर्जा के साथ नया साल प्रारंभ होने की कामना भी की जाती है.
प्राकृतिक और सांस्कृतिक सौंदर्य
अधिकतर धार्मिक स्थल सुंदर प्राकृतिक वातावरण में बसे होते हैं. जैसे मैहर, उज्जैन महाकाल मंदिर, वैष्णो देवी मंदिर या केदारनाथ मंदिर ये ऐसे स्थान हैं, जहां प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है, जिसके कारण यात्रा यादगार बन जाती है और प्राकृतिक रूप से जुड़ने का एक अच्छा अवसर भी मिल जाता है.
परिवार के साथ समय
धार्मिक यात्रा अक्सर परिवार के साथ की जाती है, जिससे रिश्तों में मजबूती आती है और साथ में समय बिताने का मौका मिलता है. अमूनन लोग अपने परिवार के साथ बहुत कम समय व्यतीत करते हैं. धार्मिक यात्रा के बहाने परिवार के साथ समय व्यतीत करने का अच्छा मौका मिल जाता है.
सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा
धार्मिक स्थलों का माहौल व्यक्ति को प्रेरित करता है कि वह अपने जीवन में अच्छाई, अनुशासन और सकारात्मकता को अपनाए.
परंपरा और आस्था का सम्मान
भारत जैसे देश में धार्मिक पर्यटन परंपरा का हिस्सा है. नए साल पर ऐसे स्थानों की यात्रा करना अपनी संस्कृति और आस्था को सम्मान देने जैसा है.

