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चीन की दबंगई को देखते हुए 16000 फीट ऊचाई तक मार करने वाले खरीदे जाएंगे हेलीकॉप्टर

DB News
Last updated: 24/03/2026 5:12 PM
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भारतीय सेना के लिए 145 हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर खरीदे जाएंगे, जिन्हें ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात किया जाएगा. हाल में 307 हॉवित्जर और 83 तेजस LCA को लेकर भी डील हुई थी.

 

Contents
भारतीय सेना के लिए 145 हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर खरीदे जाएंगे, जिन्हें ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात किया जाएगा. हाल में 307 हॉवित्जर और 83 तेजस LCA को लेकर भी डील हुई थी.हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर खरीदने की मंजूरीसियाचिन और पूर्वी लद्दाख के लिए LCH परफेक्टमनोबल तोड़ने में अहम साबित हो सकताा हैसामग्री उंचाई पर पहुंचाना एक बड़ी चुनौती300 किलोग्राम से अधिक भार ढोने में सक्षम है हेलीकॉप्टरभारतीय सेना की अनुकूलन क्षमता, अभिनव सोच और अदम्य जज्बे का प्रमाण

By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Indian Army Prachand Helicopters: पूर्वी लद्दाख और सियाचिन ग्लेशियर में चीन अक्सर दबंगई दिखाने की कोशिश करता रहता है. इससे निपटने के लिए अब भारतीय सेना ने भी कमर कस ली है. अब उसकी ये दादागीरी काम नहीं आएगी. भारत ने इन इलाकों में ड्रैगन पर लगाम लगाने के लिए ‘प्रचंड’ प्लान लागू कर दिया है. इन इलाकों में भारतीय सेना 145 एलसीएच को तैनात करेगी, जोकि 16 हजार फीट की ऊंचाई तक ड्रैगन का पीछा नहीं छोड़ेंगे.

हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर खरीदने की मंजूरी

भारतीय सेना को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से 145 हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों (LCHs) खरीदने के सौदे को मंजूरी मिल गई है. इस डील को जल्द ही केंद्रीय कैबिनेट की ओर से भी मंजूरी मिलने की उम्मीद है. इसके साथ ही अब भारतीय सशस्त्र बलों की हवाई क्षमताओं में काफी बढ़ोतरी हो जाएगी. चीन और पाकिस्तान के साथ सीमाओं पर तनाव को देखते हुए एलसीएच की खरीद भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है, इन लड़ाकू हेलीकॉप्टरों को ‘प्रचंड’ के नाम से भी जाना जाता है.

सियाचिन और पूर्वी लद्दाख के लिए LCH परफेक्ट

एचएएल ने इन हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों को ऊंचाई वाले इलाकों में अभियानों के लिए डिजाइन किया है. ये एकमात्र हमलावर हेलीकॉप्टर है, जो 16,400 फीट यानी करीब पांच हजार मीटर तक की उंचाई तक उड़ान भरने और लैंड करने में सक्षम है. सियाचिन ग्लेशियर और पूर्वी लद्दाख जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में तैनात करने के लिए ये एलसीएच उपयुक्त हैं. ये हेलीकॉप्टर उन्नत हथियारों से लैस हैं. इनमें हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें, रॉकेट और बुर्ज गन शामिल हैं. ये एलसीएच दुश्मन के टैंकों, बंकरों और हवाई खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम हैं. इसके अलावा ये एलसीएच एयर डिफेंस सिस्टम को भी ध्वस्त कर सकते हैं.

मनोबल तोड़ने में अहम साबित हो सकताा है

जैसा कि पता है कि पर्वत अपने स्वभाव से ही रक्षक के पक्ष में होते हैं. हमलावर को निर्णायक रूप से पराजित होने के लिए ऐसी स्थिति उत्पन्न करनी पड़ती है जिसमें रक्षक अपनी चतुराई से हार जाए और उसका मनोबल टूट जाए. चूंकि बहुत कम देशों ने वास्तव में उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों (समुद्र तल से 9,000 फीट से अधिक) में युद्ध लड़ा है, इसलिए यहां उपमहाद्वीप के अनुभवों से संबंधित कुछ उदाहरण दिए गए हैं. यह हेलीकॉप्टर दुश्मन का मनोबल तोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा.

सामग्री उंचाई पर पहुंचाना एक बड़ी चुनौती

कठिन रास्ते अक्सर सैन्य सामग्रियों के आपूर्ति मार्गों को बाधित कर देते हैं. यहां सेना की गजराज कोर ने हाई-एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक्स में यह महत्वपूर्ण नवाचार कर दिखाया है. सेना के मुताबिक ऐसे इलाकों में अग्रिम चौकियां कई दिनों तक बर्फ के कारण कट जाती हैं और पारंपरिक परिवहन साधन अक्सर विफल हो जाते हैं, जिससे आवश्यक सामग्री पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बनी रहती है. इन्हीं परिचालन आवश्यकताओं को देखते हुए गजराज कोर ने स्वदेशी हाई-एल्टीट्यूड मोनोरेल सिस्टम को डिजाइन, विकसित और तैनात किया है.

300 किलोग्राम से अधिक भार ढोने में सक्षम है हेलीकॉप्टर

यह सिस्टम अब पूरी तरह परिचालन-योग्य है और 16,000 फीट पर लॉजिस्टिक सपोर्ट का स्वरूप बदल रहा है. यह अनोखा मोनोरेल सिस्टम एक बार में 300 किलोग्राम से अधिक भार ढोने में सक्षम है. सेना के अनुसार, यह सिस्टम उन दुर्गम पोस्टों के लिए जीवनरेखा साबित हो रहा है, जहां न तो सड़क संपर्क है और न ही कोई अन्य संचार या आपूर्ति का साधन. इसके माध्यम से आवश्यक सैन्य सामग्री, गोला-बारूद, राशन, ईंधन, इंजीनियरिंग उपकरण, और भारी व असुविधाजनक लोड को आसानी से ढलानों और अस्थिर सतहों पर पहुंचाया जा सकता है.

भारतीय सेना की अनुकूलन क्षमता, अभिनव सोच और अदम्य जज्बे का प्रमाण

सेना की गजराज कोर की यह इन-हाउस तकनीकी उपलब्धि सेना परिचालन तत्परता को बढ़ाती है व हाई-एल्टीट्यूड पोस्टों की स्थायित्व क्षमता मजबूत करती है. यह पहल भारतीय सेना की चुनौतीपूर्ण समस्याओं का व्यावहारिक, मिशन-केंद्रित समाधान खोजने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है. कमेग हिमालय जैसे कठिन क्षेत्रों में संचालन के लिए यह नवाचार भारतीय सेना की अनुकूलन क्षमता, अभिनव सोच और अदम्य जज्बे का प्रमाण है.

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