जीआई टैग मिलने से निश्चित ही यहां के मटर और सिंघाड़े की मार्केटिंग और बिक्री में भारी वृद्धि होगी.
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP News: जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को जल्द ही जीआई टैग अर्थात जिओग्राफीकल इंडीकेशन टैग मिलने की संभावना बन रही है. यह एक महत्वपूर्ण कदम है जिससे जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी. जीआई टैग मिलने से निश्चित ही मटर और सिंघाड़े की मार्केटिंग और बिक्री में भारी वृद्वि होगी. जिसका लाभ किसानों को मिलेगा.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नाबार्ड भोपाल के क्षेत्रीय कार्यालय में जीआई टैग की बैठक आयोजित की गई. इस सुनवाई में प्रदेश भर से विभिन्न उत्पादों के जीआई टैग के लिये आवेदन करने वाले आवेदकों को अपना पक्ष रखने के लिये बुलाया गया था. इस सुनवाई को महानियंत्रक पेटेंट, डिजाइन एवं ट्रेड मार्कस् एवं पंजीयक, भौगोलिक संकेत की अध्यक्षता में जीआई रजिस्ट्री विभाग चैन्नई द्वारा रखा गया था. इस अवसर पर कृषि विभाग और उद्योनिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
जिला प्रशासन का मिला सहयोग
जीआई टैग के लिए जिला प्रशासन कृषि विभाग और उद्योनिकी विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन और सहयोग से जबलपुर के मटर और सिंघाड़े के जीआई टैग की सुनवाई में इनकी विशिष्टता व महत्व को मजबूती से रखा गया. जिससे निश्चित तौर पर शीघ्र ही जबलपुर के मटर व सिंघाड़ा को जीआई टैग मिलने की संभावना है. जबलपुर के पाटन क्षेत्र की मटर और सिहोरा का सिंघाड़ा न सिर्फ पूरे एशिया में प्रसिद्ध है बल्कि व्यापक पैमाने पर इनका निर्यात भी किया जाता है.आस पास के किसानों की आय का प्रमुख जरिया मटर और सिंघाड़ा हैं
क्या है भौगोलिक संकेत का अर्थ (GI) टैग
एक भौगोलिक संकेत (GI) एक ऐसा नाम या प्रतीक होता है जिसे कृषि, प्राकृतिक, मशीनरी और मिठाई आदि से संबंधित उत्पादों के लिए किसी क्षेत्र विशेष (देश, प्रदेश या टाउन) के किसी व्यक्ति, व्यक्तियों के समूह या संगठन को दिया जाता है.
इसमें उस क्षेत्र की विशेषताओं के गुण और प्रतिष्ठा भी पायीं जाती हैं. हालाँकि, एक संरक्षित भौगोलिक संकेत धारक, किसी और व्यक्ति को उसी तकनीक से इसी उत्पाद को बनाने से नहीं रोक सकता है. लेकिन नकल करने वाला व्यक्ति उसी संकेत का उपयोग नहीं कर सकता है.
GI टैग का उद्देश्य
जीआई टैग का मूल उद्देश्य दूसरे लोगों द्वारा पंजीकृत भौगोलिक संकेत के अनाधिकृत उपयोग को रोकना है. GI टैग के माध्यम से उत्पादन प्रक्रिया में नयापन लाने वाले लोगों को इस बात की सुरक्षा प्रदान की जाती है कि उनके उत्पाद की नकल कोई और व्यक्ति या संस्था नहीं करेगी. इसके दो मुख्य उद्येश्य हैं. पहला- GI टैग किसी क्षेत्र के उत्पाद की उत्पत्ति को पहचानने के लिए एक संकेत या प्रतीक है और दूसरा- इस GI टैग की मदद से कृषि, प्राकृतिक या निर्मित वस्तुओं की अच्छी गुणवत्ता को सुनिश्चित की जा सकती है.
जीआई टैग कौन जारी करता है?
GI टैग वस्तु (पंजीकरण और संरक्षण) एक्ट, 1999 के अनुसार जारी किए जाते हैं. यह टैग, ‘भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री’ द्वारा जारी किया जाता है, जो कि उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आता है. जीआई टैग जारी किए जाने के बाद उस उत्पादन का उपयोग अन्य कोई दूसरा व्यक्ति नहीं कर सकता है.
मटर उत्सव मनाकर पहचान देने की कोशिश
जबलपुर जिले में हर वर्ष मटर उत्सव मनाया जाता है, जिससे नए-नए पकवान बनाए जाते हैं और मटर की उपयोगिता का प्रदर्शन होता है. मटर का उत्पादन जबलपुर के अलावा अन्य कई जगह भी होता है. लेकिन जबलपुर शहपुरा-पाटन क्षेत्र के मटर की मिठास देश-विदेश में है. यहां के मटर की मांग विदेशों में बहुतायत में है. इस कारण यहां के मटर को नई पहचान देने के लिए जीआई टैग दिया गया है.
सिंघाड़े का उत्पादन भी जबलपुर जिले में ज्यादा
जबलपुर जिले में सिंघाड़े का उत्पादन भी बहुतायत में है. यहां का सिंघाड़ा एमपी के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी जाता है और सिंघाड़े की मांग भी बहुत ज्यादा है. यहां के सिंघाड़े को नई पहचान देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा जीआई टैग दिया गया है. लेकिन इसका प्रचार-प्रसार उत्पादन के अनुसार नहीं किया जा रहा है. सिंघाड़े से बनने वाले खाद्य पदार्थ का प्रचार-प्रसार भी नहीं किया जा रहा है. जबकि त्योहारी सीजन में सिंघाड़े से बने उत्पाद ही सबसे ज्यादा बिकते हैं.

