मध्य प्रदेश जबलपुर के ललपुर फिल्टर प्लांटों का पानी साफ और स्वच्छ, बोरिंग के पानी में मिल रही गड़बड़ी, जांच से हुआ खुलासा, पिछले वर्ष तक एक साल में 50 से 60 सैंपलों की जांच होती थी.
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Water Test Report News: देश के सबसे सुंदर शहर इंदौर में गंदा पानी पीने से हुई मौतों के बाद डर का माहौल निर्मित हो गया है. कुछ ऐसा ही खौफ जबलपुर में भी देखने को मिल रहा है. लोगों में पीने के पानी को लेकर खौफ बना हुआ है. जिस भी क्षेत्र का पानी मटमैला या धुंधला दिखाई पड़ता है, जागरूक लोग पानी का सैंपल लेकर सीधे ललपुर पहुंच जाते हैं. शुद्ध पानी को लेकर लोगों में आई जागरूकता का असर भी देखने को मिल रहा है, क्योंकि जिस ललपुर फिल्टर प्लांट लेबोरेटरी में पिछले साल 12 महीनें में जांच के लिए 50 से 60 पानी के नमूने आए थे, उस लेबोरेटरी में जनवरी 2026 से मार्च माह के बीच 1600 से ज्यादा पानी के सैंपल की जांच हो चुकी है. इससे साफ जाहिर होता है कि शहरवासियों में गंदे पानी को लेकर कितनी जागरूकता है. शहर के किसी भी हिस्से में जहां मटमैला गंदा पानी पहुंचने लगता है, उस क्षेत्र के लोग पानी को बोतल में लेकर जांच के लिए लेबोरेटरी पहुंच जाते हैं.
लेबोरेटरी की जांच को झुठला रहा पानी का रंग
संजीवनी नगर, गढ़ा, घमापुर, सिविल लाइन जैसे क्षेत्र से मटमैला पानी आ रहा है. वहीं ललपुर फिल्टर प्लांट लेबोरेटरी में शताब्दीपुरम, गेट नंबर-4, छोटी मस्जिद, बादशाह हलवाई मंदिर, लोकमान तिलक वार्ड मशीन वाले बाबा, जनता बिल्डिंग, पंडित मदन मोहन मालवीय वार्ड, बर्फ फैक्ट्री के सामने आदि से बड़ी संख्या में पानी के सैंपल पहुंच रहे हैं. ये पानी के सैंपल ललपुर लेबोरेटरी की उस जांच को झुठला रहे हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि शहर में शुद्ध पानी पहुंचाया जा रहा है.
चारों जलशोधन संयंत्र से पहुंच रहे सैंपल
ललपुर फिल्टर प्लांट में नियुक्त केमिस्ट की मानें तो शहर के चारों जल शोधन संयंत्रों से पानी के नमूने पहुंच रहे हैं. रमनगरा, ललपुर, भोंगाद्वार और रांझी जल शोधन संयंत्र की तीन स्तरों पर जांच हो रही है. वहीं शहर के किसी भी हिस्से में यदि हैण्डपंप, नल कनेक्शन से पानी का रंग गहरा आ रहा है तो उसकी भी जांच अनिवार्य कर दी गई है.
बोरिंग के पानी में गड़बड़ी की आशंका
लेबोरेटरी में गंदे पानी की शिकायत सबसे ज्यादा बोरिंग और हैण्डपंप के पानी में आ रही है. केमिस्ट की मानें तो शहर में फिल्टर प्लांट से पानी बिल्कुल शुद्ध सप्लाई हो रहा है. लेकिन घर-घर कनेक्शन देने वाली पानी की पाइप लाइन में ही कुछ गड़बड़ी होगी, जिसके कारण घरों में मटमैला पानी पहुंच रहा है. इसके अलावा हैण्डपंप का पानी गर्मी के दिनों में मटमैला हो जाता है. जिसके कारण लोगों को गंदे पानी का डर सता रहा है.
3 स्तरों में होती है लेबोरेटरी में पानी की जांच
पहला भौतिक सत्यापन
> जिसके अंतर्गत तापमान, रंग, गंध, धुंधलापन और ठोस पदार्थ की जांच होती है.
दूसरा रासायनिक विश्लेषण
> इसके अंतर्गत पीएच, चालकता, लवणता, कठोरता, बीओडी की जांच करने का प्रावधान है.
तीसरा जैविक विश्लेषण
> इसमें विशिष्ट जीवों और जीवों के समूहों की संख्या की जांच होती है.
शहर में 61 टंकियों व ओवरहेड टैंक से पानी की सप्लाई की जा रही है. इन सभी टंकियों से गुजरने वाली सप्लाई की पाइप लाइन कहीं न कहीं जर्जर अवस्था में पहुंच गई है या फिर नाले-नालियों से गुजर रही है. इस पर ध्यान देकर सुधार कराने की जरूरत है, लेकिन नगर निगम के अधिकारी इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं.
कठोरता का माप
नरम 0 – 100 मिलीग्राम/लीटर
मध्यम 100 – 200 मिलीग्राम/लीटर
कठोर 200 – 300 मिलीग्राम/लीटर
बहुत कठोर 300 – 500 मिलीग्राम/लीटर
अत्यंत कठोर 500 – 1,000 मिलीग्राम/लीटर
फिल्टर प्लांटों से सप्लाई हो रहे पानी की हर दिन हो रही जांच
शहर के रमनगरा, ललपुर, भोंगाद्वार और रांझी जलशोधन संयंत्रों के पानी की जांच प्रतिदिन हो रही है. यह बात जरूर है कि शहर के विभिन्न हिस्सों से आने वाले सैंपल की जांच का आंकड़ा बढ़ गया है, लेकिन जल शोधन संयंत्र से बिल्कुल शुद्ध पानी पहुंच रहा है. डिस्ट्रिब्यूशन लाइन में ही कुछ गड़बड़ी हो जाती है, तब मटमैला पानी आता होगा. अन्यथा इंदौर की घटना के बाद से बारीकी से पानी की जांच हो रही है. शुभम गुजराती, केमिस्ट, ललपुर फिल्टर प्लांट लेबोरेटरी

