Caste Survey को लेकर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कुछ राज्यों ने जाति की गणना के लिए सर्वे किए हैं जबकि कुछ अन्य राज्यों ने ऐसे सर्वे पूरी तरह से राजनीतिक दृष्टिकोण से गैर-पारदर्शी तरीके से किए हैं.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Caste Census: देश में आजादी के बाद पहली बार जाति जनगणना कराई जाएगी. केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को जाति जनगणना को मंजूरी दी. इस बात की जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार (30 अप्रैल, 2025) को कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान दी. उन्होंने बताया कि इसे मूल जनगणना के साथ ही कराया जाएगा. देश में इसी साल के आखिर में बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं. कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल जाति जनगणना कराने की मांग करते रहे हैं. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जाति जनगणना की शुरुआत सितंबर में की जा सकती है.
हालांकि जनगणना की प्रोसेस पूरी होने में एक साल लगेगा. ऐसे में जनगणना के अंतिम आंकड़े 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में मिल सकेंगे. देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी. इसे हर 10 साल में किया जाता है. इस हिसाब से 2021 में अगली जनगणना होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था.
जाति जनगणना के ऐलान के बाद राहुल गांधी ने कहा- आखिरकार सरकार ने जाति जनगणना की बात कह दी है. हम इसे सपोर्ट करते हैं, लेकिन सरकार को इसकी समय सीमा बतानी होगी.
जनगणना की प्रमुख बड़ी बातें-
- 1. समाज की जनसंख्या की गणना करना, उसका वर्णन करना, उसे समझना साथ ही लोगों की किन चीजों तक पहुंच है और किन चीजों से उन्हें वंचित रखा गया है, ये जानना न केवल सामाजिक वैज्ञानिकों के लिए बल्कि नीति निर्माताओं और सरकार के लिए भी जरूरी है.
- 2. इसके लिए जनगणना अपनी तरह की प्रक्रियाओं में से एक है. हालांकि जनगणना के आलोचकों का मानना है कि समाजिक संरचना को पूरी तरह से समझने के लिए जातिगत जनगणना को नियमित कराने का सुझाव देते हैं.
- 3. पहली जातिगत जनगणना सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी) के रूप में 1931 में हुई थी. इसका उद्देश्य हर व्यक्ति से उसकी जाति का नाम पूछना था, ताकि सरकार यह पुनर्मूल्यांकन कर सके कि कौन से जाति समूह आर्थिक रूप से सबसे खराब स्थिति में हैं और कौन से बेहतर स्थिति में हैं.
- 4. जाति जनगणना का उद्देश्य केवल आरक्षण का मुद्दा ही नहीं है बल्कि जाति जनगणना उन बड़ी संख्या में मुद्दों को सामने लाएगी जिन पर किसी भी लोकतांत्रिक देश को ध्यान देने की जरूरत है, खासतौर से उन लोगों की संख्या जो हाशिये पर हैं या जो वंचित हैं या वे किस तरह का व्यवसाय करते हैं. इससे बेहतर नीतियां और रणनीतियां बनाने में मदद मिलेगी. इसके अलावा संवेदनशील मुद्दों पर ज्यादा तर्कसंगत बहस भी हो सकेगी.
- 5. हालांकि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, धर्मों और भाषाई प्रोफाइल के लिए जनगणना के आंकड़े एकत्र किए गए हैं, लेकिन 1931 के बाद से भारत में सभी जातियों की प्रोफाइलिंग नहीं की गई है.
- 6. आजादी के बाद अभी तक जितनी भी जनगणनाएं हुईं, उनमें जातियों की गणना कभी नहीं की गई.
- 7. हालांकि 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह ने लोकसभा में आश्वासन जरूर दिया था कि जातिगत जनगणना पर कैबिनेट में विचार किया जाएगा.
- 8. इसके बाद एक मंत्रिमंडल समूह का गठन भी हुआ. इसके बाद भी सरकार ने जातिगत जनगणना के बजाय सिर्फ एसईसीसी सर्वे कराया.
- 9. जनगणना का विषय संविधान के अनुच्छेद 246 की केंद्रीय सूची की क्रम संख्या 69 पर है और ये केंद्र का विषय है.
- 10. हालांकि सर्वे के जरिए कई राज्यों ने जातियों की गणना की है.

