आरएसएस मानहानि का है मामला, सोमवार को राहुल गांधी की ओर से वकील कुशल मोर की दायर याचिका सुनवाई नहीं हो सकी।
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Rahul Gandhi: मुंबई. बॉम्बे हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी याचिका पर सुनवाई 26 जून तक टल गई। राहुल ने याचिका में कुंटे के आपराधिक मानहानि की शिकायत में उनके द्वारा सौंपे गए सीडी और अतिरिक्त दस्तावेज स्वीकार करने के भिवंडी मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति पृथ्वीराज के.चव्हाण की एकल पीठ के समक्ष सोमवार को राहुल गांधी की ओर से वकील कुशल मोर की दायर याचिका सुनवाई नहीं हो सकी।
आरएसएस कार्यकर्ता राजेश कुंटे के वकील तपन थत्ते अदालत में सुनवाई के दौरान नहीं पहुंच सके। राहुल की याचिका में दावा किया है कि 2021 में हाईकोर्ट एक पीठ ने शिकायतकर्ता राजेश कुंटे के मामले में कोई भी नया दस्तावेज जमा करने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद ठाणे जिले के भिवंडी में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पिछले साल जून में कुंटे को नए दस्तावेज और राहुल गांधी के ट्वीट से जुड़ी सीडी को सबूत के रूप में स्वीकार कर लिया था।
याचिका में दावा किया
राहुल गांधी ने याचिका में दावा किया है कि कुंटे को इस स्तर पर नए दस्तावेज जमा करने की मजिस्ट्रेट कोर्ट को अनुमति देना पूरी तरह से अवैध और पूर्वाग्रह पूर्ण है। कुंटे ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के मानहानि की याचिका दायर किया है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ महात्मा गांधी की हत्या के लिए आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) को जिम्मेदार ठहराने के गलत बयान पर आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करने की मांग की गयी है।
याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में क्या कहा ?
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता का दावा था कि राहुल गांधी के बयान ने उनके उस मौलिक कर्तव्य के पालन के अधिकार का उल्लंघन किया है, जिसमें संविधान नागरिकों को स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को संजोने और उनका पालन करने की बात कहता है.
सुप्रीम कोर्ट में पहले भी याचिका दायर की गई थी
मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे ने स्पष्ट किया, “हम राहुल गांधी को कोई याचिका पढ़ने का निर्देश नहीं दे सकते. डॉ. पंकज की तरफ से इसी विषय पर पहले सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि अदालत इस तरह के मुद्दों पर हस्तक्षेप नहीं कर सकती.
इधर ‘40% कमिशन वाली सरकार’, राहुल गांधी को कर्नाटक हाईकोर्ट से बड़ी राहत
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि केस को रद्द कर दिया. यह केस भाजपा ने 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की ’40 फीसदी कमिशन’ वाले विज्ञापनों और नारों को लेकर दायर किया था. जस्टिस सुनील दत्त यादव ने राहुल गांधी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिका मंजूर की जाती है. कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. याचिकाकर्ता (राहुल गांधी) के संबंध में कार्यवाही रद्द की जाती है.
राहुल गांधी ने केस खारिज करने की मांग की थी
यह केस भाजपा नेता केशव प्रसाद ने दायर किया था. इसमें राहुल गांधी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को आरोपी बनाया गया था. कांग्रेस ने 2023 के चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यधारा के अखबारों में पूरे पेज के विज्ञापन दिए थे, जिनमें आरोप लगाया गया था कि तब सत्ता में भाजपा सरकार ठेकेदारों और अन्य से सार्वजनिक कार्यों के लिए 40% तक कमीशन/रिश्वत ले रही थी. कांग्रेस ने इसे ‘भ्रष्टाचार रेट कार्ड’ के रूप में पेश किया था. भाजपा ने इन विज्ञापनों को झूठा और पार्टी सदस्यों तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को बदनाम करने वाला बताया था.
राहुल गांधी ने केस खारिज करने की मांग की थी
राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केस खारिज करने की मांग की थी. उन्होंने तर्क दिया कि कोई भी पोस्ट या सामग्री सीधे उन्हें नहीं जोड़ती. कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि ऐसे आरोप राजनीतिक आलोचना के दायरे में आते हैं और संवैधानिक संरक्षण प्राप्त हैं. कार्यवाही जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. यह राहत राहुल गांधी के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि इससे पहले जून 2024 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को भी 1 जून 2024 को जमानत मिली थी. केस 2023 चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के ‘40% कमीशन वाली सरकार’ वाले नारे से जुड़ा था, जिसने भाजपा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे.

