Ram Mandir New Dress Code: राम मंदिर ट्रस्ट ने पुजारियों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया है. अब राम मंदिर के पुजारी पीले रंग की धोती, चौबंदी (एक तरह का कुर्ता) और पगड़ी में नजर आएंगे.
Source : SOCIAL MEDIA
By : DB NEWS UPDATE | Edited By: Supriya
Ayodhya Ram Masndir. हिंदू धर्म में भगवान के गर्भगृह में प्रवेश करने की एक पद्धति है. मंदिर के पुजारी को नियम और संयंम के साथ रहते हुए पूजा करने का विधान है. भारत के हर मंदिर और क्षेत्र की परंपराएं हैं. उसी के अनुकूल संयंमित जीवनचर्या में रहते हुए पूजा की जाती है. इसी तारतम्य में अयोध्या के राम मंदिर के नियमों में भी एक बार फिर तमाम बड़े बदलाव किए गए हैं. पुजारी अब भगवा रंग के बजाय पारंपरिक पीले रंग के कपड़ों में नजर आएंगे. इसके साथ ही अब पुजारी भी मंदिर में फोन नहीं ले जा पाएंगे.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर ट्रस्ट ने अन्य निर्देशों के साथ पुजारियों के लिए एक नया ड्रेस कोड जारी किया है. इसके मुताबिक, पुजारी अब पीले रंग की धोती, चौबंदी (एक तरह का कुर्ता) और पगड़ी में नजर आएंगे. पहले राम लला के गर्भगृह में मौजूद पुजारी भगवा पगड़ी, भगवा कुर्ता और धोती पहनते थे.
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि पुजारियों को अपने फोन मंदिरों में ले जाने पर प्रतिबंध लगाने का कदम सुरक्षा कारणों की वजह से लिया गया. सूत्रों के मुताबिक, मंदिर की तस्वीर हाल में सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह कदम उठाया गया.
लागू हुआ नया ड्रेस कोड
मंदिर के अधिकारियों के अनुसार नया ड्रेस कोड एक जुलाई से प्रभावी हो गया है. नए ड्रेस कोड में पगड़ी पीले रंग के सूती कपड़े से बनी है, इसे सिर पर बांधा जाएगा और नए पुजारियों को पगड़ी बांधने की ट्रेनिंग दी गई है. उन्होंने बताया कि इसके अलावा चौबंदी कुर्ते में कोई बटन नहीं होगा और इसे बांधने के लिए एक धागा पिरोया गया है. पीले रंग की धोती, सूती कपड़े का एक टुकड़ा है जिसे कमर के चारों ओर बांधा जाएगा जो पूरे पैरों को टखनों तक ढकेगी.
हर सहायक पुजारी को मिलेंगे 5 ट्रेनी पुजारी
मंदिर में मुख्य पुजारी की सहायता के लिए चार सहायक पुजारी होते हैं. ट्रस्ट ने हर सहायक पुजारी के अंडर 5 ट्रेनी पुजारी नियुक्त करने का फैसला लिया. पुजारी सुबह 3.30 बजे से रात 11 बजे तक अपनी सेवाएं देंगे. ट्रस्ट के मुताबिक, पुजारियों की प्रत्येक टीम को 5 घंटे की सेवा देनी होगी.
मंदिरों के लिए पुजारी के लिए बने नियम
- मंदिर का पुजारी सुबह 4 बजे उठकर स्नान-ध्यान करेगा.
- प्रत:काल और संध्या आरती के लिए समय निश्चित करके आरती-पूजा करेगा.
- सुबह, दोपहर और शाम को भगवान को भोग लगाने की परंपरा है
- पुजारी विधि-विधान से परंपरा अनुसार देवस्थान की सेवा पूजा करेगा.
- देव स्थान की साफ-सफाई रखेगा.
- मंदिर में श्रद्धालुओं की श्रद्धा अनुरूप वातावरण बनाए रखेगा.
- मंदिर की चल-अचल संपत्ति की सुरक्षा उसी प्रकार करेगा जैसे खुद की संपत्ति की जाती है.
- देवस्थान की संपत्तियों में अपने किसी प्रकार के हित सृजित नहीं करेगा.
- साथ ही पुजारी शासन की जन-कल्याणकारी योजना में उत्प्रेरक का कार्य भी करेगा.
पुजारी के पदच्युत करने की विधि
- पुजारी की पदच्युति स्वस्थ चित्त न रहने पर.
- देवस्थान की चल-अचल संपत्ति में हित का दावा करने पर,
- चारित्रिक दोष पैदा होने पर,
- देव स्थान की सेवा-पूजा एवं संपत्ति की सुरक्षा में लापरवाही प्रदर्शित होने पर,
- शासन के आदेशों की अवहेलना करने पर पदच्युत किया जा सकता है.
पुजारी का पद रिक्त होने पर व्यवस्था
देवस्थान अपूज्य न रहे यह सुनिश्चित करना जिला प्रशासन का दायित्व होगा. अतः पुजारी की मृत्यु होने अथवा पद से पृथक किए जाने की दशा में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पुजारी की स्थाई नियुक्ति होने तक किसी योग्य व्यक्ति से अस्थाई पुजारी के रूप में काम ले सकेंगे. पुजारी पद पर विधिवत नियुक्ति होने पर ऐसा व्यक्ति स्वतः पूजा के दायित्व से मुक्त माना जाएगा. जिस अवधि में अस्थाई पुजारी द्वारा पूजा की गई है उस अवधि का मानदेय उसे प्राप्त करने की पात्रता होगी.
पुजारियों के लिए सरकारी मानक तय
- -पुजारियों की नियुक्ति वंश परंपरा के आधार पर होगी.
- -कोई भी मांसाहारी या शराबी, मंदिर का पुजारी नहीं बन सकेगा.
- -पुजारी के लिए पूजा विधि का सर्टिफिकेट कोर्स पास करना ज़रूरी होगा.
- -पुजारी के लिए कम से कम 18 वर्ष की उम्र और 8वीं पास होना ज़रूरी.
- -संबंधित व्यक्ति मंदिर की ज़मीन हड़पने या बेचने का आरोपी ना हो.
- -पिता के पुजारी होने पर उसके बेटे या उसी वंश के व्यक्ति को वरीयता दी जाएगी.
- -पुजारी के लिए आवेदन संबंधित इलाके के एसडीएम को देना होगा.
- -नियुक्ति से पहले 15 दिन तक दावे आपत्तियां मांगी जाएंगी.

