अगर आपका मन भी बरसाने की विश्व प्रसिद्ध लठमार होली देखने का है तो अपनी तैयारी कर लें. यहां जानिए इस होली (Holi 2025) अपनी छुट्टियां कैसे प्लान कर मथुरा-वृंदावन निकल जाएं.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Barsana Lathmar Holi 2025 : बृज में होली (Brij Holi 2025) की शुरुआत हो गई है. रंग उत्सव को खास बनाने के लिए पूरी तैयारियां हो चुकी हैं. बरसाने की लड्डू और लट्ठमार होली को भव्य-आकर्षण बनाने के लिए मेला क्षेत्र को श्री राधाकृष्ण जी की लीलाओं से चित्रण किया जा रहा है. इसके लिए लाइटिंग, प्रवेश द्वार, साज सज्जा किए जा रहे हैं. राधारानी जी मंदिर के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर में सीढ़ियों से अंदर ले जाया जा रहा है. श्रद्धालुओं को जयपुर मंदिर मार्ग से नीचे उतारा जा रहा है.
बरसाने की विश्व प्रसिद्ध लठमार होली (Lathmar Holi 2025) देखने के लिए देश-दुनिया से लोग आते हैं. इस रंग उत्सव को देखते ही बनता है. इस रंगोत्सव को भव्य बनाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है और लोग भी तैयारियों में जुटे हैं. ऐसे में अगर आपका मन भी बरसाने की विश्व प्रसिद्ध लठमार होली देखने का है तो अपनी तैयारी कर लें. यहां की होली विश्व भर में प्रसिद्ध है. देशभर से लोग यहां लठ्ठमार होली देखने के लिए आते हैं.
बरसाने की लठमार होली कब खेली जाएगी
- 7 मार्च- बरसाना की लड्डू होली
- 8 मार्च- बरसाना की लट्ठमार होली
- 9 मार्च- नंदगांव की लट्ठमार होली और गांव रावल की रंग लट्ठमार होली
- 10 मार्च- श्री कृष्ण जन्मस्थान और श्री बांके बिहारी जी मंदिर फूल होली
- 11 मार्च- री द्वारिकाधीश मंदिर की होली और गोकुल की छड़ीमार होली
- 13 मार्च- चतुर्वेदी समाज का डोला और गांव फालैन का होलिका दहन
- 14 मार्च- धुलेंडी
- 15 मार्च- दाऊजी का हुरंगा, नंदगांव का हुरंगा, ग्राम जाब का हुरंगा, मुखराई चरकुला
- 16 मार्च- बठैन का हुरंगा, गिडोह का हुरंगा
- 21 मार्च- महावन में छड़ीमार होली
- 22 मार्च- वृंदावन श्री रंग जी मंदिर की होली
लठमार होली देखने का प्लान कैसे बनाए
इस बार रंगों का त्योहार होली 14 मार्च शुक्रवार को पड़ रही है. इस दिन ऑफिस बंद रहेंगे. अगर आप नंदगांव जाकर बरसाने की लठमार होली देखना चाहते हैं तो होली से एक दिन पहले गुरुवार को और एक दिन बाद शनिवार की एक्स्ट्रा छुट्टी ले सकते हैं. इसके बाद रविवार की छुट्टी रहती है.
इस तरह आप चार दिन बरसाने में गुजारकर रंग उत्सव का आनंद उठा सकते हैं. अगल-अलग शहरों से वृंदावन-मथुरा के लिए ट्रेन मिलती हैं. बस से भी आप सफर करके मथुरा-वृंदावन पहुंच सकते हैं. इसके बाद सीधे बरसाने के लिए सिटी बस या लोकस ट्रांसपोर्ट लेकर निकल सकते हैं. अगर आप अपनी गाड़ी से जा रहे हैं तो आप सीधे बरसाने पहुंच सकते हैं.
इन विशेष दिनों का ध्यान रखें
खरमास
जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उस एक महीने की अवधि को खरमास या मलमास कहा जाता है. साल में दो बार खरमास लगता है. ऐसी मान्यता है कि इस दौरान सूर्य की गति धीमी पड़ जाती है और गुरु का प्रभाव कम हो जाता है, इसलिए विवाह, मुंडन, और गृह प्रवेश जैसे शुभ काम रोक दिए जाते हैं.
चातुर्मास
आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी तक के चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में रहते हैं. जगत के पालनहार के योग निद्रा में होने की वजह से इस दौरान विवाह, मुंडन और सगाई जैसे कोई भी मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं.
पितृ पक्ष
भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक के 15 दिनों को पितृ पक्ष कहा जाता है. यह समय पूरी तरह से पितरों को समर्पित है. इस दौरान लोग अपने पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं. इसलिए पितृ पक्ष में नई वस्तुएं खरीदना, नए घर में प्रवेश करना व मांगलिक काम करना अशुभ माना जाता है.
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