लोकसभा की 543 सीट होने के बावजूद क्यों लागू नहीं किया जा रहा महिला आरक्षण? सरकार लोकसभा की सीट 543 से 816 करने में क्यों जुटी है? जानें नई सीट बढ़ाने का मकसद…
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Women Reservation Bill: भारत की संसद में पहली बार नरेंद्र मोदी सरकार का विधेयक लोकसभा में गिरा है. शुक्रवार को लोकसभा में सरकार संविधान का 131वां संशोधन बिल लाई थी. सरकार इसे पास नहीं करा पाई. यह 54 वोट से गिर गया. इसके जरिए संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था. सरकार अपने 12 साल के कार्यकाल में कई बिल लाकर अपने बलबूते पास किए हैं, लेकिन महिला आरक्षण बिल जो संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 था, वह पास नहीं हो सका. इस विधेयक को लेकर देश भर में बहस छिड़ गई है. सत्ता पक्ष महिलाओं को हितैषी बता रहा है और विपक्ष को महिला विरोधी सिद्ध करने में जुटा हुआ है. वहीं विपक्ष यह कहते हुए सत्ता पक्ष पर आरोप लगा रहा है कि जब महिलाओं के लिए पहले से 33 प्रतिशत आरक्षण कानून बन चुका है, तो फिर मौजूदा 543 सीटों वाली लोक सभा में तुरंत क्यों लागू नहीं किया जा रहा है? अब देखना यह है कि यह लड़ाई किस स्तर तक पहुंचती है.
सरकार का प्लान और क्यों बिल हुआ फेल
सरकार द्वारा प्रस्ताव लाया गया था कि फिलहाल लोकसभा की सीटों को 50 प्रतिशत बढ़ाया जाए और 543 सीटों को 816 कर दिया जाए. भविष्य में इसे 850 तक भी ले जाया जा सकता था. इन नई सीटों में से एक-तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाएं.
लेकिन विपक्ष ने इस विधेयक का जोरदार विरोध दर्ज कराया. विपक्ष का कहना था कि पुरानी जनगणना -2011 के आधार पर परिसीमन (Delimitation) करना और सीटें बढ़ाना जल्दबाजी है, जबकि कई बड़े सवाल अब भी अनसुलझे हैं.
पहले से बना है महिला आरक्षण कानून, लागू नहीं
यहां बतादें कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण पहले ही नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत सितंबर 2023 में संसद से सर्वसम्मति से पास हो चुका है. इसे 16 अप्रैल 2026 को आधिकारिक गजट में भी अधिसूचित कर दिया गया. यह कानून संविधान के अनुच्छेद 334A का हिस्सा है. इसके बावजूद इसे अभी लागू नहीं किया जा सका, क्योंकि इसमें एक स्पष्ट शर्त जोड़ी गई है.
जनगणना और परिसीमन की शर्त बनी रोड़ा
पहले से बनने इस कानून के अनुसार, महिला आरक्षण लागू करने से पहले 3 चरण जरूरी हैं- पहले नई जनगणना पूरी हो, फिर परिसीमन हो और उसके बाद ही आरक्षण लागू हो. चूंकि ताजा जनगणना अभी शुरू ही हुई है, इसलिए मौजूदा समय-सीमा में आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो सकता है.
विपक्ष का आरोप- यह शर्त हमने नहीं मांगी
सोनिया गांधी ने अप्रैल 2026 में लिखे एक लेख में कहा कि यह शर्त विपक्ष ने नहीं रखी थी. उन्होंने बताया कि मल्लिकार्जुन खरगे ने तो 2024 के लोकसभा चुनाव से ही महिला आरक्षण लागू करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे नहीं माना.
अब 2011 जनगणना के आधार पर बदलाव की कोशिश
सरकार ने 2026 में प्रस्ताव दिया कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाए. लेकिन विपक्ष ने इसे दो कारणों से खारिज कर दिया. पहला, क्षेत्रीय असमानता का मुद्दा पहले सुलझाया जाए और दूसरा, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए राजनीतिक आरक्षण तय किया जाए.
OBC आरक्षण बना सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा
इस पूरे विवाद के पीछे एक बड़ा संवैधानिक खालीपन भी है- OBC वर्ग को संसद और विधानसभाओं में कोई राजनीतिक आरक्षण नहीं मिला है. जहां SC और ST को अनुच्छेद 330 और 332 के तहत आरक्षण मिलता है, वहीं OBC के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. अखिलेश यादव ने संसद में आरोप लगाया कि सरकार जातिगत जनगणना से बच रही है क्योंकि इससे आरक्षण की मांग और बढ़ेगी.
1996 से अटका है महिला आरक्षण का मुद्दा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महिला आरक्षण का मुद्दा कोई नया नहीं है. पहला विधेयक 1996 में लाया गया था, लेकिन बार-बार संसद में सहमति न बनने के कारण यह अटकता रहा. 2008 में लाया गया विधेयक 2010 में राज्यसभा से पास
विपक्ष पर ‘बचाव की राजनीति’ का आरोप
बैठक में यह भी कहा गया कि विपक्ष अब अपने रुख को सही ठहराने और उसे छिपाने की कोशिश कर रहा है. पीएम मोदी के अनुसार, यह दर्शाता है कि विपक्ष खुद अपने फैसले को लेकर असहज है.
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने आज शनिवार को कहा, ‘कल लोकसभा में जो हुआ वो लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत है. सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण के जरिए सत्ता में बने रहने की साजिश कर रही थी.’ उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत खुश हूं कि लोकसभा में सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया बिल गिर गया. सत्ता पक्ष हमें महिला विरोधी कहकर मसीहा नहीं बना सकता.’
महिलाओं के जरिए सत्ता में बने रहने की साजिश
पीएम की स्पीच से हम चौंक गए
पीएम ने कई बार अपने भाषण में कहा कि अगर आप इससे सहमत नहीं होंगे तो आप यहां नही बैठ सकते हैं. हम चौंके थे कि इनकी मंशा क्या थी.
- संविधान संशोधन बिल साजिश थी. मेरे ख्याल से पूरी साजिश जो रची गई वह इसलिए कि हमें सत्ता में रहना है. वह अभी नहीं किया जाएगा परिसीमन 2029 तक नहीं हो पाएगा। वह महिलाओं के नाम पर किया जा रहा था. ताकि उन्हें स्वतंत्रता मिल जाए सत्ता में बने रहने की.
- केंद्र सरकार ने सोचा बिल पारित हो जाएगा तो उनकी जीत हो जाएगी, नहीं हुआ तो हम हर विपक्षी नेता को महिला विरोधी साबित करके महिलाओं के लिए मसीहा बन जाएंगे.
- प्रियंका ने कहा कि यह बिल महिलाओं के लिए नहीं परिसीमन के लिए था. मैं खुश हूं कि विपक्ष ने उनका विरोध किया. ब्लैक डे उनके लिए है क्योंकि उन्हें धक्का लगा है कि यह हो कैसे गया.
बीजेपी नेता स्मृति ने भी प्रेस कान्फ्रेंस की
BJP नेता स्मृति ईरानी ने कहा, मुझे यह सुनकर हैरानी हुई कि आज कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह कहा गया कि वे महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हैं, जो 2023 में पास हुआ था और जिसमें परिसीमन का जिक्र है. लेकिन कांग्रेस के दोहरे रवैये को देखिए, वे यह भी कहते हैं कि उन्हें इस प्रक्रिया के लिए किए गए वादों और इंतजामों पर भरोसा नहीं है. कांग्रेस को देश की संवैधानिक व्यवस्थाओं पर, संसद पर और देश की महिलाओं पर कोई भरोसा नहीं है.
किरेन रिजिजू ने कहा- हम लोग दुखी है यह नुकसान पार्टियों को हुआ इससे दुखी नहीं है. बल्कि देश की महिलाओं के लिए दुखी हैं. देश के संचालन करने में महिलाओं को हिस्सेदारी देने के लिए जो कदम उठाया गया वो पास नहीं हो सका. यह पार्टी का फेल्योर नहीं है बल्कि देश की महिलाओं को नुकसान पहुंचाया गया है. कांग्रेस पार्टी के ऊपर महिला विरोधी काला धब्बा लग गया जो खत्म नहीं होने वाला है. यह पार्टी की असफलता नहीं है महिलाओं को अधिकार न देकर जश्न मनाना सही नहीं है. इससे बड़ी महिला विरोधी मानसिकता नहीं हो सकती.
रैली में भी गूंजने लगा बिल का मुद्दा
तमिलनाडु के तिरुवल्लूर में रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा- कल संसद में वे एक नया बिल लेकर आए थे लेकिन वे 2023 में ही ‘महिला बिल’ पास कर चुके थे। उस बिल के पीछे ‘परिसीमन’ छिपा हुआ था. इसका मकसद तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व को कम करना था. कल हमने संसद भवन में उस बिल को हरा दिया.

