हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे से रात के समय पत्ते तोड़ने की मनाही होती है. आइये जानते हैं आखिर क्यों शास्त्रों में रात के समय तुलसी तोड़ना वर्जित बताया गया है.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Tulsi Niyam: हिंदू धर्म की मान्यताएं वैज्ञानिक दृष्टि से प्रमाणिक दिखाई पड़ती हैं, जिन्हें नकारा नहीं जा सकता है. हम आज ऐसे पौधे की मान्यता और चमत्कार के बारे में जानने का प्रयास करेंगे, जिनका स्पर्श करने से मनोवांच्छित फल की प्राप्ति तो होती है. लेकिन कई बार उस पौधे का स्पर्श करने मात्र से दु:ख भोगने पड़ते हैं. आज हम ऐसे चमत्कारिक पौधे तुलसी के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसको अपने घर-आंगन में लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का क्षय होता है.
तुलसी का पौधा अत्यंत पवित्र माना जाता है. तुलसी की पूजा करने के साथ ही इसे छूने या तोड़ने के भी कई नियम हैं. शास्त्रों में खासकर रात के समय तुलसी तोड़ना वर्जित है. शास्त्रों के अनुसार, रविवार, एकादशी, ग्रहण आदि जैसे दिनों में तुलसी तोड़ना वर्जित होता है. लेकिन इसी के साथ रात के समय भी तुलसी नहीं तोड़ना चाहिए.
शास्त्र और विज्ञान दोनों के अनुसार, रात के समय किसी भी पेड़-पौधों को ना ही छूना चाहिए और ना ही तोड़ना चाहिए. खासकर रात के समय तुलसी की पत्तियों को बिल्कुल भी नहीं तोड़ना चाहिए.
तुलसी पौधा लगाने का नियम
तुलसी पौधा लगाने के लिए गुरुवार और शुक्रवार के दिन को सबसे श्रेष्ठ माना गया है. इसके अलावा कार्तिक मास और शुक्ल पक्ष में तुलसी रोपण विशेष पुण्यदायी होता है. सुबह का समय तुलसी लगाने के लिए उत्तम माना गया है.
इन नियमों का पालन करना जरूरी
- जो लोग एकादशी का व्रत रखते हैं उन्हें एकादशी और द्वादशी तिथि के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए.
- नियमित रूप से तुलसी के सामने दीपक जलाएं और जिस स्थान पर तुलसी की बेल या तुलसी का पौधा हो उस स्थान को भी साफ करें. यदि तुलसी के आसपास गंदगी या कूड़ा-कचरा हो तो परिवार में क्लेश रहेगा या हर काम में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा.
- भगवान विष्णु को तुलसी की मंजिरी अर्पित करनी चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि यदि तुलसी पर अधिक मांजी हो तो यह दुखद माना जाता है. तो तुलसी के पत्ते तोड़कर भगवान विष्णु को अर्पित करें, इससे आपके ऊपर नारायण की कृपा सदैव बनी रहेगी.
- शास्त्रों के अनुसार, रात के समय तुलसी तोड़ने या छूने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु नाराज होते हैं. कुछ विद्वान ऐसा मानते हैं कि, रात में तुलसी तोड़ने से परिवार, मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियों का कारण बन सकता है.
- वैज्ञानिक दृष्टि से रात में पौधों की प्रकृति बदल जाती है. तुलसी रात के समय श्वसन क्रिया कम कर देती है और वातावरण में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन व नमी का संतुलन प्रभावित होता है. इसलिए रात में तुलसी तोड़ने से ऊर्जा और औषधीय गुण भी कम हो सकते हैं.
- शास्त्रों के अनुसार, तुलसी में जल अर्पित करने या तोड़ने के लिए सूर्योदय का समय सर्वोत्तम होता है. सुबह के समय पौधा ताजगी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होता है. इस समय तुलसी की पत्तियां और जड़ें घर में सुख, समृद्धि और शांति लाने में अधिक प्रभावशाली मानी जाती हैं.
- इसलिए विद्वान गृहस्थों लोगों को यही सलाह देते हैं कि, तुलसी की देखभाल और पूजा दिन में ही करें. रात में पौधे के आसपास हलचल या तोड़ने से बचना चाहिए. साथ ही, तुलसी के पौधे को हमेशा साफ-सुथरे और सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए.
- शास्त्रों में बताए ये नियम सिर्फ परंपरा ही नहीं, बल्कि घर और परिवार की समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख-शांति से जुड़े होते हैं. इसलिए तुलसी तोड़ने, छूने या पूजा करते समय इससे जुड़े नियमों का पालन जरूर करें.
- सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए. यदि बहुत जरूरी हो तो ताली बजाकर और तुलसी माता से प्रार्थना करके ही तुलसी का पत्ता तोड़ें.
- तुलसी के आसपास शमी के अलावा कोई भी कांटेदार पौधा नहीं लगाना चाहिए, यदि कोई पौधा उग जाए तो उसे हटाकर अन्यत्र लगाना चाहिए. तुलसी के गमले में कोई अन्य पौधा न लगाएं.
- गणपति, शिव शंकर और दुर्गा माता को तुलसा नहीं चढ़ाना चाहिए. जिस घर में तुलसी का पौधा होता है उस घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
मंत्रों का जाप जरूर करें
तुलसी के पत्ते तोड़ने से पहले मंत्रों का जाप जरूर करें. तुलसी में जल चढ़ाने के दौरान 21 बार इस मंत्र का जाप करें. ‘ॐ-ॐ’ मंत्र बहुत लाभकारी माना गया है.
तुलसी के पत्ते तोड़ने का मंत्र-
ॐ सुभद्राय नम:, मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी, नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते।।
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