पुराणों में सकट चतुर्थी को बहुत महत्व दिया गया है, गणपति जी को पूजा के लिए जनवरी में सकट चौथ व्रत किया जाएगा. सकट चौथ का व्रत 6 या 7 जनवरी किस दिन करें यहां जान लें.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Sakat Chauth 2026: हिंदू धर्म में माघ महीने में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ के रूप में जाना जाता है. यह चौथ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. इसमें गणपति जी की पूजा में तिल का खास प्रयोग किया जाता है. जनवरी में साल की बड़ी चतुर्थी यानी सकट चौथ को माना गया है. इसलिए इसे तिल चौथ, तिलकुट चतुर्थी भी कहा जाता है. इस साल सकट चौथ की तारीख को लेकर कंफ्यूजन है तो हम बताने जा रहे सही तारीख.
सकट चौथ 6 या 7 जनवरी कब
मान्यता के अनुसार कोई भी त्योहार उदया तिथि में मानने की प्रथा है. लिहाजा सकट चौथ का व्रत के लिए उदयातिथि या फिर चंद्रोदय समय देखा जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि 6 जनवरी दिन मंगलवार को सुबह 8 बजकर 1 मिनट से शुरू होगी और समाप्ति 7 जनवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगी.
अब देखा जाए तो 6 जनवरी और 7 जनवरी दोनों दिन चतुर्थी की उदयातिथि नहीं मिल रही है. लेकिन पंचांग अनुसार 6 जनवरी को चतुर्थी तिथि के साथ चंद्रमा की पूजा का समय प्राप्त हो रहा है, इसलिए सकट चौथ व्रत 6 जनवरी 2026 को रखा जाएगा.
सकट चौथ पर क्या करें
- सुबह जल्दी उठकर नहाएं और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद एक साफ आसन पर बैठकर भगवान श्रीगणेश की पूजा का संकल्प लें.
- दिनभर अन्न नहीं खाएं और फलाहार ही करें.
- शाम को पूजा के समय गणेशजी को दुर्वा, फूल और लड्डू चढ़ाएं. तिल के लड्डुओं का भोग लगाएं.
- तिल, गुड़ या अन्य तरह की मिठाई का दान करें. गणेश मंदिर के पुजारी को भोजन करवाएं.
सकट चौथ पर क्या न करें
- सूर्योदय के बाद तक न सोए रहें.
- बिना नहाए कुछ न खाएं, दिन में न सोएं.
- किसी भी तरह का नशा न करें.
- ब्रह्मचर्य का पालन करें, झूठ न बोलें.
- लड़ाई-झगड़ा न करें, तामसिक भोजन से दूर रहें.
चौथ व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
‘सकट’ शब्द का अर्थ है ‘संकट’ या ‘विपत्ति’. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सकट चौथ का व्रत रखने से संतान के ऊपर आने वाले सभी बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं. यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता (बाधाओं को दूर करने वाला) कहा जाता है.
संतान की सुरक्षा का कवच
सकट चौथ व्रत को माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए रखती हैं. माना जाता है कि जिस प्रकार भगवान गणेश ने देवताओं के संकट दूर किए थे, उसी प्रकार वे इस दिन व्रत रखने वाली माताओं की संतानों की रक्षा करते हैं.
तिल का विशेष महत्व
सकट चौथ के दिन तिल का बहुत महत्व है. माघ माह में ठंड अधिक होती है, इसलिए तिल और गुड़ का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. धार्मिक दृष्टि से, तिल का दान और तिलकुट का भोग लगाने से शनि दोष और अन्य ग्रहों के दुष्प्रभाव कम होते हैं. इसी कारण इसे ‘तिलकुटा चौथ’ भी कहते हैं.
पारिवारिक कलह से मुक्ति
यदि किसी परिवार में बार-बार अकारण झगड़े होते हों या आर्थिक उन्नति रुक गई हो, तो इस दिन विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से घर में शांति और समृद्धि का वास होता है.
पूजन सामग्री की सूची
सकट चौथ की पूजा के लिए आपको भगवान गणेश की एक प्रतिमा या तस्वीर, लकड़ी की चौकी, लाल या पीला वस्त्र, जल से भरा कलश, दूर्वा (घास), रोली, अक्षत, मौली, सुपारी, पान का पत्ता, लौंग, इलायची, और फूलों की आवश्यकता होगी. इसके अतिरिक्त, नैवेद्य या भोग के लिए विशेष रूप से तिल और गुड़ के लड्डू (तिलकुट), उबले हुए शकरकंद (गंजी), अमरूद, गन्ना और मौसमी फल रखना आवश्यक है. रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए एक लोटा, थोड़ा कच्चा दूध, गंगाजल और अक्षत की भी व्यवस्था पहले से कर लेनी चाहिए, साथ ही अगरबत्ती, धूप और घी का दीपक पूजा के वातावरण को शुद्ध और पवित्र बनाने के लिए जरूरी हैं.
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