MP जबलपुर के घाटों का जल्द होगा जीर्णोद्धार, डीपीआर पर लगातार हो रही समीक्षा, नर्मदा के घाटों का सरयू की तर्ज पर विकसित करने की परियोजना को लेकर प्रबंध संचालक भरत यादव ने समीक्षा की.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Jabalpur Narmada River Ghat: एमपी के जबलपुर में प्रस्तावित नर्मदा कॉरिडोर और नर्मदा के घाटों का पुनर्विकास एवं सौंदर्यीकरण परियोजना की लगातार समीक्षा की जा रही है. इस परियोजना के क्रियान्वयन में नर्मदा नदी की स्वच्छता एवं संरक्षण हेतु पर्यावरण हितैषी मानकों का विशेष रूप से पालन करने के निर्देश मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक ने दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना को जल्द मूर्तरूप देने के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां समय-सीमा में प्राप्त की जाएं.
साडा के तहत होना है जबलपुर के घाटों का विकास
मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम की ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के अंतर्गत प्रस्तावित साडा (स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) के तहत गौरीघाट जबलपुर के घाट और क्षेत्र का विकास होना है. इसी तारतम्य में निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव ने इस परियोजना हेतु तैयार किए गए निविदा प्रस्ताव दस्तावेज (रिक्वेस्ट फार प्रपोजल) तथा जबलपुर में प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित ‘नर्मदा घाट पुनर्विकास एवं सौंदर्यीकरण परियोजना’ की डीपीआर समीक्षा बैठक की और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए.
इन मापदण्डों का रखें विशेष ध्यान
बैठक में भरत यादव ने निर्देशित किया कि साडा के निविदा प्रस्ताव दस्तावेज में सभी आवश्यक मापदंडों एवं अहर्ताओं (एलिजिबिलिटी) का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने बताया कि साडा क्षेत्रों के अंतर्गत फूड पार्क, लॉजिस्टिक पार्क, मंडियां, अस्पताल सहित अन्य आवश्यक अधोसंरचनाओं का विकास किया जाएगा, ताकि शहरों में यातायात के बढ़ते दबाव को कम किया जा सके.
साथ ही साडा क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वाणिज्यिक परियोजनाओं के साथ-साथ आवासीय परियोजनाओं का विकास भी किया जाएगा.
सरयू की तर्ज पर विकसित किए जाने हैं नर्मदा घाट
भरत यादव ने जबलपुर में सरयू नदी की तर्ज पर विकसित किए जा रहे नर्मदा घाटों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि डीपीआर क्षेत्र की आवश्यकताओं एवं समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाए.
नर्मदा के इन घाटों का होना है जीर्णोद्धार
जबलपुर के गौरीघाट, सिद्धघाट, उमाघाट, दरोगाघाट और खारीघाट का जीर्णोद्धार किया जाना है. इस परियोजना को लेकर लंबे समय से विचार-विमर्श किया जा रहा है. लेकिन अभी तक इस परियोजना को हरी झंडी नहीं मिल पाई है. हलांकि भोपाल स्तर पर इस परियोजना को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है.
1000 करोड़ का प्रोजेक्ट 300 करोड़ में सिमट गया
मध्य प्रदेश जबलपुर के नर्मदा घाटों का विकास उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर किया जाना था. इसे नर्मदा कॉरिडोर नाम दिया गया था. जिसकी लागत 1000 करोड़ रुपये बताई जा रही थी. इस प्रोजेक्ट को रिंग रोड नगरीय सीमा भटौली से लेकर कालीघाट, जिलहरी, सिद्धघाट, उमाघाट, ग्वारीघाट, खारीघाट, तिलवारा, लम्हेटा होते हुए सीधे भेड़ाघाट तक के घाटों को शामिल किया गया था. जिन्हें संवारने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार ने ली थी. जिससे एमपी पर्यटन और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके और नर्मदा तट का संरक्षण करते हुए विकसित किया जा सके. इस 15 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट को महज आधा किमी में समेट दिया गया. इसको लेकर क्षेत्र में विशेष चर्चा हो रही है.
इन कामों पर विशेष ध्यान रखें
- घाटों तक सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पार्किंग व्यवस्था का ध्यान रखा जाए.
- ट्रैफिक कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया जाए.
- बुजुर्ग एवं दिव्यांगजनों के लिए घाट तक आसान पहुंच बनाने की दिशा में काम करें.
- वर्षा ऋतु के दौरान घाटों को किसी प्रकार की क्षति न हो.
- नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) के मानदंडों के अनुसार डिजाइन का परीक्षण किया जाना चाहिए.
ये काम कब होंगे पता नहीं
- नर्मदा कॉरिडोर के अंतर्गत ईकोलॉजिकल सिस्टम नर्मदा ग्राम विकसित करने की योजना बनाई गई थी.
- नदियों पर रिसर्च के लिए रिसर्च इंस्टीट्यूट विकसित करने की योजना शामिल थी
- नर्मदा में मिलने वाले नदी-नालों के पानी के उपचार के लिए एसटीपी प्लांट जगह-जगह स्थापित किए जाने थे.
- गंदा पानी उपचार के बाद उस पानी को नर्मदा से दूर ले जाने की योजना थी.
- 60 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण किया जाना था.
- कॉरिडोर के दोनों ओर हरा-भरा क्षेत्र विकसित किया जाना था.
इन अधिकारियों के साथ हुई डीपीआर की समीक्षा
बैठक में निगम के मुख्य महाप्रबंधक प्रदीप जैन, मुख्य तकनीकी सलाहकार आर.के. मेहरा, मुख्य अभियंता बी.पी. बौरासी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.

