24-25 जुलाई 2024 की मध्यरात्रि आसमान में शनि चंद्र ग्रहण का अद्भुत नराजा देखा जाएगा, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘लूनर ऑकल्टेशन ऑफ सैटर्न’ का नाम दिया है.
By : DB News Update | Edited By- Supriya
Shani Chandra Grahan: आमतौर पर कई बार चंद्रमा बादल के पीछे छिप जाता है. चांद के बादल में छिपने को लेकर कई गीत और कविताएं बन चुकी हैं. लेकिन इस बार कुछ अद्भुत होने जा रहा है, जब बादल में छिपने वाला चांद अपनी ओट से शनि (shani) को छिपाने वाला है. यह दुर्लभ खगोलीय घटना (astronomical phenomenon) भारत में पूरे 18 साल बाद होगी. इस दौरान कुछ ऐसा होगा जब शनि चंद्रमा (Chandrma) के पीछे छिप जाएगाऔर चंद्रमा के किनारे से वलय की तरह नजर आएगा. दुनियाभर के खगोल वैज्ञानिकों के लिए यह घटना अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण होगी.
कब दिखाई देगा शनि चंद्र ग्रहण
यह दुर्लभ घटना 24-25 जुलाई की मध्यरात्रि को घटने वाली है. वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय रात्रि में कुछ घंटों के लिए आसमान में इसे देखा जा सकेगा. बता दें कि शनि को चंद्र ग्रहण तब लगता है कि, जब चंद्रमा अपनी ओट में शनि को छिपा लेता है. चंद्रमा के पीछे छिपे होने के कारण चांद के किनारे से शनि वलय या रिंग की तरह नजर आएंगे. वैज्ञानिकों ने इसे लूनर ऑकल्टेशन ऑफ सैटर्न (Lunar Occultation of Saturn) का नाम दिया है.
शनि की लुकाछिपी जारी रहेगी
जानकारी के अनुसार, यह दुर्लभ नजारा भारत में 24 जुलाई की रात करीब 1:30 बजे से शुरू होकर धीरे-धीरे बढ़ेगा और 15 मिनट में ही चंद्रमा शनि को अपनी ओट से पूरी तरह से ढंक देगा यानी कवर कर लेगा. फिर लगभग रात 2:25 पर शनि चंद्रमा के पीछे से निकलता हुआ भी नजर आएगा. यानी रात 1:30 बजे से लेकर 2:25 तक आसमान में चंद्रमा के पीछे शनि की लुकाछिपी जारी रहेगी.
कहां-कहां देखा जा सकेगा शनि चंद्र ग्रहण
शनि चंद्र ग्रहण का नजारा भारत के साथ ही अन्य पड़ोसी देशों में भी देखा जाएगा. हालांकि अलग-अलग देशों के अनुसार समय में भी कुछ अंतर रहेगा. श्रीलंका, म्यांमार, चीन और जापान जैस देशों में भी शनि चंद्र ग्रहण की घटना को देखा जा सकेगा. इस घटना को आप खुली आंखों से भी देख सकते हैं. हालांकि शनि के रिंग या वलय को देखने के लिए आपको दूरबीन की जरूरत पड़ सकती है.
अक्टूबर में फिर लगेगा शनि चंद्र ग्रहण
तीन महीने बाद एक बार फिर से 14 अक्टूबर 2024 को आसमान में शनि चंद्र ग्रहण की घटना देखी जाएगी. यदि 24-25 जुलाई 2024 की मध्यरात्रि आसमान में बादल होने के कारण या किसी अन्य कारण से आप यह घटना नहीं देख पाएं तो आपको निराश होने की जरूरत नहीं. अक्टूबर में फिर से आप इसे देख सकेंगे.
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