Jharkhand CM Oath Ceremony: शपथ ग्रहण से पहले हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए जनता का आभार व्यक्त किया और सामाजिक न्याय, एकता और संघर्ष के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया.
Source : MEDIA
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Hemant Soren Oath Ceremony: झारखंड के 14वें मुख्यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन गुरुवार (28 नवंबर) को शपथ लेंगे. रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाएंगे. पक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं को शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने के लिए न्योता भेजा गया है.
शपथ ग्रहण से पहले हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए जनता का आभार व्यक्त किया और राज्य के सामाजिक न्याय, एकता और संघर्ष के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया. उन्होंने लिखा, “आज का दिन ऐतिहासिक होगा- एक ऐसा दिन जो हमारे सामूहिक संघर्ष, प्रेम-भाईचारे की भावना और न्याय के प्रति हम झारखंडियों के प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा. झारखंड की महान धरा ने हमेशा से विरोध और संघर्ष को जन्म दिया है और झामुमो- भगवान बिरसा, भगवान सिदो-कान्हू, अमर शहीद तेलंगा खड़िया, फूलो- झानो, पोटो हो, शेख भिखारी समेत अनगिनत वीरों के संघर्षों से भरी उसी विरासत को समेटे हर दिन आगे बढ़ रहा है.”
झामुमो को 34 मिली थीं सीटें
बता दें कि झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए गए थे. इसमें हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले झामुमो, कांग्रेस, राजद गठबंधन को 56 सीटें हासिल हुई हैं. झामुमो को 34, कांग्रेस को 16, राजद को चार और सीपीआई एमएल को दो सीटों पर जीत मिली है. राज्य में पहली बार कोई सरकार दो तिहाई बहुमत के साथ बनने जा रही है.
उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर अपने पोस्ट में लिखा-
जोहार साथियों, आज का दिन ऐतिहासिक होगा-एक ऐसा दिन जो हमारे सामूहिक संघर्ष, प्रेम-भाईचारे की भावना और न्याय के प्रति हम झारखंडियों के प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा. झारखंड की महान धरा ने हमेशा से विरोध और संघर्ष को जन्म दिया है और झामुमो-भगवान बिरसा, भगवान सिदो-कान्हू, अमर शहीद तेलंगा खड़िया, फूलो-झानो, पोटो हो, शेख भिखारी समेत अनगिनत वीरों के संघर्षों से भरी उसी विरासत को समेटे हर दिन आगे बढ़ रहा है.
आज का यह दिन राजनीतिक जीत के बारे में नहीं है, आज का यह दिन हमारी सामाजिक न्याय के प्रति संघर्ष, सामाजिक एकता को प्रखर करने की हर रोज़ लड़ी जानी वाली लड़ाई को दोहराने का दिन है. आज का यह दिन यह भी बताता है कि लोकतंत्र पर बढ़ते दबाव के बीच झारखंड की महान जनता एक साथ खड़ी है. आज हर गांव, हर शहर में एक आवाज गूंज रहा है-अधिकार, समानता, एकता मतलब झारखंडियत की आवाज.
इसमें कोई संदेह न रखें-हमारी एकता ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है. हमें न विभाजित किया जा सकता है, न ही शांत किया जा सकता है. जब-जब वे हमें पीछे धकेलते हैं, हम आगे बढ़ते हैं. जब-जब वे हमें शांत करना चाहते हैं, हमारी हूल, उलगुलान, क्रांति की आवाज़ और प्रखर होती जाती है क्यूंकि हम झारखंडी हैं, और झारखंडी झुकते नहीं है.
आज जब सामाजिक संरचना में गहरी दरारें पैदा हो रही हैं, तब हमें अपने पूर्वजों की उस एकता और हर झारखंडी को साथ लेकर चलने के संकल्प को पुनः दोहराना होगा. अपने अबुआ सरकार के लिए हर एक झारखंडी को बधाई. हमारी लड़ाई अटल है, अविराम है. संघर्ष जारी है और आखिरी सांस तक रहेगा…
दुमका में शिबू सोरेन और रूपी सोरेन की हार से लगा सदमा
पिता शिबू सोरेन की अनुपस्थिति में रूपी सोरेन ने ही दुर्गा सोरेन, हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन की पढ़ाई-लिखाई का ख्याल रखा। हेमंत सोरेन ने पटना से 12वीं की परीक्षा पास की और इंजीनियरिंग करने बीआईटी मेसरा, रांची आ गए। उस वक्त उनके पिता शिबू सोरेन 1991 के चुनाव में दुमका से सांसद निर्वाचित हुए थे। लेकिन इसी दौरान शशिनाथ झा हत्याकांड और सांसद रिश्वत कांड के कारण शिबू सोरेन की मुश्किलें बढ़ गई।
2009 में झारखंड से राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित
2005 में दुमका से मिली हार के बाद साल 2009 में जेएमएम ने उन्हें राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया। जिसमें उन्हें जीत मिली। इसके साथ ही हेमंत सोरेन का संसदीय राजनीति में पदार्पण किया। 24 जून 2009 से 4 जनवरी 2010 तक हेमंत सोरेन उच्च सदन के सदस्य रहे। इस बीच दिसंबर 2009 के विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन ने दुमका सीट से जीत हासिल की। इस चुनाव में कांग्रेस टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे स्टीफन मरांडी तीसरे स्थान पर खिसक गए।

