नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद में बीजेपी नेताओं की तुलना महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध में रचे चक्रव्यूह से कर दी.
By : DB News Update | Edited By- सुप्रिया
Delhi News: राहुल गांधी ने आगे चक्रव्यूह की तुलना करते हुए बीजेपी के चुनाव चिन्ह का जिक्र किया और कहा, “मैंने चक्रव्यूह के बारे में थोड़ी रिसर्च की तो मुझे पता चला कि चक्रव्यूह का एक और नाम होता है पद्मव्यूह (लोटस फॉर्मेशन). तो चक्रव्यूह कमल के आकार में होता है.
21वीं सदी में एक नया चक्रव्यूह तैयार हुआ है. वो भी कमल के आकार में है. उसका चिन्ह प्रधानमंत्री अपनी छाती पर लगा कर चलते हैं.” अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि जो अभिमन्यु के साथ हुआ वो हिंदुस्तान के साथ किया गया है. युवाओं, किसानों, माताओ-बहनों, छोटे और मध्यम व्यापारों के साथ भी बजट में वही किया गया जो अभिमन्यु के साथ चक्रव्यूह में किया गया था.
राहुल गांधी ने गिनाए आज के चक्रव्यूह
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संबोधन में पेपरलीक चक्रव्यूह, बेरोजगारी चक्रव्यूह कहते हुए युवाओं के साथ हुए धोखे की बात की. उन्होंने कहा कि सेना के जवानों को अग्निवीर के चक्रव्यूह में फंसाया गया.
राहुल गांधी ने कहा कि किसानों के लिए भी सरकार ने तीन कृषि कानूनों का चक्रव्यूह रचा. इसी के साथ राहुल गांधी ने आश्वासन देते हुए कहा कि उनकी सरकार आएगी तो इन चक्रव्यूहों को तोड़ा जाएगा.
नीतियों और आर्थिक दबाव में फंसे हैं युवा-किसान
राहुल ने कहा कि बजट में युवाओं, किसानों, महिलाओं, और छोटे-मध्यम व्यापारियों को ऐसी स्थिति में डाल दिया गया है, जहाँ वे नीतियों/आर्थिक दबावों के “चक्रव्यूह” में फँस गए हैं और उनके पास उससे निकलने का आसान रास्ता नहीं है यानी यह एक आलोचनात्मक टिप्पणी है, जो यह दर्शाती है कि बजट ने इन वर्गों की मदद करने के बजाय
उन्हें और ज्यादा मुश्किल या जटिल आर्थिक स्थिति में डाल दिया है.
‘मोनोपॉली बनाने की हो रही कोशिश’
राहुल गांधी ने कहा कि चक्रव्यूह को तीन ताकतें चला रही हैं. पहली जिसमें आर्थिक एकाधिकार बनाया जा रहा है, जिसमें दो लोगों को भारत की पूरी संपदा देने की साजिश की जा रही है.
पहली है आर्थिक ताकत, दूसरी है इंस्टीट्यूट की ताकत और तीसरी है राजनीतिक ताकत. ये तीनों चक्रव्यूह के केंद्र में हैं. इस बजट ने चक्रव्यूह की ताकत कम कर दी है. इस बजट की नीयत मोनोपॉली बिजनेस, राजनीतिक मोनोपॉली और डीप स्टेट और एजेंसी को मजबूत करने के लिए किया गया है.
बेरोजगारी और संस्थागत बाधाएं दूर की जाएंगी
राहुल गांधी ने अपने बयान में “चक्रव्यूह” शब्द का इस्तेमाल एक रूपक (metaphor) के तौर पर किया है. उनका मतलब यह था कि देश में कुछ जटिल समस्याएँ या व्यवस्थाएँ—जैसे आर्थिक असमानता, बेरोज़गारी, या संस्थागत बाधाएँ—ऐसी बन गई हैं जिनसे आम लोगों को निकलना मुश्किल हो रहा है. इस दौरान राहुल ने दावा किया ळै कि उनकी सरकार आएगी तो इन “चक्रव्यूहों” को तोड़ा जाएगा, इसका मतलब नीतियों में बदलाव लाया जाएगा. आम जनता के लिए बाधाएँ कम की जाएंगी और सिस्टम को सरल और अधिक न्यायपूर्ण बनाया जाएगा.
एक राजनीतिक रूपक देने की कोशिश
राहुल गांधी ने संसद में बीजेपी नेताओं की तुलना महाभारत का कुरुक्षेत्र युद्ध के “चक्रव्यूह” से करके एक राजनीतिक रूपक (metaphor) इस्तेमाल किया। इसका मतलब क्या होता है? इसके बारे में आपको जानकारी नहीं होगी तो हम बता देते हैं कि “चक्रव्यूह” महाभारत में एक जटिल युद्ध संरचना थी, जिसमें प्रवेश करना तो आसान था, लेकिन बाहर निकलना बेहद कठिन। इस संदर्भ में राहुल गांधी का इशारा आमतौर पर यह होता है कि बीजेपी ने राजनीतिक रूप से एक ऐसा जटिल तंत्र बना दिया है, विपक्ष या आम जनता के लिए उससे निकलना या उसे तोड़ना मुश्किल है, यह रणनीति विरोधियों को घेरने या फंसाने जैसी है.
राजनीतिक संदेश देने की कोशिश
इस तरह की तुलना करने से राहुल बीजेपी की नीतियों/रणनीतियों को “घेराबंदी” के रूप में दिखाना चाहते हैं, खुद को और विपक्ष को उस “चक्रव्यूह” में फंसा हुआ पक्ष बता रहे हैं और अप्रत्यक्ष रूप से यह भी संकेत देते हैं कि इसे तोड़ने के लिए खास रणनीति चाहिए. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि राजनीति में ऐसे पौराणिक उदाहरण अक्सर प्रतीकात्मक होते हैं—इनका उद्देश्य सीधे आरोप लगाने से ज्यादा एक मजबूत छवि (imagery) बनाना होता है, जिससे आम लोग बात को आसानी से समझ सकें।

