मध्य प्रदेश जबलपुर में सनातन धर्म महासभा के बैनरतले विगत 45 साल से निकाली जा रही श्रीराम शोभायात्रा, बस स्टैण्ड से सायं 6 बजे निकाली जाएगी भगवान श्रीराम की शोभायात्रा
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Ram Navami 2026 Religious Procession: मध्य प्रदेश जबलपुर में श्रीरामनवमी के पावन पर्व पर आज 27 मार्च 2026 शुक्रवार को सायं 6.00 बजे भव्य एवं दिव्य शोभायात्रा सनातन धर्म तिराहा पुराना बस स्टेंड से निकाली जाएगी. यह शोभायात्रा को हरी सनातन धर्म के ध्वजावाहक हम सभी के प्रेरणा स्त्रोत अनन्त श्री विभूषित श्रीमद्जगद्गुरु नृसिंहपीठाधीश्वर डॉ स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज के पावन संरक्षण में निकाली जाएगी. जिसमें संस्कारधानी के संत, धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी तथा सनातनी रामभक्तों की उपस्थिति रहेगी. यह शोभायात्र विगत 45 वर्ष से निकाली जा रही है. इस शोभायात्रा की शुरुआत साकेतवासी महामण्डलेश्वर स्वामी रामचन्द्रदास जी महाराज के सानिध्य में प्रारंभ हुई थी. इस परंपरा का निर्वहन साकेतवासी जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज भी करते रहे.
शोभायात्रा के उद्देश्य को चरितार्थ करती है यह कथा
बाल्मीकीय रामायण में कथा आती है कि जब मनुष्य लाचार हो जाए, समस्या का समाधान न मिल रहा हो तो संगठित हो जाएं, एक साथ बैठकर विचार करें तो भी परमात्मा की कृपा हो जाती है. जिस प्रकार से इंन्द्र, पवन देव, वरुण देव, अग्निदेव, वृहस्पति सारे गण और ऋषि-मुनिक रावण के आतंक से परेशान हो गए. उसके बाद सभी संगठित हुए और विचार-विमर्श शुरू कर दिया, तब भगवान स्वयं प्रकट हो गए. “एतस्मिन्नन्तरं विष्णुरुपयातो महाद्युति:।” भगवान विष्णु शंख, चक्र, गदा, पद्म, वनमाला विभूषित गरुण पर चढ़कर देवताओं की सभा में जमीन पर आ गए. क्योंकि समष्टि का निश्चय ही परमात्मा का संकल्प बनता है, सारे लोग एक जैसा निर्णय ले लें, एक जैसा सोचने लगें तो समझ लो परमात्मा का ही संकल्प है. उसी समय देवताओं ने कहा- महाराज आज हम सब आपको रावण का वध करने के लिए नियुक्त करते हैं.
“त्वां नियोक्ष्यामहे विष्णो लोकानां हितकाम्यया।‘’
हम सब आपसे प्रार्थना करते हैं कि-
मनुषं रूपमास्थाय रावणं जहि संगरे।
आप स्वयं मनुष्य बनकर करके रावण का वध करें. जब तक आप स्वयं मनुष्य नहीं बनेंगे, तब तक रावण नहीं मरेगा. जब तक आपका मनुष्य के रूप में अवतरण नहीं होगा और भगवान नारायण अपने रूप में रावण का वध नहीं कर सकते हैं. क्योंकि रावण ने वर मांगा है कि हम देवताओं के हाथों से न मरे और मनुष्य में इतनी शक्ति नहीं कि वह उसे मार सके तो फिर दोनों के बीच की बात बनी की भगवान मनुष्य बन जाएं और उनके हाथों से रावण से मृत्यु हो जाए. भगवान ने कहा कि चलो हम मनुष्य के रूप में जन्म लेंगे. “भयं त्यजत भद्रं व:’’ आप लोग भय छोड़ दो निश्चिंत हो जाओ.
‘’सपुत्रपौत्रं सामात्यं समन्त्रिज्ञातिबान्धवम्। हत्वा क्रूररं दुराधर्ष देवर्षीणां भयावहम्।।‘’
मैं पूरे परिवार के साथ रावण का वध करूंगा। देवता बड़े खुश हुए और प्रसन्नता से तालिया बज गईं.
आगे कथा आती है कि भगवान से वार्तालाप हुई कि आप कहां पैदा होंगे?
‘मानुष्ये चिन्तयामास जन्मभूमिमथात्मन:।‘’
भगवान ने सबसे पहले जन्मभूमि का चयन किया है. भगवान ने कहा अयोध्या हमारी जन्मभूमि होगी, पिता के रूप में उन्होंने दशरथ को पसन्द किया है. देवाताओं से भगवान ने कहा है किआप लोग निर्भय हो जाओ. हम महाराज दशरथ के घर अयोध्यापुरी में जन्म लेंगे. ऐसा कहकर भगवान अंतर्ध्यान हो गए.
कहां से शुरु होगी शाभोयात्रा
भगवान श्रीराम की शोभायात्रा श्री सनातन धर्म तिराहा से प्रारंभ होगी, जो नगर निगम चौक, श्याम टॉकीज, लॉर्डगंज, बड़ा फुहारा से कमानिया, कोतवाली होते हुए मिलौनिगंज स्थित गोविंदगंज रामलीला समिति प्रांगण में एक धर्मसभा के रूप में तब्दील हो जाएगी और यहीं शोभायात्रा का विश्राम होगा.
इन मंदिरों की झांकियां होंगी शामिल
शोभायात्रा में श्रीराममंदिर मदन महल, श्रीकृष्ण सनातन मंदिर, नृसिंह मंदिर गीताधाम सहित नगर की अनेकों धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक संस्थाओं, मठ मंदिरों द्वारा लगभग 75 आकर्षक सजीव झांकियां सम्मिलित रहेंगी. इन झांकियों में कई सजीव झांकियां शामिल होंगी. शोभायात्रा में बैण्ड दल, अश्वरोही दल, बग्घी, भजन एवं कीर्तन मंडली एवं इस्कॉन मंदिर की लगभग 200 भक्तों की हरे कृष्णा मंडली की विशेष भावभंगिमा प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहेगें.
समष्टि के निश्चय की परिकल्पना को साकार करें
सनातन धर्म महासभा के बैनर तले निकाली जाने वाली इस शोभायात्रा आप सभी सम्माननीय स्नेही सनातनी रामभक्त शामिल होकर समष्टि के निश्चय की परिकल्पना को साकार करें. जिससे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के प्राकट्य होने का एहसास हो सके और दिव्य भव्य शोभायात्रा में सपरिवार ईष्ट मित्रों सहित सम्मिलित होकर धर्म लाभ अर्जित करें.
श्रीराम जन्म स्तुति
भए प्रगट कृपाला दीनदयाला,
कौसल्या हितकारी ।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी,
अद्भुत रूप बिचारी ॥
लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा,
निज आयुध भुजचारी ।
भूषन बनमाला, नयन बिसाला,
सोभासिंधु खरारी ॥
कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी,
केहि बिधि करूं अनंता ।
माया गुन ग्यानातीत अमाना,
वेद पुरान भनंता ॥
करुना सुख सागर, सब गुन आगर,
जेहि गावहिं श्रुति संता ।
सो मम हित लागी, जन अनुरागी,
भयउ प्रगट श्रीकंता ॥
ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया,
रोम रोम प्रति बेद कहै ।
मम उर सो बासी, यह उपहासी,
सुनत धीर मति थिर न रहै ॥
उपजा जब ग्याना, प्रभु मुसुकाना,
चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै ।
कहि कथा सुहाई, मातु बुझाई,
जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥
माता पुनि बोली, सो मति डोली,
तजहु तात यह रूपा ।
कीजै सिसुलीला, अति प्रियसीला,
यह सुख परम अनूपा ॥
सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना,
होइ बालक सुरभूपा ।
यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं,
ते न परहिं भवकूपा ॥
दोहा:
बिप्र धेनु सुर संत हित,
लीन्ह मनुज अवतार ।
निज इच्छा निर्मित तनु,
माया गुन गो पार ॥
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