हिंदू धर्म में विवाह दोनों जोड़े के साथ परिवार वालों का भी मिलन होता है. विवाह में वर-वधू की कुंडली मिलान की परंपरा है. जिससे वैवाहिक जीवन के बारे में अनुमान लगाया जाता है.
Source : DB News Update
By : एस्ट्रोलॉजर पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Marriage Astrology: वैवाहिक कार्यक्रम प्रारंभ हो चुके हैं. ऐसे में हिंदू धर्म को मानने वाले लोग विवाह के पूर्व कुंडली का मिलान कराने के ज्योतिषी के पास पहुंच रहे हैं. क्योंकि यह पवित्र रिश्ता न केवल जन्म-जन्मांतर का है, बल्कि दो परिवारों के आपसी मिलन का भी है. यह परंपरा एक पवित्र कर्मकांड से जुड़ी हुई है. इसी वजह से शादी से पहले वर-वधू की कुंडली का मिलान कराने की परंपरा है. लेकिन कुंडली मिलान योग्य ज्योतिषी से ही कराएं तो बेहतर होगा. क्योंकि कई एस्ट्रोलाइजर को जन्म चक्र की पूरी जानकारी नहीं हो पाती है और कुंडली का ठीक ढंग से मिलान भी नहीं कर पाते हैं. जिसके कारण शादी की चर्चा कुंडली मिलान के साथ खत्म हो जाती है. इस समस्या में फंसने से पहले न केवल गुणों का मिलान ठीक ढंग से करा लें, बल्कि जन्म के समय के साथ जन्म स्थान तक सूर्य की आभा (किरणों) के पहुंचने का समय भी ज्योतिषीय गणना से एस्ट्रोलाइजर से निकलवा लें.
सूर्य की किरणें भी कुंडली को करती हैं प्रभावित
कुंडली मिलान की परंररा पौराणिक काल से चली आ रही है. कुंडली मिलान के वक्त कुल 36 गुणों को देखा जाता है. ताकि विवाह के बाद उनका वैवाहिक जीवन खुशमय, मधुर और दीर्घायु हो. इस 36 गुणों के मिलान को अष्टकूट मिलान भी कहा जाता है. कुंडली मिलान में जन्म स्थान तक सूर्य किरणों के पहुंचने का अहम रोल होता है. सूर्य किरणें न केवल ग्रहों में परिवर्तन कर देती हैं, कुंडली मिलान के समय गुणों पर भी असर डालती हैं.
गण मिलान क्यों है जरूरी?
अष्कूट मिलान की प्रक्रिया में ही गण मिलान को शामिक किया गया है. ज्योतिष शास्त्र में गुण मिलान का योगदान सिर्फ 1 गुण का ही है. मगर ज्योतिष नजरिये से यह काफी शक्तिशाली है. अगर किसी जोड़े का आपसी गण नहीं मिल रहा हैं तो, उनका वैवाहिक जीवन मतभेद, घमंड और द्वेष से भरा हो सकता है.
तीन प्रकार के होते हैं अष्टकूट मिलान
अष्टकूट मिलान में से एक सबसे जरूरी कारक गण मिलान है. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, गण मिलान के तीन प्रकार होते हैं. देव, मानव और राक्षस. अगर इनमें से एक भी गुण ना मिले तो वर-वधू का वैवाहिक जीवन में दिक्कतें आ सकती है.
क्या है गण मिलान?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तीन प्रकार के गण मिलान होते हैं और कुंडली मिलान के वक्त, वर-वधू के जन्म नक्षत्र के आधार पर गण तय किया जाता है.
- देव गण के लोग स्वभाव से शांत, विनम्र, दयालु और धार्मिक होते हैं.
- मानव गण के जातक व्यवहारिक सोच रखने वाले, सामाजिक और समझदार माने जाते हैं.
- वहीं राक्षस गण वाले व्यक्ति साहसी, आत्मविश्वासी और मजबूत निर्णय लेने की क्षमता वाले होते हैं.
- इन गुणों के अनुसार ही यह अनुमान लगाया जाता है कि दोनों जातकों का व्यवहार, विचार और वैवाहिक जीवन कैसा जाने वाला है.
अलग-अलग गण होने पर क्या असर पड़ता है ?
- किसी जोड़े का देव गण और मानव गण का मेल हो रहा है तो यह सामान्य रूप से ठीक होता है.
- अगर लड़के और लड़की का देव गण और राक्षस गण का मेल होता है तो यह संघर्षपूर्ण माना जाता है.
- मानव गण और राक्षस गण के मिलान वालों को भी रिश्ता सावधानीपूर्वक शुरू करना चाहिए.
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