श्राद्ध कर्म पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है इसके लिए तर्पण और पिंडदान सही जगह हो ये बहुत जरुर है.
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Shradh Kaha Nahi Kare: पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है. भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक पितरों को याद किया जाता है. इस दौरान हर दिन श्राद्ध करने का विधान है. लेकिन पूर्वज की आत्म तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म सही विधि और सही जगह पर करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं.
इसलिए श्राद्ध करने के लिए सही जगह का चुनाव करना बेहद जरुरी है. ऐसे में ध्यान रखें कि अपवित्र भूमि पर श्राद्ध न करें.
यहां बिल्कुल भी न करें श्राद्ध कर्म
देव स्थान
श्राद्ध कर्म देव स्थान पर कभी नहीं किया जाता है, क्योंकि पितर और देव कभी एक साथ नहीं पूजे जाते हैं. मंदिर के परिसर में श्राद्ध करने पर उसका फल प्राप्त नहीं होता न ही पितर उसे स्वीकार करते हैं.
श्मशान-
श्मशान को एक तीर्थ स्थान नहीं माना जाता, और श्राद्ध कर्म के लिए पवित्र व उपयुक्त स्थान की आवश्यकता होती. गरुड़ पुराण के अनुसार, श्मशान में नकारात्मक शक्तियां वास करती हैं और वातावरण अपवित्र होता है, ऐसे में पवित्र आत्मा की शांति के मार्ग में बाधा आ सकती है.
बंजर भूमि-
कांटेदार भूमि या बंजर भूमि पर श्राद्ध बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए. इससे पूर्वज नाराज हो जाते हैं.
खुले में शौच की जगह-
जहां लोग खुले में शौच करते हों वहां भूलकर भी श्राद्ध नहीं करना चाहिए. ऐसा करने पर श्राद्ध कर्ता को बुरे परिणाम भुगतने पड़ते हैं.
समय का रखे ख्याल
श्राद्ध कर्म कभी शाम के वक्त नहीं करना चाहिए. सुबह देवों का समय होता है और रात को नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है. ऐसे में दोपहर का समय श्राद्ध के लिए सबसे उपयुक्त समय है और श्राद्ध करने के लिए सबसे उपयुक्त जगह नदी तट, समुद्ध तट, तीर्थ क्षेत्र या फिर घर सही जगह है.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

