भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्तों को धन-धान्य से संपन्न करते हैं, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी।
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Mahesh Navami: जबलपुर.हर साल ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महेश नवमी (Mahesh Navami) मनाई जाती है। इस दिन लोग भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि, इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से सुख, शांति, धन और ज्ञान में वृद्धि होती है। इस वर्ष महेश नवमी 15 जून, शनिवार को है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी। तब से ही यह पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को महेश्वरी समाज के द्वारा बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। आइए जानते हैं महेश नवमी की तिथि, महत्व और इसकी पूजा विधि… यह भी पढ़े -क्यों मनाई जाती है धूमावती जयंती? जानें तिथि और पूजा मुहूर्त तिथि कब से कब तक नवमीं तिथि आरंभ: 15 जून, 2024 की सुबह 12 बजकर 03 मिनट से नवमीं तिथि समापन: 16 जून, 2024 की मध्यरात्रि 02 बजकर 32 मिनट तक है.
महेश नवमी के उपाय
- भगवान शिव को कच्चे चावल चढ़ाने से धन लाभ होता है।
- भगवान शिव को बेला के फूल चढ़ाने से सुंदर पत्नी मिलती है।
- शिवलिंग का अभिषेक गाय के घी से करने से कमजोरी दूर होती है।
- महादेव की पूजा हरसिंगार के फूलों से करें तो सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है ।
- कनेर के फूलों से भगवान शिव की पूजा करने से नए वस्त्र मिलते हैं।
- महादेव को जूही के फूल चढ़ाने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
- धतूरे के फूल से पूजा करने पर महादेव सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं।
- भगवान शिव को गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।
- शिवजी की पूजा चमेली के फूल से करने पर वाहन सुख मिलता है।
- शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से जीवन में सभी सुख मिलते हैं।
महेश नवमी के दिन भगवान शिव की पूजन विधि
- – इस दिन कमल पुष्पों से भगवान शिव की पूजा करें।
- – पूजा के दौरान शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करें।
- – शिव जी को पुष्प, बेल पत्र आदि चढ़ाएं।
- – शिवलिंग पर भस्म से त्रिपुंड लगाएं, जो त्याग व वैराग्य का सूचक है।
- – इसके अलावा त्रिशूल का विशिष्ट पूजन करें
- – महेश नवमी के दिन भगवान शिव की आराधना में डमरू बजाएं।
- – भगवान शिव के साथ-साथ मां पार्वती की भी पूजा करें।
- – शिव पावर्ती दोनों के पूजन से खुशहाल जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
मान्यता है कि भगवान महेश और माता पार्वती ने 72 क्षत्रियों को शाप से मुक्त किया था। उन्होंने कहा था, आज से तुम्हारे वंश पर हमारी छाप रहेगी और तुम माहेश्वरी कहलाओगे। इसलिए, यह त्योहार महेश्वरी समाज के लिए बहुत खास है। इस साल महेश नवमी जून में है। इस दिन जो भक्त शिव-पार्वती का पूजन करके व्रत करते हैं, उन्हें जीवन के सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। महेश नवमी के दिन व्रत रखने और शिव-पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और स्थिरता आती है। साथ ही मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा पुराणों के अनुसार, माहेश्वरी समाज के पूर्वज क्षत्रिय वंश के थे। लेकिन एक समय जब वे शिकार कर रहे थे, तब ऋषियों ने उन्हें श्राप दिया। उस समय भगवान शिव ने उन्हें ऋषियों के श्राप से मुक्त कर उनकी रक्षा की। साथ ही उन्हें हिंसा छोड़कर अहिंसा का मार्ग दिखाया था और इस समाज को अपना नाम दिया। इसके बाद माहेश्वरी समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म छोड़कर वैश्य समाज को अपनाया और तब ये इस समुदाय को माहेश्वरी समाज के नाम से जाना जाता है।
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