जबलपुर में 43 करोड़ का धान परिवहन घोटाला उजागर, राइस मिलर्स और नान कर्मचारियों की मिलीभगत करके आटो-आपे के फर्जी वाहन नंबर द्वारा धान का परिवहन दिखाया गया.
Source : DB News Update
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
MP Jabalpur News: मध्य प्रदेश के जबलपुर में 43 करोड़ का फर्जी धान परिवहन घोटाला उजागर हुआ है. इस मामले ने क्राइम ब्रांच जबलपुर ने कुल 28 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है. जिसमें राइस मिलर्स और नान के कर्मचारी शामिल हैं. दरअसल हाल ही में जबलपुर के पाटन से सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक अजय विश्नोई ने जिला कलेक्टर और प्रदेश शासन को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि जिले में फर्जी आरओ के जरिए करोड़ों का धान परिवहन कागजों पर किया गया है.
शिकायत पर जांच दल बिठाया गया तो पता चला कि मिलिंग के लिए आवंटित उपार्जित धान की फर्जी परिवहन के जरिए शासन को करोड़ों की चपत लगाई गई है. मामले की जांच में राइस मिलर्स मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से घोटाले को अंजाम दिया गया. इसके जरिए राइस मिलर्स द्वारा फर्जी वाहनों के नंबर से ट्रिप लगाकर धान का परिवहन कर उस धान को कहीं और बेचना पाया गया.
694 ट्रिप में लोडिंग से ज्यादा भरी धान
फर्जी धान परिवहन के जरिए राइस मिलर्स ने धान को खपाने की पूरी कोशिश की, उसने उन्होंने फर्जी वाहनों में क्षमता से ज्यादा धान को लोड कर फर्जी परिवहन दिखाया. जांच में खुलासा हुआ कि कुल 165 फर्जी वाहनों से 694 ट्रिप में 1 लाख 53 हजार क्विंटल धान का परिवहन किया गया. जिस वाहन की लोडिंग क्षमता 200 क्विंटल से ज्यादा नहीं थी. उसमें 400 क्विंटल धान का परिवहन दिखाया गया.
दोबारा जांच में खुला राज
मिली जानकारी के अनुसार भोपाल से मिले निर्देश पर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जिला आपूर्ति नियंत्रक नुजहत बकई को राइस मिलर्स को जांच का जिम्मा सौंपा था. लेकिन नुजहत बकई ने सभी 43 राइस मिलर्स से सांठगांठ कर उन्हें क्लीन चिट दे दी थी. जिसके बाद जांच पर कई सवाल खड़े हुए थे, इस मामले को लेकर विधायक अजय विश्नोई ने जब दोबारा जांच की मांग की तो पूरे मामले से पर्दा हटा. पता तो यह भी चला है कि आपूर्ति नियंत्रक ने बिना कलेक्टर की अनुमति के जांच रिपोर्ट भोपाल भेज दी. अब जब जांच दल की फिर से हुई जांच में 16 राइस मिलर्स पर एफआईआर हुई है तो ऐसे में आपूर्ति नियंत्रक की जांच पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
74 लोगों तक पहुंच चुकी है आंच
दो माह पहले जिला कलेक्टर दीपक सक्सेना ने धान के ऐसे ऐसे ही फर्जी आर ओ परिवहन मामले में जिले के बाहर के राइस मिलर्स और जबलपुर नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों कर्मचारियों समेत कुल 74 लोगों पर एफआईआर दर्ज की थी. जिला प्रशासन की एक के बाद एक ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद घोटालेबाज राइस मिलर्स और उनसे सांठगांठ करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया.
समिति के 4 कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज
इस मामले में सरकार को लगभग 43 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. जिसमें से 16 करोड़ रुपए की वसूली अधिकारी कर्मचारी से किया जाना है. जबलपुर के वर्तमान कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कर्मचारियों के खिलाफ नोटिस जारी किए हैं और उनकी चल अचल संपत्ति को कुर्क किया जा रहा है. इसी को बेचकर सरकार अपना नुकसान पूरा करेगी और किसानों को भुगतान करेगी. इस मामले में चार सहकारी समिति के कर्मचारियों को और अधिकारियों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं.
अधिकारी और सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगी धान खरीदी
जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा कि “पूर्व के अनुभव अच्छे नहीं हैं. इसलिए इस बार खरीदी में ज्यादातर स्वयं सहायता समूह को आगे लाया जा रहा है, उनकी ट्रेनिंग की जा रही है. खरीदी का पूरा काम सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगा. पहले स्तर पर सर्वेयर, नोडल ऑफिसर और सीसीटीवी कैमरे के बावजूद भी दूसरे अधिकारियों की भी ड्यूटी लगा रहे हैं. जो इस पूरी धान खरीदी को अपने निगरानी में करवाएंगे. धान खरीदी की रिपोर्ट प्रतिदिन तैयार की जाएगी.”
सरकारी घाटे या नुकसान को इसी तरीके से अधिकारी कर्मचारियों के व्यक्तिगत चल अचल संपत्ति के माध्यम से बेचकर वसूला जाएगा. तो दूसरे अधिकारी कर्मचारियों में भी इस बात की दहशत होगी कि यदि वे गड़बड़ करते हैं तो कल इसी तरह की कार्यवाही उनके खिलाफ भी हो सकती है.

