भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अपने क्रू मेंबर के साथ धरती पर लौट आए हैं. स्पेस स्टेशन में 18 दिन रहकर लौटे शुभांशु, 10 दिन के आइसोलेशन के बाद वे नॉर्मल उनका सामान्य जीवन शुरू होगा.
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By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Shubhanshu Shukla Return Axiom-4 Updates: शुभांशु शुक्ला सहित चार एस्ट्रोनॉट स्पेस स्टेशन में 18 दिन रहने के बाद पृथ्वी पर लौट आए हैं. करीब 23 घंटे के सफर के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की आज यानी 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर लैंडिंग हुई. इसे स्प्लैशडाउन कहते हैं. चारों एस्ट्रोनॉट एक दिन पहले यानी सोमवार की शाम 4:45 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से पृथ्वी के लिए रवाना हुए थे.
शाम 4:01 बजे ISS पहुंचे थे सभी एस्ट्रोनॉट
सभी एस्ट्रोनॉट 26 जून को भारतीय समयानुसार शाम 4:01 बजे ISS पहुंचे थे. एक्सियम मिशन 4 के तहत 25 जून को दोपहर करीब 12 बजे ये रवाना हुए थे. स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से जुड़े ड्रैगन कैप्सूल में इन्होंने कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी थी.
41 साल बाद कोई भारतीय अंतरिक्ष में गया
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और भारतीय एजेंसी इसरो के बीच हुए एग्रीमेंट के तहत भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को इस मिशन के लिए चुना गया था. शुभांशु इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जाने वाले पहले और स्पेस में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं. इससे 41 साल पहले राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत यूनियन के स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष यात्रा की थी.
शुभांशु का ये अनुभव भारत के गगनयान मिशन में काम आएगा. ये भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य भारतीय गगनयात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और सुरक्षित रूप से वापस लाना है. इसके 2027 में लॉन्च होने की संभावना है. भारत में एस्ट्रोनॉट को गगनयात्री कहा जाता है. इसी तरह रूस में कॉस्मोनॉट और चीन में ताइकोनॉट कहते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभांशु की वापसी पर स्वागत किया
– मैं पूरे देश के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का उनकी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा से पृथ्वी पर वापसी के लिए स्वागत करता हूं. शुभांशु ने अपने समर्पण, साहस से अरबों सपनों को प्रेरित किया है. यह हमारे अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन- गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है.
17 अगस्त तक भारत लौट सकते हैं शुभांशु
शुभांशु 17 अगस्त तक भारत लौट सकते हैं. अंतरिक्ष यात्रियों को लैंडिंग के बाद मेडिकल जांच और रिहैबिलिटेशन के लिए आमतौर पर सात दिन लगते हैं, ताकि वे पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में फिर से ढल सकें. इसके बाद ही शुभांशु भारत लौटेंगे.
प्रशिक्षण को सुरक्षित करने के लिए 5 अरब रुपये का भुगतान
अंतरिक्ष में जाने की तैयारी के लिए कई परीक्षण कर रही इसरो ने ग्रुप कैप्टन शुक्ला के लिए एक्स-4 पर एक सीट और उनके प्रशिक्षण को सुरक्षित करने के लिए 5 अरब रुपये (59 मिलियन डॉलर; 43 मिलियन पाउंड) का भुगतान किया है. उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों के भीतर, ग्रुप कैप्टन शुक्ला के पास भारत के लिए एक संदेश था. उन्होंने कहा, “हम 41 साल बाद अंतरिक्ष में वापस आए हैं और यह कितना अद्भुत सफर रहा है.”
उन्होंने ने यह दिया था संदेश
“इस समय हम 7.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं. मेरे कंधे पर भारतीय ध्वज है। यह अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष यान (आईएसएस) की मेरी यात्रा की शुरुआत नहीं है, बल्कि भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान की शुरुआत है. मैं अपने सभी साथी भारतीयों को इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करता हूं और गर्व और उत्साह महसूस करता हूं.”
एक सहयोगात्मक दृष्टि से उड़ान भरी गई
ह्यूस्टन स्थित निजी कंपनी एक्सिओम स्पेस द्वारा संचालित वाणिज्यिक उड़ान एक्स-4 पर आईएसएस की यात्रा नासा, भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और स्पेसएक्स के बीच एक सहयोग है.
इसके चार सदस्यीय दल में पोलैंड के स्लावोज़ उज़्नान्स्की-विस्निव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू भी शामिल हैं. ये अंतरिक्ष यात्री चार दशकों से अधिक समय बाद अपने-अपने देशों को अंतरिक्ष में वापस ले जा रहे हैं. बुधवार को प्रक्षेपण से पहले अंतरिक्ष यात्रियों ने कई सप्ताह क्वारंटाइन में बिताए. इसी के साथ भारत का प्रतिनिधित्व भी हमें देखने को मिल रहा है. जिससे भारत का नाम उन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जा रहा है. जिसकी अपेक्षा भारत का हर नागरिक कर रहा है.

