नवरात्रि में कलश स्थापना के साथ शुरू है आध्यात्मिक प्रकल्प, साधना में लीन हैं संत
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Kalidham JBP Shardiya Navratri : आश्विन महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का त्योहार प्रारंभ है. इस दौरान प्रत्येक देवी मंदिर में आध्यात्मिक साधना के प्रकल्प चल रहे हैं. मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक ऐसी काली मां की मूर्ति विराजमान है, जिसका दर्शन करने मात्र से भक्तों के शरीर में आध्यत्मिक ऊर्जा का संचार होने लगता है. नर्मदा के उत्तर तट भटौली गौरीघाट पर स्थित यह मंदिर अपने आप में अनोखा है. क्योंकि इस मंदिर में प्रवेश करने से पहले बब्बर शेर के दर्शन होंगे और शेर के मुख से ही गुजरना होगा. इसके बाद ही माता रानी काली जी के दर्शन होंगे. यहां प्रत्येक नवरात्रि में तंत्र-मंत्र की साधना संतों के द्वारा की जाती है. जिनका दर्शन करने के लिए बड़ी दूर से भक्त दौड़े चले आते हैं.

दर्शनीय है कलश स्थापना
शारदीय नवरात्रि के अवसर पर मंदिर के अंदर कलश स्थापना की जाती है. जहां सैकड़ों की संख्या में कलश एक साथ जलाए जाते हैं. उनकी देखरेख साधक संत स्वयं करते हैं. मान्यता है कि यहां इतनी संख्या में कलश स्थापित किए गए हैं, जिनका दर्शन मात्र से भक्तों के पाप नष्ट हो जाते हैं.
एक अक्टूबर तक कलश प्रज्वलन के होंगे दर्शन
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत सोमवार 22 अक्टूबर से हो रही है, जिसका समापन 1 अक्टूबर 2025 को होगा. इस दौरान कालीधाम मंदिर के अंदर स्थापित कलश प्रज्वलन का दर्शन लाभ भक्तों को मिलता रहेगा. वहीं 2 अक्टूबर को विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा. इसी दिन मां दुर्गा के साधना प्रकल्प का विसर्जन भी हो जाएगा.
हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण त्योहारों में एक है नवरात्रि
शारदीय नवरात्रि मां भवानी के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. नवदिवसीय नवरात्रि में नौ दिनों का व्रत रखने का भी एक अलग महत्व है, जिसमें कई नियमों का पालन करना पड़ता है. व्रतधारी भक्त यदि कालीधाम भटौली में स्थापित कलश और काली मां का दर्शन प्राप्त करता है तो उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है. इसके लिए व्रतधारियों को साधना स्थल जाने से पहले साधक बनकर जाएं. इसके लिए कई प्रकार के नियम बतलाए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी है.
खंडित हो सकता है नवरात्रि में व्रत
क्या करें
- नवरात्रि में घर की साफ-सफाई अवश्य रखना चाहिए. खासकर पूजाघर की सफाई जरूर कर लें.
- नवरात्रि में पूजा सामग्री एकत्रित करके रखें. पूजा में हो सके तो नए वस्त्रों का ही प्रयोग करें.
- कलश स्थापना जरूर करें. कलश में जल, सुपारी, दूर्वा और फूल लगाकर ऊपर नारियल रखें.
- नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का संकल्प लें. इससे घर की सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.
- नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करें और मंत्र जाप करें.
- नौ दिनों तक सुबह-शाम आरती करें.
- व्रत में केवल सात्विक आहार ही लें. आप कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, आलू और फल-जूस का सेवन कर सकते हैं.
- व्रत के भोजन में साधारण नमक के बजाय सेंधा नमक का उपयोग करें.
क्या नहीं करें
- तामसिक भोजन पूरी तरह से त्याग दें. मांसाहारी भोजन, लहसुन- प्याज का सेवन न करें.
- व्रत के दौरान सिगरेट, शराब और तंबाकू का सेवन न करें.
- नवरात्रि के दिनों में बाल-दाढ़ी और नाखुन न काटें.
- यदि व्रत करते हैं तो दाल या अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए.
नवरात्रि में 9 दिनों के व्रत का महत्व
- शास्त्रों में कहा गया है कि, उपवास या व्रत हमारे मन और आत्मा को पवित्र बनाता है. इससे नकारात्मक विचार कम होते हैं और साधना में एकाग्रता बढ़ती है. इसलिए भी नवरात्रि के पवित्र समय में लोग व्रत रखते हैं.
- धार्मिक महत्व के साथ ही नवरात्रि में व्रत रखने वालों के लिए स्वास्थ्य लाभ भी बताए गए हैं.
- नवरात्रि में 9 दिनों के व्रत के दौरान सात्विक आहार लिया जाता है, जिससे शरीर की शुद्धि होती है और पाचन तंत्र को आराम मिलता है. इससे शरीर अच्छे से डिटॉक्स और रिबूट भी होता है.
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