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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > “अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भी शारदीय नवरात्र पर लहराती रही धर्म ध्वजा’’
Religion

“अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भी शारदीय नवरात्र पर लहराती रही धर्म ध्वजा’’

DB News
Last updated: 26/09/2025 9:55 PM
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संस्कारधानी जबलपुर में नवरात्र की धूम, विजयदशमी तक जारी रहेगा उत्सव, देवी आराधना में लीन है भक्त

By : DB News Update  | Edited By : प्रिंस अवस्थी

Contents
संस्कारधानी जबलपुर में नवरात्र की धूम, विजयदशमी तक जारी रहेगा उत्सव, देवी आराधना में लीन है भक्तदेवी मंदिरों में मनौती मांगने वालों की संख्या ज्यादादेवी प्रतिमाएं आकर्षण का केन्द्र बनींयहां विराजमान हैं देवी प्रतिमाजगह-जगह चल समारोहविसर्जन की नई परंपरा की हुई शुरुआत

Durga Puja 2025: शारदीय नवरात्रि की संस्कारधानी जबलपुर में चारों तरफ धूम है. शहर के हर गली मोहल्ले में महारानी देवी की प्रतिमा स्थापित की गई है. हलांकि संस्कारधानी जबलपुर में भगवती मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने की परंपरा वर्षों पुरानी है, वह परंपरा आज भी निरंतर जारी है. संस्कारधानी में अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भी भगवती मां दुर्गा के प्रति आस्था नहीं डिगी. अंग्रेजी हुकूमत का झंडे के आगे मां दुर्गा विसर्जन की फोटो सोशल मीडिया में वायरल हो रही है. इससे साफ जाहिर होता है कि जबलपुर में अंग्रेजों के शासनकाल में भी मां दुर्गा की धर्म ध्वजा लहराती रही. अभी वर्तमान में सुनरहाई-नुनहाई, तमरहाई, कोतवाली, गढ़ा, गोरखपुर, रांझी, गोहलपुर, आधारताल, विजय नगर और गौरीघाट में अलग-अलग रूपों में देवी प्रतिमा स्थापित की गई हैं. कहीं मां दुर्गा का विशाल स्वरूप तो कहीं काली मां के भव्य स्वरूप के दर्शन हो रहे हैं. यह शहर शक्ति को मानने वाला है, तभी तो अंग्रेजी हुकूमत के समय भी मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना के कई सुबूत देखने को मिल रहे हैं. दैवीय शक्ति को मानने वाले भक्त निस्वार्थ भाव से सेवा के लिए हमेशा तत्पर दिखाई पड़ते हैं. इसी कारण हर देवी पंडाल में आए दिन भण्डारे का आयोजन देखने को मिलता है. जहां दूर-दराज से आने वाले भक्तों को उस भण्डारे में प्रसाद आसानी से मिल रही है. देवी दर्शन के बाद जो भी भक्त घर वापिस जाता है, उसे घर में भोजन बनाने और खाने की जरूरत ही नहीं पड़ रही है.

देवी मंदिरों में मनौती मांगने वालों की संख्या ज्यादा

ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में नवरात्रि के पर्व पर मनौती (मन्नत) मांगने वालों की संख्या ज्यादा है. भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए जगह-जगह जतन किए जा रहे हैं. नीबू, लौंग, नारियल और श्रंगार की सामग्री लेकर कई भक्त देवी मंदिर पहुंच रहे हैं. इस प्रकार की पूजा ग्रामीण क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही है. लेकिन यह परंपरा कई शहरी देवी मंदिरों में भी देखने को मिल रही है.

देवी प्रतिमाएं आकर्षण का केन्द्र बनीं

आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हुए नवरात्रि के पर्व पर शहर भर में देवी प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं. दुर्गा पूजा पण्डाल में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप दिखाई पड़ रहे हैं. उन पण्डालों की आकर्षक विद्युत सज्जा के साथ-साथ रखी गईं प्रतिमाएं इतनी मनमोहक हैं कि उनका दर्शन करने के लिए हर कोई पण्डाल तक खिंचा चला आ रहा है.

यहां विराजमान हैं देवी प्रतिमा

सुनरहाई- यहां देवी प्रतिमा अंग्रेजी शासन काल के पहले से रखे जाने का दावा किया जा रहा है. सोशल मीडिया में अंग्रेजी हुकूमत के समय के फोटोग्राफ भी प्रसारित किए जा रहे हैं. उस परंपरा का निर्वहन आज भी सुनरहाई के भक्त कर रहे हैं.

नुनहाई-इस देवी प्रतिमा के स्थान पर कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिलता है. तंगगली में रखी जाने वाली यह प्रतिमा भक्तों के लिए आकर्षण का केन्द्र है. यह देवी प्रतिमा की साज-सज्जा पूरी तरह से सोने-चांदी के शुद्ध आभूषणों से करने का दावा यहां के भक्त करते हैं.

सोशल मीडिया में वायरल फोटो का कैप्शन- “ये जबलपुर शहर के सराफा बाज़ार के सुनरहाई में स्थापित की जाने वाली माँ दुर्गा की प्रतिमा के चल समारोह का लगभग सौ साल से भी ज़्यादा पुराना फोटो है, जबलपुर के ज्ञात इतिहास की सबसे पुरानी समिति है सुनरहाई दुर्गा पूजा समिति। ध्यान देने वाली बात ये है कि माँ की मूर्ति के ऊपर ब्रिटिश यूनियन जैक 🇬🇧 लहरा रहा है। समय के अब इतना बदलाव हुआ है कि पहले दुर्गा माँ के साथ ब्रिटेन की राजमाता का यूनियन जैक चलता था अब भारत माता का तिरंगा  🇮🇳 चलता है।‘’

पड़ाव वाली महारानी- यहां रखी जाने वाली काली माई की प्रतिमा अभी कुछ दिनों में ही जबलपुर महारानी के नाम से मशहूर हो गई. इस प्रतिमा का विसर्जन अंतिम समय में किया जाता है. जिसका स्वागत करने के लिए पड़ाव से लेकर गौरीघाट तक भण्डारे का आयोजन किया जाता है और जगह-जगह स्वागत पाण्डाल लगाए जाते हैं.

जगह-जगह चल समारोह

देवी प्रतिमा विसर्जन का भी एक अलग रोमांच है. शहर के पुराने मुख्य बस स्टैण्ड तीनपत्ती से देवी प्रतिमाओं का विसर्जन जुलूस निकला जाता है. जिसमें शहर की मुख्य देवी प्रतिमाओं को नंबर के हिसाब से लगाई जाती हैं और उन्हें चल समारोह के रूप में हनुमानताल तक निकाला जाता है. जहां सभी देवी प्रतिमाओं का विसर्जन होता है.

विसर्जन की नई परंपरा की हुई शुरुआत

नर्मदा जल को स्वच्छ रखने के उद्देश्य से नगर निगम ने नर्मदा तट गौरीघाट और तिलवाराघाट पर विसर्जन कुण्ड का निर्माण कराया है. जहां शहर भर की देवी प्रतिमाएं पहुंचती हैं और वहां उनका विसर्जन किया जाता है. यह एक नई परंपरा की शुरुआत जबलपुर से शुरू हुई है.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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