ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कन्या पूजा को करने से नवग्रह प्रसन्न होते हैं. आइए जानते हैं 2025 में कन्या पूजन कब है?
By :ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Shardiya Navratri Kanya Puja: शारदीय नवरात्रि 2025 का आज चौथा दिन है. आज के दिन माता कूष्मांडा की पूजा करने का विधान है. नवरात्रि के मौके पर देवी पाण्डालों पर भक्ति की गंगा बह रही है. हर तरफ माता रानी के भक्त मातारानी की भक्ति में लीन हैं. नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन करने का विधान है. इन दो दिनों में छोटी-छोटी कन्याओं का पूजन किया जाएगा. क्योंकि इन्हें मां दुर्गा का स्वरूप माना गया है. उनकी पूजा अर्चना के साथ भोजन और उचित दक्षिणा दी जाएगी. इसके पीछे प्रमुख कारण शायद आप लोगों को पता नहीं होगा. लेकिन ज्योतिषशास्त्र में कन्या पूजन का बड़ा ही महत्व बतलाया गया है. यदि आप भी देवी के उपासक हैं तो कन्यापूजन अवश्य करें.
किससे है कन्या पूजन का संबंध?
ज्योतिषशास्त्र में बतलाया गया है कि नवरात्रि में सही तरीके से यदि कन्या पूजन किया जाता है तो जिन भक्तों के ग्रह नाराज हैं या फिर विपरीत हैं. उन्हें कन्या पूजन और भोजन कराने से अपने नवग्रहों को खुश किया जा सकता है. क्योंकि कन्या पूजन धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव, सुख, समृद्धि और यश प्राप्त करने का एक अच्छा माध्यम है.
आइए जानते हैं कन्या पूजन के बारें में…
| पूरी- कन्या पूजन के दौरान जब आप पूरी बनाते हैं तो वो बुध (Jupiter) का प्रतीक होता है. |
| आटा- आटे का हलवा सूर्य (Sun) का प्रतीक है. |
| चने-काले चने शनि (Saturn) का प्रतीक होते हैं. |
| जल-जब हम जल से कन्याओं के पैर धोते हैं, वो चंद्रमा (Moon) का प्रतीक होता है. |
| मौली-कन्याओं के हाथ में मौली पहनते हैं, वो मंगल (Mars) का प्रतिनिधित्व करता है. |
| जौ- इसके बाद जब हम कन्याओं को जौ देते हैं, वो राहु (Rahu) का प्रतीक होता है. |
| चूड़ियां-कन्याओं को चुड़ियां देते हैं, वो बुध (Mercury) का प्रतिनिधित्व करता है. |
| बिंदी-जब आप कन्याओं को बिंदी और पैसे देते हैं, तो ये शुक्र (venus) का प्रतीक होता है. |
| चरण-वही जब आप कन्याओं के पैर छूते हैं तो इसे केतु की स्थिति में सुधार आता है. |
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक कन्या पूजन को सही विधि से करने पर हम अपने 9 ग्रहों को एक्टिव करने का काम करते हैं और मां दुर्गा की कृपा पाते हैं.
कब है कन्या पूजन?
अष्टमी तिथि
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि को कन्या पूजन का विशेष महत्व बतलाया गया है. इस दिन कन्याओं को माता का स्वरूप मानकर उन्हें भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा देकर विदा करें. जिससे उनका मन प्रसन्न रहे और अपको आशीर्वाद प्रदान करें.
नवमी तिथि
बहुत से लोग कन्या पूजन नवमी तिथि को भी करते हैं. नवमी तिथि शक्ति साधना का अंतिम चरण माना गया है. नवमी तिथि के दिन भी कई जगह छोटी-छोटी कन्याओं को भोजन कराने का विधान है.
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