गौरीघाट, बस स्टैण्ड और तीन पत्ती के रैन बसेरा की हालत खराब, कहीं लगे ताले, कहीं दिखी जिम्मेदारों की लापरवाही
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Rain Basera Jabalpur: मौसम विभाग ने हाड़ कांपने वाली ठंड के संकेत दे दिए हैं.बादल छंटने के बाद तुरंत ठंड अपना असर दिखाना प्रारंभ कर देगी. इससे निपटने के लिए नगर निगम के पास अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है. शहर के रैन बसेरा जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं. जिसके कारण बेसहारा खुलेआसमान के नीचे रहने मजबूर हैं. वहीं गलाव से बचने के लिए लकड़ी की व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है. नगर निगम द्वारा शहर में गरीब बेसहारा व बाहरी जरूरतमंद व्यक्तियों के ठहरने के लिए 8 रैन बसेरा संचालित किए जा रहे हैं. इसके बावजूद भी शहर के बस स्टाप, चौराहे और फुटपाथ पर खुले आसमान के नीचे बेसहारा सोने मजबूर हैं. दिन-प्रतिदिन ठंड का असर बढ़ रहा है, बर्फीली हवाएं लोगों को ठिठुराने लगी हैं. ऐसे में अब रैन बसेरा की जरूरत महसूस होने लगी है, लेकिन शहर के अिधकांश रैन बसेरा जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं. जिसके कारण बेसहारा खुले आमसान के नीचे रात गुजारने मजबूर हैं, उनके लिए कहीं भी न तो अलाव की व्यवस्था है और न ही भोजन की व्यवस्था की गई है.
ठंड से कंपकपा रहे गरीब
नर्मदा तट गौरीघाट, तिलवाराघाट सहित शहर के मालगोदाम, इंदिरा मार्केट के फुटपाथ, हाईकोर्ट के आसपास, तीन पत्ती बस स्टैंड सहित मेट्रो बस स्टॉप के आस-पास खुले आसमान के नीचे कई गरीब रात गुजारने मजबूर हैं. वे ठंड से कंपकंपा रहे हैं, इस ठंड के बीच बेसहारा लोगों को रैन बसेरा का सुख नहीं मिल रहा है.
गंदे बिस्तर, फटी रजाई-कंबल यहां की पहचान
शहर में जितने भी रैन बसेरा संचालित हैं, उनमें गंदे बिस्तर, फटी रजाई-कंबल पहचान बन चुके हैं. लेडी एल्गिन चिकित्सालय, सेठ गोकुलदास धर्मशाला, मेडिकल और तिलवारा रैन बसेरा के अलावा जितने भी रैन बसेरा हैं, उनमें पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. मेडिकल और तिलवारा में मजबूरीवश जरूरतमंद, बाहरी व्यक्ति व बेहसारा लोग रुक भी रहे हैं, लेकिन अन्य रैन बसेरों की स्थिति और अव्यवस्थाओं को देखते हुए बेसहारा गरीब रुकना भी पंसद नहीं कर रहे हैं.
हर रैन बसेरा की स्थिति खराब
गौरीघाट-
यहां का रैन बसेरा जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है, इमारत की मरम्मत नहीं कराए जाने के कारण छत से बारिश का पानी टपकता था, अब तो प्लास्टर उखड़कर गिरने लगा है. इसकी जर्जर स्थिति को देखते हुए नगर निगम के अधिकारियों ने रैन बसेरा में ताला लगा दिया है. अब गौरीघाट के नीचे जरूरतमंद बेसहारा खुले आसमान के नीचे रात गुजारने मजबूर हैं.
बस स्टैण्ड तीन पत्ती-
वर्षों पुराने बस स्टैण्ड की बिल्डिंग में रैन बसेरा का संचालन शुरू हुआ था, लेकिन रैन बसेरा में सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गईं और समय के साथ रैन बसेरा की हालत जर्जर स्थिति में पहुंच गई. यहां 3-4 साल से ताला लगा हुआ है. संभवत: यहां का रैन बसेरा बंद कर दिया गया है. इसके एवज में कहीं दूसरी जगह रैन बसेरा की सुविधा मुहैया नहीं कराई गई है.
तिलवाराघाट-
यह रैन बसेरा नशा करने वालों के चंगुल में है. यहां शराब, गांजा पीने वालों का डेरा जमा रहता है. अधिकांशत: इस रैन बसेरा में ताला ही लगा रहता है. जिसके कारण नर्मदा घाट पर गरीब असहाय लोग खुले आसमान के नीचे सोने मजबूर हैं.
मेडिकल कॉलेज-
यहां के रैन बसेरा में दबंगों का कब्जा है, यहां केवल उन्हीं लोगों को रुकने और भोजन की सुविधा मिलती है, जिनकी सांठगांठ है या फिर किसी जान-पहचान वाले से संपर्क करने के बाद रैन बसेरा पहुंचता है. इसके अलावा मरीज के परिजनों को खुले आसमान के नीचे ही सोना पड़ रहा है.
क्षेत्रीय बस स्टैण्ड दमोह नाका –
यहां के रैन बसेरा में आटो-आपे वालों का कब्जा रहता है. रैन बसेरा में बहुत कम लोग पहुंच पाते हैं, क्योंकि उन्हें रुकने के लिए मौके पर कोई जिम्मेदार मिलता ही नहीं है. नगर निगम के अिधकारियों ने विजिट कर कभी उसका निरीक्षण तक नहीं किया है.
Source : DB News Update

