MP के सतना स्थित चित्रकूट धाम में लाखों श्रद्धालुओं ने दीपदान किया. दीपावली पर दीपदान करने का यहां विशेष महत्व है.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP chitrakoot Diwali: मध्य प्रदेश के सतना जिला स्थित चित्रकूट धाम में आस्था के अनेक रंग देखने को मिले. एक ओर जहां पूरे देश में दीपावली के दिन दीपोत्सव की धूम रही, वहीं चित्रकूट धाम में दिवाली के दिन श्रद्धालु भगवान श्रीराम की भक्ति के रंग में रंगे नजर आए. देशभर से करीब 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे और दिवाली के मौके पर सोमवार रात चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के तट पर ‘दीपदान’ किया. मान्यता है कि दिवाली के दिन चित्रकूट में दीपदान का विशेष महत्व है.
शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि भगवान राम, पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ यहां 14 साल के वनवास काल में से लगभग 11 साल चित्रकूट धाम में बिताए हैं, जो मध्यप्रदेश के सतना जिले और उत्तर प्रदेश के कर्वी क्षेत्र तक फैला है और देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है. ‘दीपदान’ एक अनुष्ठान है जिसमें भक्त भारत में पवित्र नदियों पर तेल के दीपक (दीये) जलाते हैं.
लाखों ने लगाई आस्था की डुबकी
चित्रकूट में पांच दिवसीय वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है. जिसमें करीब 25 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी के पवित्र जल में डुबकी लगाई और आने वाले दो दिनों में और भी श्रद्धालुओं के स्नान कररने की संभावना जताई जा रही है.
कामतानाथ स्वामी की परिक्रमा लगाते हैं श्रद्धालु
मेला क्षेत्र में प्रशासनिक अधकारियों की ड्यूटी लगाई गई है. इन्हीं प्रशासनिक अधिकारियों में हरिशंकर बड़गैया से इस संबंध में जब पूछा गया कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं के आस्था का सबसे बड़ा महत्व क्या है? तो उन्होंने बतया कि चित्रकूट के 10 किलोमीटर लंबे हिस्से में श्रद्धालु डेरा डाले हुए हैं और इलाके में पुलिस की कड़ी मौजूदगी है. मध्यप्रदेश में मंदाकिनी नदी के 70 घाट हैं, जबकि अन्य उत्तर प्रदेश से सटे कर्वी इलाके में स्थित हैं. चित्रकूट जाने वाले तीर्थयात्री लगभग पांच किलोमीटर की परिक्रमा भी करते हैं, जिसमें से लगभग तीन किलोमीटर मध्यप्रदेश में पड़ता है.
आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम
चित्रकूट का दीपदान न सिर्फ महोत्सव है, बल्कि आस्था और भक्ति का अद्भुत समागम है. जिस प्रकार से यहां भगवान राम ने पत्नी सीता और भाई के लक्ष्मण के साथ वनवास के 11 साल बिताए थे. उसी प्रकार कई श्रद्धालु रामघाट में रात्रि के समय त्याग और तपस्या की दृष्टि से रात्रि विश्राम भी करते हैं. यहां की प्राकृतिक सुंदरता चित्रकूट को और भी ज्यादा खास बनाती है.

