मकर संक्रांति 2026 पर षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है. इस दिन स्नान, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है और सूर्य उपासना से सुख-समृद्धि मिलेगी.
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By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Makar Sankranti 2026: सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति को सूर्य के राशि परिवर्तन को ही प्रमुख माना गया है. इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और 2026 में यह पर्व 14 जनवरी, बुधवार को मनाया जाएगा. हिं दू पंचांग के अनुसार इस बार मकर संक्रांति पर भगवान विष्णु को समर्पित है और षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है.
मान्यता है कि इस विशेष योग में किया गया स्नान, दान और पूजा कई गुना पुण्य प्रदान करता है.जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से व्रत रखता है और सही चीजों का दान करता है, उस पर लक्ष्मी-नारायण की विशेष कृपा बनी रहती है. पैसों से जुड़ी परेशानी, रुका हुआ काम और जिंदगी की उलझनें दूर होने लगती हैं. षटतिला एकादशी को तिल से जुड़ा पर्व माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन तिल का दान करने से पुराने पाप कटते हैं और लाइफ में पॉजिटिव बदलाव आते हैं. पूजा के बाद किया गया दान सीधे भगवान विष्णु तक पहुंचता है और उसका फल कई गुना होकर मिलता है.
मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इसी के साथ सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जिसे देवताओं के दिन की शुरुआत कहा जाता है. इस दिन से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों पर लगी रोक भी समाप्त हो जाती है.
2026 में इसी दिन षटतिला एकादशी होने से इसका आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक शक्तिशाली माना जा रहा है.
शुभ मुहूर्त और पुण्य काल
पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी 2026 को दोपहर 03:13 बजे सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा.
पुण्य काल: 03:13 बजे से 05:45 बजे तक
महापुण्य काल: 03:13 बजे से 04:58 बजे तक
इस दौरान स्नान, दान और पूजा करना अत्यंत लाभकारी बताया गया है.
कैसे करें पूजा
- मकर संक्रांति पर सूर्य देव और षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है.
- सूर्योदय से पहले काले तिल और गंगाजल मिले जल से स्नान करें.
- तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें.
- “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें.
- भगवान विष्णु को तिल से बने लड्डू या व्यंजन का भोग लगाएं.
दान का विशेष महत्व
इस दिन खिचड़ी, काला तिल, गुड़, ऊनी कपड़े और कंबल का दान करना बेहद शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाता है.
तिल का दान
तिल का दान इस दिन विशेष रूप से महत्व रखता है. तिल को शुभ और पवित्र माना जाता है और इस दिन तिल का दान करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है. तिल को जल, मिठाई या किसी भी रूप में दान किया जा सकता है. तिल का दान करने से पुण्य मिलता है.
गर्म कपड़े का दान
गर्म कपड़ों का दान करने की भी परंपरा है. खासकर सर्दी के मौसम में यह दान और भी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. जो लोग गरीब होते हैं या जिनके पास ठंड से बचने के लिए पर्याप्त कपड़े नहीं होते, उन्हें गर्म कपड़े देने से उनके जीवन में समृद्धि और सुख-शांति का वास होता है.
अनाज का दान
अनाज का दान भी इस दिन विशेष महत्व रखता है. यह कार्य पुण्यप्रद माना जाता है और गरीबों को अनाज देने से घर में अन्न और धन की कोई कमी नहीं रहती. इस दान से न केवल गरीबों का पेट भरता है, बल्कि दानदाता को भी भरपूर आशीर्वाद मिलता है.
इस दिन क्या करें?
- मकर संक्रांति के दिन पितरों का तर्पण करें.
- आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सूर्य देव की आराधना करें.
- सात्विक और शुद्ध भोजन का सेवन करें.
इस दिन क्या न करें?
- इस दिन मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखें.
- किसी से विवाद, झगड़ा या अपमानजनक व्यवहार न करें.
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दुर्लभ संयोग में किए गए पुण्य कर्म जीवन की नकारात्मकता को दूर कर सुख और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं.
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