By : DB News Update| Edited By- Supriya
britain prime minister: लंदन: ब्रिटेन चुनाव के शुरूआती रूझानों में लेबर पार्टी को प्रचंड जीत की ओर आगे बढ़ रही है,अभी तक 650 में से 488 सीटों के रूझान सामने आए है, इनमें मुख्य विपक्षी पार्टी लेबर को 341 सीटों पर जीत मिल चुकी हैं। वोटों की गिनती जारी है। आपको बता दें 650 सांसदों वाले सदन (हाउस ऑफ कॉमन्स) में बहुमत की सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी को 326 सीटों की आवश्यकता होती है। जो लेबर पार्टी को मिल चुकी है।
ऋषि सुनक के जाने से भारत का नहीं होगा नुकसान
लेकिन सवाल ये है कि ऋषि सुनक का जाने का असर भारत पर क्या पड़ने वाला है. क्योंकि ऋषि सुनक ब्रिटेन के पहले हिंदू प्रधानमंत्री थे. मंदिरों में पूजा करते हुए उनकी तस्वीरें वायरल हुआ करती थीं. वो भारतीय कारोबारी और इंफोसिस के चेयरमैन नारायण मूर्ति के दामाद हैं, जिसे लेकर भारत में उत्साह का माहौल रहा है. लेकिन अब ये सब खत्म हो गया है, क्योंकि अब ऋषि सुनक प्रधानमंत्री नहीं रहे. ऐसे में भारत को कुछ ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, उल्टे फायदा ही हुआ है.
धारा 370 पर कीर स्टार्मर ने लिया था भारत का पक्ष
ऋषि सुनक को जिस नेता कीर स्टार्मर ने हराया है, उनकी पार्टी है लेबर पार्टी और ये वही लेबर पार्टी है जिसने भारत पर अंग्रेजों के शासन के दौरान भारत की आजादी का समर्थन किया था. लेकिन यही वो पार्टी है, जिसके नेता जर्मी कोर्बिन ने 2019 में कश्मीर पर तब बयान दिया था, जब धारा 370 को खत्म किया गया था. तब लेबर पार्टी के नेता जर्मी कोर्बिन ने कहा था कि कश्मीर में मानवीय संकट पैदा हो गया है, हालांकि उसी वक्त इसी लेबर पार्टी के एक और नेता कीर स्टार्मर ने कहा था कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान का आपसी मसला है. लेकिन तब बात बिगड़ चुकी थी. भारत ने अपना विरोध भी दर्ज करवाया था. लेकिन इस बीच लेबर पार्टी ही बदल गई.
कीर स्टार्मर से भारत को बड़ी उम्मीद
कश्मीर के खिलाफ बयान देने वाले जर्मी कोर्बिन चले गए और उनकी जगह ले ली भारत के समर्थक कीर स्टार्मर ने और अब वहीं प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. ऐसे में उम्मीद है कि भारत से ब्रिटेन के रिश्ते और भी मज़बूत होंगे, क्योंकि कीर पहले से भी भारत के साथ रिश्ते सुधारने की बात करते आए हैं. अब उनकी सरकार में 10 से ज्यादा सांसद तो भारतीय मूल के हो गए हैं. ऐसे में जो ऋषि सुनक फ्री ट्रेड एग्रिमेंट, वर्क परमिट, वीजा और भारत के पक्ष में सिर्फ तमाम बातें और वादे करते ही दिखे थे, शायद कीर स्टार्मर उन वादों को अमली जामा पहना सकें. यही भारत के हक में है.

