प्रयागराज में माघ मेले की शुरुआत पौष पूर्णिमा से हो चुकी है और महाशिवरात्रि तक यह पर्व चलेगा. इस दौरान 6 प्रमुख स्नान होंगे.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Magh Mela 2026: सनातन परंपरा का अद्भुत संगम प्रयागराज के रेती पर देखने को मिल रहा है. यहां दूर-दराज से बड़ी संख्या में मेहमान पहुंच रहे हैं. वह रावटी (झोपड़ी) में जप-तप करने के साथ प्रतिदिन गंगा स्नान कर रहे हैं. हिंदुओं का यह संगम सदियों से चला आ रहा है. जो देश-दुनियाभर में प्रसिद्ध है. माघ मेला भारतीय सनातन परंपरा की सबसे प्रचीन और पवित्र परपंराओं में एक है, जिसका आयोजन हर साल संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) में होता है.
माघ मेला एक ऐसा धार्मिक आयोजन है, जिसकी चर्चा विश्वभर में होती है. इस अवधि को मुख्य रूप से स्नान पर्व के लिए जाना जाता है. इस दौरान गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं.
कल्पवास कर करने पहुंचे श्रद्धालु
माघ मेले पर स्नान के लिए साधु-संत और कल्पवासी संगम तट पर स्नान, ध्यान और तपस्या करने के लिए पहुंच चुके हैं. धार्मिक मान्यानुसार माघ मेला में शामिल होने और स्नान करने से व्यक्ति जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है. इस दौरान कल्पवास का भी महत्व बढ़ जाता है.
माघ मेला स्नान की जानें दूसरी प्रमुख तिथियां
माघ मेला के दौरान कुल 6 प्रमुख स्नान किए जाएंगे. 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा पर पहला स्नान किया जाएगा. 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन दूसरा माघ स्नान होगा. 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर तीसरा स्नान, 23 जनवरी को वसंत पंचमी पर चौथा माघी स्नान, 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा स्नान और 15 फरवरी को माघ मेला के अंतिम दिन महाशिवरात्रि पर माघ मेला का स्नान किया जाएगा.
रेलवे ने चलाई स्पेशल ट्रेन
रेलवे ने समाचार एजेंसी आईएएनएस के माध्यम से जानकारी दी है कि, ” प्रयागरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है. इसके अलावा कई ट्रेनों का ठहराव भी बढ़ाया गया है.”
ड्रोन से की जा रही निगरानी
माघ मेले की निगरानी के लिए ड्रोन, एआई-इनेबल्ड कैमरे और एआई-बेस्ड सिस्टम लगाए गए हैं, जिनके जरिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. ट्रैफिक और सिक्योरिटी टीम जमीनी स्तर पर काम करते हुए देखी जा रही है.
प्रयागराज के माघ मेले में पहले दिन के पर्व स्नान के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली. सभी पवित्र गंगा स्नान को लेकर खासा उत्सुक थे. इस अवसर में खासतौर पर भारत की जेन-जी पीढ़ी ने पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र स्नान किया.
धार्मिक दृष्टि से क्यों है महत्वपूर्ण
माघ मेले में संगम पर जप-तप के साथ गंगा स्नान करना अत्यंत पवित्र और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. माघ मेला के दौरान लाखों श्रद्धालु संगम (जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का मिलन होता है) पर स्नान करने आते हैं. यह माना जाता है कि इस समय जप‑तप, ध्यान और दान के साथ गंगा स्नान करने से पापों का नाश होता है और आत्मा शुद्ध होती है. विशेष रूप से माघ मास में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का बहुत अधिक महत्व बताया गया है. साधु-संत और कल्पवासी पूरे महीने वहीं रहकर तपस्या, पूजा और साधना करते हैं, जिससे इस मेले का आध्यात्मिक वातावरण और भी गहरा हो जाता है.
जगह-जगह हो रहे भजन-कीर्तन और प्रवचन
धार्मिक मान्यता है कि माघ मास में संगम स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. मेले में साधु-संतों और कल्पवासियों की उपस्थिति ने आध्यात्मिक माहौल को और भी गहन बना दिया है. जगह-जगह भजन-कीर्तन, यज्ञ और प्रवचन का आयोजन हो रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है.
प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं. घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है, वहीं सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो. माघ मेले में लगे शिविर में भी कई श्रद्धालुओं को आश्रय मिल रहा है.
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