एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा प्रत्येक माह Fuel & Power Purchase Adjustment Surcharge (एफ.पी.पी.ए.एस.) की दरें जारी की हैं, बिजली उपभोक्ताओं को मीटर रेंट अथवा मीटरिंग चार्ज नहीं लगेंगे
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP Electricity Charges Hike News: मप्र सरकार ने 4.8 प्रतिशत बिजली महंगी कर दी है. बढ़ाई गई राशि का असर अगले माह अप्रैल 2026 से बिजली बिल में दिखाई पड़ने लगेगा. हलांकि पॉवर मैनेजमेंट ने फ्यूल एण्ड पॉवर पर्चेज अडजेस्टमेंट सरचार्ज का बहना बनाया है और प्रदेश के किसानों के हित में काम करने का दावा भी किया है. मीडिया को जारी की गई विज्ञप्ति में कंपनी के द्वारा दावा किया गया है कि किसानों के हित में सरकार निरंतर कार्य कर रही है. जैसे कि अटल कृषि ज्योति योजना के तहत 10 हॉर्स पावर तक के कृषि उपभोक्ताओं के बिलों पर म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी विद्युत दरों पर सब्सिडी स्वीकृत की जाती है, जिसके अनुसार उपभोक्ता द्वारा दी जाने वाली राशि नियामक आयोग द्वारा जारी दरों की मात्र लगभग 7 प्रतिशत राशि ही जमा करना होती है जबकि म.प्र. सरकार कृषि उपभोक्ताओं के बिलों का लगभग 93 प्रतिशत राशि सब्सिडी के रूप में वहन करती है.
घरेलू उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक के बिल पर अटल गृह ज्योति योजना का लाभ मिलेगा
इसके अतिरिक्त राज्य शासन की अटल गृह ज्योति योजना के तहत 150 यूनिट प्रति माह तक मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं को प्रथम 100 यूनिट पर मात्र रू. 100/- एवं अतिरिक्त 50 यूनिट पर वास्तविक दर से भुगतान करने का प्रावधान है. अतः घरेलू उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक के बिल पर पूर्व के भांति अटल गृह ज्योति योजना के तहत मात्र रुपये 100/- का ही भुगतान करना होगा, जबकि 100 यूनिट खपत पर शहर के प्रत्येक घरेलू उपभोक्ताओं की तरफ से शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में लगभग रुपये 600/- वहन किये जायेंगे. इस प्रकार के घरेलू उपभोक्ता जिनको सरकार सब्सिडी प्रदान कर रही है उनकी संख्या पूरे प्रदेश में लगभग एक करोड़ है, जबकि प्रदेश में कुल लगभग 38 लाख कृषि उपभोक्ता हैं जो सब्सिडी का लाभ प्राप्त कर रहे हैं. इस प्रकार चालू वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा लगभग रु.25800/- करोड़ सब्सिडी के रूप में वहन किये जा रहे है.
उल्लेखनीय है कि आयोग के निर्देश पर एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा प्रत्येक माह एफ.पी.पी.ए.एस. (Fuel & Power Purchase Adjustment Surcharge) की दरें जारी की जाती है. विगत माह में यह दर (Minus) -1.71 प्रतिशत थी, जो कि इस माह में (Minus) – 0.63 प्रतिशत के आदेश भी जारी किये गये है. यह दरें आयोग द्वारा जारी ऊर्जा प्रभार पर लागू रहेंगी. अतः प्रत्येक उपभोक्ता श्रेणी पर लागू ऊर्जा प्रभार पर 0.63 प्रतिशत की कमी कर उपभोक्ताओं के बिलों की गणना की जायेगी.
आज 26 मार्च 2026 को जारी टैरिफ आदेश
- विद्युत दरों में विगत वर्ष में लागू दरों की तुलना में वितरण कंपनियों द्वारा मांगी गयी 10.19 प्रतिशत वृद्धि के विरुद्ध मात्र 4.8 प्रतिशत की औसत दर वृद्धि की गई है.
- मौसमी उपभोक्ताओ (एच. वी. 4) तथा मेट्रो रेल (एच. वी. 9): के टैरिफ में कोई वृद्धि नहीं.
- उच्चदाब घरेलू (HV-6), उच्चदाब कृषि (HV-5) एवं उच्च दाब मेट्रो श्रेणी के उपभोक्ताओं के न्यूनतम प्रभार समाप्त किये गये. इसके पूर्व विगत वर्षों में निम्न दाब घरेलू, गैर घरेलू, पब्लिक वाटर वर्कस एवं स्ट्रीटलाईट, निम्नदाब उद्यौगिक, निम्न दाब कृषि एवं उच्च दाब मौसमी (SEASONAL) श्रेणी के उपभोक्ताओं पर न्यूनतम प्रभार समाप्त किये जा चुके है.
- विगत वर्ष की भांति उपभोक्ताओं को मीटर रेंट अथवा मीटरिंग चार्ज नहीं लगेंगे.
- 10 किलो वाट तक भार वाले ऐसे सभी उपभोक्ताओं जहां स्मार्ट मीटर स्थापित है को सौर घटों (प्रातः 09:00 बजे से सायं 05:00 बजे) के मध्य उपयोग की गयी बिजली पर 20 प्रतिशत की छूट विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी जारी. इन उपभोक्ताओं को शीर्ष मांग अवधि में कोई भी सरचार्ज देय नहीं रहेगा.
- उच्चदाब उपभोक्ताओं जिन पर टी ओ डी दरें लागू है पर रात्रिकालीन उपभोग (रात्रि 10 बजें से प्रातः 6 बजे तक) की छूट यथावत.
- जो उपभोक्ता पर्यावरण के लिये जागरुक हैं और केवल रिन्यूएबल एनर्जी से ही बिजली जलाना चाहते हैं वह 0.30/- रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त भुगतान कर ग्रीन एनर्जी से बिजली उपयोग कर सकते हैं. इन दरों में विगत वर्ष की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत की कमी.
- नवीन तथा चालू उच्च दाब / अतिरिक्त उच्च दाब उपभोक्ताओं हेतु उपलब्ध छूट/प्रोत्साहन की व्यवस्था आंशिक संशोधन के साथ यथावत.
- उच्च दाब/अति उच्च दाब उपभोक्ताओं को अन्य छूट/प्रोत्साहन की व्यवस्था यथावत जारी रहेगी.
- प्रीपेड उपभोक्ताओं को छूट/ प्रोत्साहन की व्यवस्था जारी रहेगी.
- शीघ्र / ऑनलाईन भुगतान के लिए छूट / प्रोत्साहन की व्यवस्था जारी रहेगी.
- खुली पहुँच (Open Access) उपभोक्ताओं के अतिरिक्त अधिभार में कमी.
- विद्युत वितरण कंपनियों के लिए शोध एवं विकास (R&D) फंड की व्यवस्था इससे तकनीकी हस्तक्षेप, संचालन दक्षता में सुधार एवं लागत में बचत का अध्ययन हो सकेगा

