आज भी भूत-प्रेतों में विश्वास करती है. अनेक लोग मानते हैं कि कुछ पेड़ों पर आत्माएं और भूत-प्रेत निवास करते हैं.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Ghosts on Trees: पेड़ों पर भूत-प्रेत और आत्माओं के रहने की धारणा कहें या लोगों का विश्वास, केवल भारत में ही नहीं विश्व की अनेक संस्कृतियों में पाई जाती है. अनेक लोक कथाओं में वृक्षों पर भूतों के रहने जिक्र हुआ है। आज भी अनेक लोग कुछ पेड़ों को भूतिया मानते हैं। आइए जानते हैं, ये पेड़ कौन-कौन से हैं और इन्हें भूतिया क्यों माना जाता है? वहीं हर साल जब पितृ पक्ष आता है तो लोग अपने पूर्वजों को याद करके उनका तर्पण और पिंडदान करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि केवल तर्पण और श्राद्ध ही नहीं, बल्कि कुछ पौधे लगाने से भी पितृ प्रसन्न होते हैं? ये पौधे न सिर्फ हमारे जीवन की परेशानियों को दूर करते हैं बल्कि घर में सुख-समृद्धि भी लाते हैं. कहा जाता है कि इंसान का जीवन केवल कर्मों से नहीं बल्कि पूर्वजों के आशीर्वाद से भी चलता है, अगर पितृ नाराज हों तो घर में कितनी भी मेहनत कर लो, काम पूरे नहीं होते, अड़चनें बनी रहती हैं, वहीं अगर वे प्रसन्न हो जाएं तो अचानक से किस्मत चमकने लगती है, यही कारण है कि पितृ पक्ष के दिनों में धार्मिक कर्मों के साथ-साथ पौधारोपण का भी खास महत्व माना गया है.
इन पेड़ों पर भूत-प्रेत और आत्माओं के रहने की धारणा
कपास का पेड़
अनेक लोगों का मानना है, जब कपास का पेड़, जी हां, जिससे रुई प्राप्त होती है, बहुत पुराना हो जाता है, तो उस पेड़ को बुरी आत्माएं अपने कब्जे में ले लेती हैं। ये बात कितनी सच कहना मुश्किल है, लेकिन मान्यता है कि रात के समय कपास के पेड़ के आसपास ज्यादा देर नहीं रुकना चाहिए अन्यथा आत्माएं साथ हो लेती हैं।
पीपल का पेड़
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है। लेकिन जिस पीपल के पेड़ की कभी पूजा नहीं होती है, यदि वह निर्जन स्थान पर है, जहां गंदगी या बदबू होती है। उस पीपल के पेड़ के बारे में मान्यता है कि उस पर भूत होते ही होते हैं। बता दें, हिन्दू धर्म में इस पेड़ में पितरों की आत्माओं का भी वास माना गया है।
इमली का पेड़
बड़े-बुजुर्ग भी कहते हैं और प्रचलित मान्यता भी है कि इमली का पेड़ कभी घर के आंगन में और घर के सामने नहीं लगाना चाहिए। कहते हैं, इस पर भी प्रेतों का वास होता है। मान्यता है कि इस पेड़ पर चुडैलें भी रहती हैं। साथ ही यह पेड़ नेगेटिव एनर्जी भी फैलाता है।
बांस का पेड़
भारत गांवों का देश है, जहां बांस से जुड़ी अनेक किस्से-कहानियां प्रचलति हैं। कहते हैं, बांस के वैसे झुरमुट जो गांवों से दूर होते हैं, वैसे बांसों की फुनगी पर प्रेतात्माएं झूला झूलती हैं। रात में कभी इन झुरमुटों के पास अकेले नहीं जाना चाहिए।
बरगद का पेड़
हिन्दू धर्म में बरगद के पेड़ में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास माना गया है। लेकिन लोक कथाओं में जिक्र मिलता है कि बूढ़े बरगद के पेड़ में आत्माओं का वास होता है, जो प्रायः अच्छी होती हैं। यूपी-बिहार में अनेक जगहों पर इन्हें ‘बरम बाबा’ के नाम से पूजा जाता है।
वो 5 पौधे जिन्हें लगाने से पितृ होते हैं प्रसन्न
तुलसी का पौधा – हिंदू धर्म में तुलसी को माता का दर्जा दिया गया है, पितृ पक्ष में तुलसी का पौधा लगाने व उसकी नियमित पूजा करने से पितृ आत्माएं प्रसन्न होती हैं, तुलसी के समक्ष सुबह-शाम दीपक जलाने और जल अर्पित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है, तुलसी के पौधे के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है, श्राद्ध पक्ष में तुलसी की पत्ती चढ़ाकर तर्पण करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.
पीपल का पेड़ – धार्मिक ग्रंथों में पीपल में देवताओं और पितरों का निवास स्थान माना गया है, पितृ पक्ष में पीपल का पौधा लगाने और उसकी सेवा करने से पूर्वज जल्दी प्रसन्न होते हैं, शनिवार या अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाना और दीपक लगाना बहुत शुभ माना जाता है, पीपल का पेड़ घर-परिवार से पितृ दोष को दूर करता है और जीवन की रुकावटें खत्म करता है, यही वजह है कि गांवों और मंदिरों में पीपल के पेड़ को विशेष महत्व दिया जाता है.
केले का पौधा – केले का पौधा लक्ष्मी जी और विष्णु जी को प्रिय है, पितृ पक्ष के दौरान केले का पौधा लगाने से घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है, मान्यता है कि केले के पौधे के पास गुरुवार के दिन दीपक जलाने और प्रसाद चढ़ाने से पितर प्रसन्न होकर संतानों को लंबी उम्र और खुशहाल जीवन का आशीर्वाद देते हैं, खासकर जिन परिवारों में अक्सर कलह, धन की कमी या स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें बनी रहती हैं, वहां केले का पौधा लगाना बेहद शुभ फल देता है.
बरगद का पौधा – बरगद को दीर्घायु और मोक्ष प्रदान करने वाला वृक्ष माना जाता है, इसका पौधा लगाने से पितृ प्रसन्न होते हैं और जीवन की परेशानियां कम होती हैं.
बेल का पेड़ – भगवान शिव का प्रिय बेल जिसे पवित्र और गुणकारी माना गया है, बेल का पेड़ लगाने से अतृप्त आत्माओं को शांति मिलती है तो वहीं अमावस्या के दिन बेल पत्र और गंगाजल शिवजी पर अर्पण करने से सभी पितरों को मुक्ति मिलेगी, बेलपत्र पर चंदन का लेप लगाएं और शिवजी को चढ़ाएं तो पितरों के डरावने सपने नहीं आएंगे.
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