आवाज सुनकर ग्रामीणों ने जब घटनास्थल पर जाकर देखा तो इसकी सूचना वन परिक्षेत्र अधिकारी पंकज दुबे को दी.प्रिजर्व कर जबलपुर लैब भेजा जा रहा है। शावक को क्रेज (पिंजरे) में रखकर रात भर निगरानी की जाएगी।
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Mp News Satna: चित्रकूट उप वन मंडल के मझगवां रेंज की चितहरा बीट के राजस्व क्षेत्र में बने बांध के कीचड़ में बुधवार की दोपहर करीब 3 बजे टाइगर के 4 माह की फीमेल शावक बुरी तरह से फंस गई। पहले तो उसने स्वयं निकलने की कोशिश की लेकिन असफल होने पर गुर्राने लगी। आवाज सुनकर ग्रामीणों ने जब घटनास्थल पर जाकर देखा तो इसकी सूचना वन परिक्षेत्र अधिकारी पंकज दुबे को दी। रेंजर के मुताबिक मादा शावक करीब 4 घंटे तक दलदल में फंसी रही। ग्रामीणों के सहयोग से जाल और लकड़ी के माध्यम से उसे बाहर निकाला गया।
शावक चलने फिरने असहज महसूस कर रही
उधर, चित्रकूट उप वन मंडलाधिकारी अभिषेक तिवारी ने बताया कि शावक को दलदल से बाहर निकालने में 15 मिनट का समय लगा। फिलहाल शावक चलने-फिरने में असहज महसूस कर रही है, लिहाजा टाइगर सफारी मुकुंदपुर से वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. राजेश तोमर को बुलाया गया। जिनके द्वारा जांच की जा रही है। तिवारी ने अनुमान के तौर पर बताया कि शावक अपनी मां से बिछडक़र यहां तक पहुंची होगी। शावक की मां ने इसे अकेला क्यों छोड़ा? इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
प्रिजर्व की जबलपुर लैब में होगी जांच
फीमेल शावक की जांच कर रहे डॉ. तोमर ने बताया कि जब शावक को दलदल से बाहर निकाला गया तो वह काफी देर तक अद्र्ध बेहोशी की हालत में रही। उसकी स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। जांच के तौर पर उसके रक्त का नमूना ले लिया गया है, जिसे प्रिजर्व कर जबलपुर लैब भेजा जा रहा है। शावक को क्रेज (पिंजरे) में रखकर रात भर निगरानी की जाएगी। उसके शरीर में बाहरी चोट नहीं है। स्थिति सामान्य होने पर संभवत: गुरूवार को अंदरूनी जांच की जाएगी।
सबसे पहले खुद की सुरक्षा जरूरी
खुद की और आसपास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें, अगर शावक जंगली है (जैसे तेंदुआ, लोमड़ी आदि), तो पास जाने से बचें। यदि जानकारी लग गई है तो स्थानीय वन विभाग, पशु बचाव टीम या NGO को कॉल करें। अगर शहर में हैं, तो animal helpline या fire brigade भी मदद कर सकती है।
दूरी बनाकर स्थिति देखें
शावक कितना घायल है, ये दूर से ही समझने की कोशिश करें, मां आसपास हो सकती है, इसलिए ध्यान रखें। खुद बचाव करने की स्थिति में सिर्फ तब जब कोई और मदद उपलब्ध न हो और शावक सुरक्षित रूप से बचाया जा सकता हो, ऐसी स्थिति में बचाव भी करने की कोशिश करना चाहिए। मोटे दस्ताने पहनकर रखें, धीरे-धीरे और शांत तरीके से पास जाएं, अगर जाल/रस्सी में फंसा है, तो सावधानी से काटें और गड्ढे में है तो मजबूत सहारा (लकड़ी/सीढ़ी) दें। जिससे उसके निकलने में मदद मिल सके।
ऐसा बिल्कुल भी न करें
- घबराकर तेज आवाज या भीड़ न लगाएं
- शावक को जोर से खींचकर निकालने की कोशिश न करें
- बिना अनुभव के जंगली जानवर को हाथ न लगाएं
- बचाने के बाद अगर घायल है तो तुरंत पशु चिकित्सक के पास ले जाएं
- जंगली शावक को वापस प्राकृतिक स्थान पर छोड़ने के लिए वन विभाग को सौंपें
खुद को शावक से कितना खतरा
छोटे शावक (जैसे हिरण, बकरी आदि) आमतौर पर इंसानों के लिए नुकसानदेह नहीं होते। लेकिन बड़े शिकारी जानवरों के शावक (जैसे शेर या बाघ) भी खेलते-खेलते खरोंच या काट सकते हैं, जिससे चोट लग सकती है। जिससे घातक बीमारी होने की खतरा हो सकता है।
असली खतरा तब जब माँ या झुंड में जाते हैं
सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब आप किसी शावक के पास जाते हैं, उस दौरान उसकी माँ बहुत आक्रामक हो सकती है और हमला कर सकती है। उदाहरण के लिए, भालू या हाथी अपने बच्चों की रक्षा के लिए बेहद खतरनाक हो जाते हैं। जंगली शावक बीमारियाँ भी फैला सकते हैं। उन्हें छूने या उठाने से वे डर सकते हैं और प्रतिक्रिया में काट सकते हैं। इन सब खतरों से बचने के लिए आदमी को सावधान रहने की जरूरत है, जिससे आप और आपके परिवार पर किसी प्रकार का संकट न आए।

