डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि महाकुंभ को लेकर दी जा रही हर धमकी को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है. महाकुंभ में 7 लेयर की सुरक्षा व्यवस्था.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Maha Kumbh 2025 Security: प्रयागराज महाकुंभ में अनहोनी होने पर श्रद्धालुओं के जान माल की रक्षा किस तरह की जानी है और आतंकियों को कैसे काबू में करना है, इसका मॉक ड्रिल किया जा रहा है. इसी कड़ी में शनिवार को यूपी के डीजीपी प्रशांत कुमार की मौजूदगी में एटीएस के कमांडोज ने एक बार फिर से मॉक ड्रिल कर अपनी तैयारियों को परखा. आस्था के मेले में अगर कोई अनहोनी होती है तो किस तरह से हमले को नाकाम करना है. ऑपरेशन में टीम के किस सदस्य की क्या भूमिका होगी, इसे तय किया जा रहा है.
महाकुंभ में 7 लेयर की सुरक्षा व्यवस्था
डीजीपी प्रशांत कुमार ने इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि महाकुंभ को लेकर दी जा रही हर एक धमकी को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है. धमकी के बावजूद महाकुंभ में आने वाले हर श्रद्धालु की जल थल और नभ से सुरक्षा की जाएगी. महाकुंभ में सात लेयर की सुरक्षा व्यवस्था होगी. हमारी सभी तैयारी पूरी हो चुकी है. हम हर धमकी को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं. अलग-अलग एजेंसियां अपने स्तर पर इन धमकियों की जांच कर उचित कार्रवाई कर रही हैं.धमकी चाहे जितनी भी हो, लेकिन श्रद्धालुओं को पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी.
इंटरनेशनल और इंटर स्टेट बॉर्डर्स पर भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया कि एटीएस की महिला कमांडो ने भी मेला क्षेत्र में डेरा जमा लिया है. 2019 के कुंभ के मुकाबले सुरक्षा इंतजामों में 40 फ़ीसदी की बढ़ोतरी की गई है. इंटरनेशनल और इंटर स्टेट बॉर्डर्स पर भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं. साइबर क्राइम से जुड़ी हुई घटनाओं को लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है.
7 लेयर की सुरक्षा व्यवस्था
महाकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन “7-लेयर सुरक्षा व्यवस्था” करने जा रहा है. इसका उद्देश्य भीड़ नियंत्रण, अपराध रोकथाम और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देना होता है. आम तौर पर ये 7 लेयर इस प्रकार होती हैं-
बाहरी सीमा (Outer Perimeter)
शहर/जिले की सीमाओं पर चेकिंग
वाहनों की जांच और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर
शहर प्रवेश बिंदु (Entry Points)
प्रमुख एंट्री गेट्स पर पुलिस व सुरक्षा बल तैनात
मेटल डिटेक्टर और बैगेज स्कैनिंग
यातायात नियंत्रण (Traffic Layer)
अलग-अलग रूट डायवर्जन
पार्किंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रबंधन
मेला क्षेत्र की परिधि (Mela Boundary)
मेले के चारों ओर बैरिकेडिंग
केवल अधिकृत व्यक्तियों को प्रवेश
संवेदनशील स्थल (Sensitive Zones)
घाट, मंदिर और VIP क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा
CCTV, ड्रोन और निगरानी टीम
भीड़ प्रबंधन (Crowd Control)
अलग-अलग रास्तों से एंट्री और एग्जिट
रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और कंट्रोल रूम
आंतरिक सुरक्षा (Inner Core)
सादी वर्दी में पुलिस (plain clothes)
एंटी-टेरर स्क्वॉड, बम निरोधक दस्ता
आपातकालीन मेडिकल और रेस्क्यू टीम
आधुनिक उपकरण से सुरक्षा व्यवस्थाा
महाकुंभ में CCTV नेटवर्क, ड्रोन सर्विलांस, AI आधारित फेस रिकग्निशन (कुछ आयोजनों में) व NDRF, SDRF और मेडिकल टीम की तैनाती की गई है, जिससे विदेशी षड़यंत्र पर नियंत्रण किया जा सके. क्योंकि ऐसे आयोजनों पर विदेशी दुश्मन इसी ताक में रहता है कि कब पड़ोसी देश को अस्थिर किया जाए.
भीड़ नियंत्रण के भी किए जाते हैं उपाय
महाकुंभ जैसे विशाल आयोजनों में भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) सबसे बड़ी चुनौती होती है, इसलिए प्रशासन कई स्तरों पर सुनियोजित इंतजाम करता है. ये उपाय लोगों की सुरक्षा, सुचारु आवाजाही और भगदड़ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहद जरूरी होते हैं.
रूट प्लानिंग और बैरिकेडिंग
एंट्री और एग्जिट के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए जाते हैं
बैरिकेड लगाकर भीड़ की दिशा नियंत्रित की जाती है
“वन-वे मूवमेंट” लागू किया जाता है
भीड़ का विभाजन (Crowd Segmentation)
अलग-अलग जोन और सेक्टर बनाए जाते हैं
हर क्षेत्र में सीमित संख्या में लोगों को जाने दिया जाता है
रियल-टाइम मॉनिटरिंग
CCTV कैमरे और ड्रोन से निगरानी
कंट्रोल रूम से लगातार भीड़ की स्थिति पर नजर
भीड़ ज्यादा होने पर तुरंत रूट डायवर्ट
पुलिस और स्वयंसेवकों की तैनाती
हर प्रमुख स्थान पर पुलिस बल
NCC, NSS और स्वयंसेवक लोगों को गाइड करते हैं
लाउडस्पीकर से निर्देश दिए जाते हैं
समय-आधारित प्रबंधन
स्नान (डुबकी) के लिए समय स्लॉट तय किए जा सकते हैं
भीड़ को अलग-अलग समय में बांटा जाता है
इमरजेंसी प्लान
मेडिकल टीम और एम्बुलेंस हर समय तैयार
भगदड़ या दुर्घटना की स्थिति में तुरंत निकासी (evacuation)
आपातकालीन मार्ग (Emergency Exit) बनाए जाते हैं

